होर्मुज तनाव के बीच रियाद पहुंचे अजित डोभाल, क्या पश्चिम एशिया के संकट में भारत की बड़ी भूमिका है

होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव बढ़ रहा है, तो NSA अजित डोभाल का रियाद दौरा भारत की मजबूत कूटनीतिक चाल माना जा रहा है. अमेरिका-ईरान टकराव के बीच भारत अब सिर्फ तमाशबीन नहीं, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और समुद्री रास्तों की रक्षा में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार है.

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ईरान और अमेरिका के बीच युद्धविराम टूटने तथा पाकिस्तान में हुई बेनतीजा शांति वार्ता के बाद होर्मुज स्ट्रेट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. इस संकट के बीच भारत के एक जहाज पर हमले की खबर भी सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप होर्मुज को लेकर सख्त रुख अपनाए हुए हैं, जबकि ईरान भी किसी भी तरह पीछे हटने को तैयार नहीं दिख रहा है. इसी बीच अमेरिकी नौसेना ने गल्फ ऑफ ओमान में ईरानी कार्गो जहाज तौस्का पर फायरिंग कर उसे जब्त कर लिया है.

होर्मुज संकट के बीच अजीत डोभाल पहुंचे सऊदी अरब

होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव के बीच भारत की कूटनीतिक गतिविधियां तेज हो गई हैं. राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल रविवार को आधिकारिक दौरे पर रियाद पहुंच गए. इस यात्रा को पश्चिम एशिया में बदलते समीकरणों के बीच भारत की सक्रिय और रणनीतिक कूटनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा रहा है.

भारत अब कच्चे तेल की आपूर्ति के लिए वैकल्पिक देशों पर भी काम कर रहा है. डोभाल का यह दौरा सिर्फ औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि ऊर्जा सुरक्षा और क्षेत्रीय स्थिरता सुनिश्चित करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है.

रियाद में अहम मीटिंग

राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल ने सऊदी अरब के शीर्ष नेतृत्व के साथ कई महत्वपूर्ण बैठकें कीं. उन्होंने ऊर्जा मंत्री प्रिंस अब्दुलअजीज बिन सलमान, विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और अपने समकक्ष मुसैद अल-ऐबान से मुलाकात की. इन बैठकों में द्विपक्षीय संबंधों के साथ-साथ क्षेत्रीय हालात पर विस्तार से चर्चा हुई. भारतीय दूतावास ने इस दौरे को रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया है.

होर्मुज संकट और भारत की चिंता

यह दौरा ऐसे समय में हुआ है जब होर्मुज जलडमरूमध्य में तनाव चरम पर है. यह क्षेत्र दुनिया की तेल सप्लाई का सबसे महत्वपूर्ण रास्ता माना जाता है. यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक बाजार और भारत की ऊर्जा जरूरतों पर पड़ता है. ऐसे में भारत के लिए अपने हितों की रक्षा के साथ क्षेत्र में शांति बनाए रखने की कोशिश करना जरूरी हो गया है.

ऊर्जा सुरक्षा पर रहा फोकस

डोभाल की इस यात्रा का सबसे बड़ा फोकस ऊर्जा सुरक्षा रहा. भारत अपनी तेल जरूरतों का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से पूरा करता है. ऐसे में सऊदी अरब जैसे देश के साथ करीबी सहयोग बेहद जरूरी है. इसके अलावा क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव और समुद्री सुरक्षा भी चर्चा का अहम हिस्सा रहे. First Updated : Monday, 20 April 2026