अमेरिका को भारत के सहारे जंग लड़नी पड़ेगी? डगलस मैकग्रेगर का सनसनीखेज दावा

अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने कहा कि हमलों में अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है. हालात ऐसे बन रहे हैं कि अमेरिका को क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिए भारत और उसके बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ सकता है. 

Suraj Mishra
Edited By: Suraj Mishra

मध्य पूर्व में ईरान, अमेरिका और इजरायल के बीच जारी तनावपूर्ण हालात के बीच युद्ध छठे दिन भी जारी है. इसी बीच अमेरिकी सेना के पूर्व कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने दावा किया है कि इस संघर्ष में ईरान अपेक्षा से अधिक मजबूती के साथ मुकाबला कर रहा है. उन्होंने यह भी कहा कि हमलों में अमेरिका के कई सैन्य ठिकानों को नुकसान पहुंचा है और हालात ऐसे बन रहे हैं कि अमेरिका को क्षेत्रीय सैन्य गतिविधियों के लिए भारत और उसके बंदरगाहों पर निर्भर होना पड़ सकता है. 

भारत सरकार की नहीं आई प्रतिक्रिया

इन दावों पर अमेरिकी प्रशासन या भारत सरकार की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मैकग्रेगर का कहना है कि ईरान को अप्रत्यक्ष रूप से रूस और चीन से सहयोग मिल रहा है. उनके अनुसार दोनों देश युद्ध की गतिविधियों पर लगातार नजर बनाए हुए हैं और सैटेलाइट इंटेलिजेंस के जरिए ईरान को जानकारी उपलब्ध करा रहे हैं. उन्होंने दावा किया कि इसी वजह से ईरान को कुछ सैन्य अभियानों में सफलता मिली है, खासकर इजरायल और अमेरिका से जुड़े ठिकानों को निशाना बनाने में.

पूर्व कर्नल ने कहा कि कई अमेरिकी सैन्य ठिकानों और समुद्री सुविधाओं को नुकसान पहुंचा है. उनके अनुसार कुछ हार्बर इंस्टॉलेशन भी हमलों की चपेट में आए हैं. उन्होंने यह भी कहा कि यदि हालात इसी तरह बने रहे तो अमेरिका को अपने अभियानों के लिए दूसरे सहयोगी देशों के बंदरगाहों का सहारा लेना पड़ सकता है. मैकग्रेगर का दावा है कि मौजूदा संघर्ष में ईरान अपेक्षाकृत बेहतर रणनीति के साथ जवाब दे रहा है.

अमेरिका के रक्षा मंत्री हेगसेथ ने क्या कहा? 

इस बीच अमेरिका के रक्षा मंत्री हेगसेथ ने भी स्वीकार किया है कि ईरान के कुछ हवाई हमले अभी भी अपने लक्ष्य तक पहुंचने में सफल हो सकते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी सेना की तकनीकी और सैन्य क्षमता उसे क्षेत्र में तेजी से नियंत्रण स्थापित करने में सक्षम बनाती है. उन्होंने भरोसा जताया कि अमेरिका के पास युद्ध के लिए पर्याप्त सैन्य संसाधन उपलब्ध हैं.

पेंटागन में पत्रकारों से बातचीत के दौरान हेगसेथ ने कहा कि पश्चिम एशिया में तैनात अमेरिकी सैनिकों और सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए वायु रक्षा प्रणाली को और मजबूत किया गया है.उनके अनुसार अमेरिका ने हमलों से बचाव के लिए सभी आवश्यक तैयारियां की हैं, लेकिन किसी भी युद्ध में हर खतरे को पूरी तरह रोक पाना संभव नहीं होता.

अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने जताई चिंता 

इस संघर्ष के बीच अमेरिकी सेना के शीर्ष अधिकारियों ने भी खतरे को लेकर चिंता जताई है. जॉइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन डैन केन ने कहा कि क्षेत्र में तैनात अमेरिकी सैनिक अभी भी जोखिम में हैं और हालात बेहद संवेदनशील बने हुए हैं. हाल ही में कुवैत के एक नागरिक बंदरगाह पर स्थित अभियान केंद्र पर ईरानी ड्रोन हमले में छह अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी, जिससे क्षेत्र में सुरक्षा को लेकर चिंता और बढ़ गई है.

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो इससे पूरे पश्चिम एशिया की सुरक्षा स्थिति और वैश्विक राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो