ग्रीनलैंड पर क्यों नजरें गड़ाए बैठे हैं ट्रंप? अमेरिका के 250वें बर्थडे से जुड़ती है पूरी रणनीति
2026 की शुरुआत में वैश्विक राजनीति अचानक उबाल पर आ गई है. अमेरिका के एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन और डोनाल्ड ट्रंप की आक्रामक रणनीति ने दुनिया को चौंका दिया है. वेनेजुएला से लेकर ग्रीनलैंड तक, ट्रंप के हालिया कदमों ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर अमेरिका का अगला निशाना कौन हो सकता है.

नई दिल्ली: 2026 की शुरुआत वैश्विक राजनीति के लिए किसी थ्रिलर से कम नहीं रही है. साल के पहले ही हफ्तों में अमेरिका की आक्रामक रणनीति ने दुनिया को चौंका दिया, जब एक गुप्त सैन्य ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी को अगवा किया गया. इस कार्रवाई को डोनाल्ड ट्रंप ने "ऑपरेशन एब्सोल्यूट रिजॉल्व" नाम दिया, जिसके बाद यह सवाल उठने लगा कि अमेरिका का अगला निशाना कौन होगा.
इसी बीच ग्रीनलैंड को लेकर ट्रंप की बयानबाजी ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति में हलचल मचा दी है. नाटो सदस्य डेनमार्क के हिस्से रहे इस विशाल द्वीप को लेकर ट्रंप जिस आक्रामक अंदाज में बात कर रहे हैं, उसने यूरोप को चिंता में डाल दिया है. हालात ऐसे बन गए हैं कि कई यूरोपीय नेताओं को अब रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन भी पहले जितने खतरनाक नहीं लग रहे.
ग्रीनलैंड को लेकर क्यों बढ़ी यूरोप की चिंता
ग्रीनलैंड पर ट्रंप के रुख ने यूरोप में रणनीतिक असमंजस पैदा कर दिया है. 16 जनवरी को जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने विदेश नीति में बदलाव के संकेत देते हुए रूस के साथ रिश्तों को फिर से संतुलित करने की बात कही. यह वही मर्ज हैं, जो कुछ हफ्ते पहले तक पुतिन पर सोवियत संघ को दोबारा खड़ा करने का आरोप लगा रहे थे.
लेकिन 2026 में हालात बदल चुके हैं. अब ट्रंप ऐसे नेता के रूप में देखे जा रहे हैं, जो किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं.
क्या है ‘डोनरो डॉक्ट्रिन’?
ट्रंप की इस नई सोच को विश्लेषक "डोनरो डॉक्ट्रिन" कह रहे हैं. इसका संबंध 1823 की मुनरो डॉक्ट्रिन से जोड़ा जा रहा है, जिसके तहत अमेरिका ने पूरे अमेरिकी महाद्वीप को अपना प्रभाव क्षेत्र घोषित किया था.ट्रंप की नजर में अमेरिका उनका "बैकयार्ड" है, जबकि ग्रीनलैंड "फ्रंटयार्ड".
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा है कि अगर अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जा नहीं किया, तो रूस या चीन वहां अपनी मौजूदगी बढ़ा देंगे, और ऐसा होने नहीं दिया जाएगा.
मिसाइल डिफेंस और सुरक्षा की बड़ी कड़ी
ट्रंप का मानना है कि ग्रीनलैंड उनके "गोल्डन डोम" मिसाइल डिफेंस सिस्टम के लिए बेहद अहम है. शीत युद्ध के दौर से ही अमेरिका ने यहां मिसाइल ट्रैकिंग रडार तैनात कर रखे हैं, ताकि आर्कटिक के रास्ते रूस से आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों पर नजर रखी जा सके.आज भी ग्रीनलैंड में पिटुफिक स्पेस बेस अमेरिका का प्रमुख सैन्य ठिकाना है.
खनिज, समुद्री रास्ते और रणनीतिक बढ़त
ग्रीनलैंड दुनिया का सबसे बड़ा द्वीप है, जिसका आकार भारत के लगभग दो-तिहाई के बराबर है. यह इलाका खनिजों और रेयर अर्थ मेटल्स से भरपूर माना जाता है.इसके अलावा यह नॉर्थवेस्ट पैसेज के पश्चिमी छोर पर स्थित है. जैसे-जैसे बर्फ पिघलेगी, यह समुद्री रास्ता भविष्य में पूर्वी एशिया और यूरोप के बीच व्यापार का बड़ा केंद्र बन सकता है.
डेनमार्क से समझौता क्यों नहीं?
सवाल उठता है कि अमेरिका ये सभी फायदे डेनमार्क से समझौते के जरिए भी हासिल कर सकता है. खुद डेनमार्क का कहना है कि अमेरिका ने ग्रीनलैंड में अपने कई पुराने सैन्य अड्डे बंद कर दिए हैं. ऐसे में ट्रंप का सीधे खरीद या कब्जे पर जोर एक पुरानी अमेरिकी सोच की ओर इशारा करता है-मैनिफेस्ट डेस्टिनी.
मैनिफेस्ट डेस्टिनी और अमेरिकी विस्तार की विरासत
मैनिफेस्ट डेस्टिनी 19वीं सदी की वह विचारधारा थी, जिसके मुताबिक अमेरिका का विस्तार होना तय और जायज माना जाता था. यह सोच राष्ट्रपति जेम्स के पोल्क के दौर में उभरी.
उनके कार्यकाल में अमेरिका ने करीब 10 लाख वर्ग मील क्षेत्र जोड़ा—ब्रिटेन से ओरेगन लिया और मेक्सिको से टेक्सास व कैलिफोर्निया जीतकर देश को समुद्र से समुद्र तक फैला दिया.
इतिहास बताता है कि अमेरिका ने अपने कुल क्षेत्रफल का करीब 40% हिस्सा खरीद के जरिए हासिल किया है. 1803 में फ्रांस से लुइसियाना और 1867 में रूस से अलास्का की खरीद इसी का उदाहरण है.
250वां बर्थडे और ट्रंप की 'विरासत'
ग्रीनलैंड पर ट्रंप की दिलचस्पी सिर्फ रणनीति तक सीमित नहीं दिखती. 4 जुलाई 2026 को अमेरिका अपनी आजादी के 250 साल पूरे करेगा. इस मौके पर भव्य आयोजनों की योजना है, जिनकी अगुवाई खुद ट्रंप करेंगे.
व्हाइट हाउस में एक नया स्टेट बॉलरूम भी बनाया जा रहा है.
ऐसे में अगर ट्रंप इस दिन ग्रीनलैंड को अमेरिका का 51वां राज्य घोषित करते हैं, तो यह उनके लिए एक ऐतिहासिक क्षण होगा. इससे वे खुद को 21वीं सदी के जेम्स पोल्क के रूप में स्थापित कर सकते हैं.
एक रियल एस्टेट कारोबारी से राष्ट्रपति बने ट्रंप के लिए, इससे बड़ी राजनीतिक विरासत शायद ही कोई और हो.


