चीन-पाक दोस्ती का काउंटर है चाबहार, भारत ने दिखाया दो टूक रुख

भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अमेरिकी प्रतिबंधों से जुड़ी अनिश्चितताओं के बावजूद ईरान के चाबहार पोर्ट से पीछे नहीं हटेगा और इस पर अमेरिका से बातचीत जारी है. चाबहार भारत के लिए व्यापार, ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी के लिहाज से एक रणनीतिक केंद्र बना हुआ है.

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

भारत ने ईरान के चाबहार बंदरगाह को लेकर अपने रुख को स्पष्ट करते हुए संकेत दिए हैं कि वह इस परियोजना से पीछे हटने वाला नहीं है. हाल के दिनों में यह मुद्दा इसलिए चर्चा में है, क्योंकि चाबहार पोर्ट के संचालन से जुड़ी अमेरिकी प्रतिबंधों में दी गई छूट 26 अप्रैल को समाप्त होने वाली है. 

 चाबहार पर विदेश मंत्रालय की प्रतिक्रिया

इस संबंध में विदेश मंत्रालय ने दोहराया है कि चाबहार भारत के लिए रणनीतिक, आर्थिक और भू-राजनीतिक दृष्टि से बेहद अहम है और इसे लेकर अमेरिका के साथ लगातार बातचीत जारी है. विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने बताया कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने 28 अक्टूबर 2025 को दिशानिर्देश जारी कर 26 अप्रैल 2026 तक सशर्त प्रतिबंधों में छूट को वैध रखा था. भारत इस अवधि के बाद भी चाबहार में अपने ऑपरेशंस जारी रखने के विकल्पों पर अमेरिका के साथ संवाद कर रहा है. भारत का मानना है कि यह परियोजना केवल व्यापार तक सीमित नहीं है, बल्कि पूरे क्षेत्र की कनेक्टिविटी और स्थिरता से जुड़ी हुई है.

चाबहार पोर्ट का सबसे बड़ा महत्व इसका भौगोलिक स्थान है. ईरान के दक्षिण-पूर्वी तट पर स्थित यह बंदरगाह भारत को पाकिस्तान को बाईपास करते हुए अफगानिस्तान और मध्य एशिया तक सीधी पहुंच देता है. लंबे समय से पाकिस्तान द्वारा जमीनी मार्गों पर नियंत्रण के कारण भारत को अफगानिस्तान में व्यापार और सहायता भेजने में कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है. चाबहार इस बाधा को दूर करता है और भारत को एक ऐसा समुद्री रास्ता देता है, जो राजनीतिक तनाव और क्षेत्रीय चोकपॉइंट्स से अपेक्षाकृत मुक्त है.

इसके अलावा चाबहार इंटरनेशनल नॉर्थ-साउथ ट्रांसपोर्ट कॉरिडोर (INSTC) का भी अहम हिस्सा है. यह बहु-माध्यम परिवहन नेटवर्क भारत को ईरान, रूस और आगे यूरोप तक जोड़ता है. इस मार्ग के जरिए पारंपरिक स्वेज नहर रूट की तुलना में समय और लागत दोनों में कमी आती है, जिससे यूरेशियाई बाजारों के साथ भारत का व्यापार और मजबूत हो सकता है.

भारत के लिए चाबहार क्यों महत्वपूर्ण?

ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से भी चाबहार भारत के लिए महत्वपूर्ण है. यह ईरान और मध्य एशिया से ऊर्जा आयात का एक वैकल्पिक मार्ग बन सकता है, जिससे भारत को सप्लाई रूट्स में विविधता लाने और संवेदनशील समुद्री रास्तों पर निर्भरता घटाने में मदद मिलेगी.

रणनीतिक स्तर पर चाबहार को चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर के तहत विकसित ग्वादर पोर्ट के संतुलन के रूप में भी देखा जाता है. चाबहार में सक्रिय मौजूदगी से भारत क्षेत्रीय समुद्री कनेक्टिविटी में अपनी भूमिका बनाए रख सकता है. यह बंदरगाह पहले ही मानवीय सहायता के लिए इस्तेमाल हो चुका है, जिसमें अफगानिस्तान को खाद्यान्न भेजना शामिल है.

साल 2024 में भारत ने इंडियन पोर्ट्स ग्लोबल लिमिटेड के माध्यम से चाबहार में एक टर्मिनल के संचालन के लिए 10 साल का समझौता किया था और करीब 120 मिलियन डॉलर के निवेश की प्रतिबद्धता जताई थी. भारत ने वर्ष 2003 में ही चाबहार को विकसित करने का प्रस्ताव रखा था और तमाम अड़चनों के बावजूद अब भी इसे अपनी क्षेत्रीय कनेक्टिविटी रणनीति का अहम स्तंभ मानता है.

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