1 फरवरी से बांग्लादेश में सभी कपड़ा फैक्ट्रियों पर लग जाएगा ताला! 10 लाख लोगों का रोजगार खतरे में

बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री गंभीर संकट में है, ड्यूटी-फ्री यार्न इम्पोर्ट रोक, गैस की कमी और बढ़ी लागत से स्पिनिंग मिल्स प्रभावित. 10 लाख नौकरियां खतरे में, मिलर्स और निर्यातकों के बीच टकराव बढ़ा, उद्योग और समाज पर गंभीर असर.

Yaspal Singh
Edited By: Yaspal Singh

नई दिल्लीः बांग्लादेश की वस्त्र उद्योग गंभीर संकट से गुजर रही है. घरेलू स्पिनिंग मिल्स ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार जनवरी के अंत तक यार्न के ड्यूटी-फ्री इम्पोर्ट की सुविधा बहाल नहीं करती, तो 1 फरवरी से देशभर की स्पिनिंग यूनिट्स का उत्पादन ठप हो जाएगा. उद्योग के अनुसार, यह कदम रोजगार और अर्थव्यवस्था पर गंभीर प्रभाव डालेगा.

यार्न इम्पोर्ट पर विवाद

संकट तब और बढ़ गया जब बांग्लादेश के वाणिज्य मंत्रालय ने राष्ट्रीय राजस्व बोर्ड (NBR) को बॉन्डेड वेयरहाउस सिस्टम के तहत इम्पोर्टेड यार्न पर ड्यूटी-फ्री सुविधा निलंबित करने की सिफारिश की. सरकार का तर्क है कि ड्यूटी-फ्री यार्न के इम्पोर्ट से घरेलू स्पिनिंग मिलों को भारी नुकसान हुआ है. वहीं गारमेंट निर्माता सालों से भारत से कॉटन यार्न और चीन से पॉलिएस्टर यार्न आयात करते रहे हैं, क्योंकि ये सस्ते और गुणवत्ता में बेहतर हैं.

गैस की कमी

पिछले 3-4 महीनों में गैस संकट के कारण बांग्लादेश के कपड़ा उद्योग को लगभग 2 अरब डॉलर का नुकसान हुआ है. गैस की कमी, अनियमित आपूर्ति और बढ़ी कीमतों से कई स्पिनिंग मिलों की उत्पादन क्षमता 50 प्रतिशत तक घट गई. बावजूद इसके, सरकार ने न तो गैस पर सब्सिडी दी है और न ही कोई बड़ी आर्थिक मदद प्रदान की है. बांग्लादेश टेक्सटाइल मिल्स एसोसिएशन (BTMA) के अनुसार, सस्ते भारतीय यार्न के कारण बाजार में 12,000 करोड़ टका से अधिक का स्टॉक पड़ा हुआ है. अब तक 50 से अधिक मिलें बंद हो चुकी हैं, जिससे हजारों श्रमिक बेरोजगार हुए हैं.

मिल्स एसोसिएशन की प्रमुख मांगें

BTMA की मांग है कि 10-30 काउंट कॉटन यार्न पर ड्यूटी-फ्री आयात सुविधा समाप्त की जाए. इसके अलावा, गैस पर सब्सिडी और निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की जाए, VAT में अस्थायी राहत दी जाए, बैंक ऋणों पर ब्याज दरें कम की जाएं और सरकार के साथ व्यापक संवाद हो. सरकारी आंकड़ों के अनुसार, 2025 में बांग्लादेश ने लगभग 70 करोड़ किलोग्राम यार्न आयात किया, जिसमें 78 प्रतिशत यार्न भारत से आया और 2 अरब डॉलर खर्च हुए.

10 लाख नौकरियों पर संकट

BTMA ने चेतावनी दी है कि यदि 1 फरवरी से स्पिनिंग यूनिट्स बंद होती हैं, तो लगभग 10 लाख नौकरियां खतरे में पड़ सकती हैं. इसके परिणामस्वरूप सामाजिक अशांति भी उत्पन्न हो सकती है. उद्योग ने अंतरिम सरकार को यह चेतावनी पहले ही दे दी थी, लेकिन अब तक VAT में राहत की घोषणा नहीं हुई है.

मिलर्स बनाम गारमेंट निर्यातक

संकट ने घरेलू मिल्स और गारमेंट निर्यातकों के बीच टकराव बढ़ा दिया है. मिल्स का दावा है कि घरेलू उद्योग पूरी मांग पूरी कर सकता है, जबकि बांग्लादेश गारमेंट मैन्युफैक्चरर्स एंड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन (BGMEA) का कहना है कि स्थानीय 10-30 काउंट कॉटन यार्न भारतीय यार्न से महंगा और गुणवत्ता में कमजोर है. निर्यातकों के अनुसार, ड्यूटी-फ्री आयात पर रोक से उत्पादन लागत बढ़ेगी और वैश्विक प्रतिस्पर्धा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ेगा.

बांग्लादेश की टेक्सटाइल इंडस्ट्री के सामने यह संकट केवल आर्थिक नहीं, बल्कि सामाजिक और राजनीतिक चुनौती भी बनता जा रहा है. उचित नीति और सहयोग न मिलने पर न केवल उद्योग प्रभावित होगा, बल्कि लाखों लोगों की रोज़गार और जीवन पर भी असर पड़ेगा.

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