बांग्लादेश चुनाव से पहले अमेरिका-जमात नजदीकी? भारत की बढ़ती चिंता के पीछे क्या है वजह

बांग्लादेश में प्रस्तावित आम चुनाव से पहले सियासी हलचल तेज हो गई है. शेख हसीना सरकार के पतन के बाद यूनुस सरकार के तहत होने जा रहे चुनावों से पहले अमेरिका और कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के बीच बढ़ते संपर्कों ने नई बहस छेड़ दी है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: बांग्लादेश में शेख हसीना सरकार के पतन के बाद पहली बार आम चुनाव की तैयारी चल रही है. 12 फरवरी को प्रस्तावित चुनाव से पहले देश की राजनीति में हलचल तेज हो गई है और अंतरराष्ट्रीय गतिविधियों पर भी नजरें टिक गई हैं.

इसी बीच मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका बांग्लादेश की कट्टरपंथी पार्टी जमात-ए-इस्लामी के साथ अपने रिश्ते मजबूत करने की कोशिश कर रहा है. यह वही पार्टी है जो ऐतिहासिक रूप से भारत विरोधी रही है और जिसने 1971 में बांग्लादेश की आज़ादी का विरोध किया था. ऐसे में भारत की चिंता स्वाभाविक मानी जा रही है.

चुनाव से पहले जमात-ए-इस्लामी से अमेरिकी संपर्क

वॉशिंगटन पोस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, बांग्लादेश में अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों ने हाल ही में जमात-ए-इस्लामी के सिलहट रीजनल ऑफिस में पार्टी नेताओं से मुलाकात की. यह बैठक फरवरी में होने वाले आम चुनाव से पहले अमेरिकी विदेश विभाग और इस्लामी समूह के बीच बढ़ते संपर्कों की कड़ी का हिस्सा बताई जा रही है.

रिपोर्ट में स्थानीय मीडिया से बातचीत के दौरान एक अमेरिकी राजनयिक के हवाले से कहा गया, "हम चाहते हैं कि वे हमारे दोस्त बनें." हालांकि, अमेरिकी दूतावास ने किसी खास राजनीतिक दल को समर्थन देने के आरोपों को खारिज किया है.

अमेरिकी दूतावास की सफाई

अमेरिकी दूतावास की ओर से कहा गया, "दिसंबर में हुई बातचीत एक रूटीन मीटिंग थी. अमेरिकी दूतावास के अधिकारियों और लोकल पत्रकारों के बीच बातचीत ऑफ-द-रिकॉर्ड थी. इस दौरान कई पॉलिटिकल पार्टियों पर चर्चा हुई थी. अमेरिका किसी एक राजनीतिक दल को दूसरी पर तरजीह नहीं देता है और बांग्लादेशी लोगों द्वारा चुनी गई किसी भी सरकार के साथ काम करने का प्लान बना रहा है."

दो साल में कैसे बढ़े अमेरिका-जमात रिश्ते

रिपोर्ट के अनुसार, जमात-ए-इस्लामी के साथ अमेरिका का जुड़ाव पिछले दो वर्षों में लगातार बढ़ा है. इसकी शुरुआत 2023 में हुई, जब शेख हसीना सरकार के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों से ठीक एक दिन पहले ढाका में एक अमेरिकी राजनयिक ने जमात के एक वरिष्ठ नेता से मुलाकात की थी.

2025 में यह संपर्क और मजबूत होता दिखा. मार्च में दो पूर्व अमेरिकी राजदूतों ने जमात के मुख्यालय का दौरा किया. जून में पार्टी को अमेरिकी दूतावास बुलाया गया, जहां आंतरिक शासन, महिलाओं और अल्पसंख्यकों के अधिकारों पर चर्चा हुई.

शफीकुर रहमान को मिला अमेरिकी वीजा

जुलाई 2025 में चार्ज डी’अफेयर्स ट्रेसी ऐनी जैकबसन ने जमात प्रमुख शफीकुर रहमान से पार्टी मुख्यालय में मुलाकात की. रिपोर्ट के मुताबिक, हमास नेता याह्या सिनवार की तारीफ करने और यहूदी विरोधी बयान देने जैसे कट्टरपंथी रिकॉर्ड के बावजूद अमेरिका ने शफीकुर रहमान को नवंबर 2025 में वीजा जारी किया.

इस कदम को चुनावों से पहले अमेरिका की इस्लामी समूह से बढ़ती नजदीकी के तौर पर देखा जा रहा है.

भारत के लिए क्यों बढ़ी चिंता

शेख हसीना को भारत में शरण दिए जाने और अवामी लीग पर प्रतिबंध के बाद से भारत और यूनुस सरकार के रिश्ते तनावपूर्ण बने हुए हैं. इसी दौरान बांग्लादेश में हिंदुओं पर अत्याचार की घटनाओं को लेकर भी भारत की चिंता बढ़ी है.

अवामी लीग के चुनावी मैदान से बाहर होने के बाद तीन ताकतों के उभरने की संभावना जताई जा रही है,बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP), जमात-ए-इस्लामी और नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP). आशंका है कि इनमें से कोई भी सत्ता में आए, भारत के साथ रिश्ते आसान नहीं रहेंगे.

जमात की जीत से भारत को क्या खतरा

जमात-ए-इस्लामी की जीत भारत के लिए सबसे बड़ी चिंता मानी जा रही है. यह पार्टी न सिर्फ ऐतिहासिक रूप से भारत विरोधी रही है, बल्कि बांग्लादेश को रक्षा और इंफ्रास्ट्रक्चर के मामलों में चीन या पाकिस्तान की ओर झुका सकती है.

हालांकि सार्वजनिक तौर पर नरम बयान दिए जा रहे हैं, लेकिन पार्टी की मूल विचारधारा अब भी एंटी-सेक्युलर मानी जाती है. 2025 में ढाका यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट विंग चुनाव में इसकी जीत से इसकी बढ़ती ताकत का संकेत मिला है.

बीएनपी और एनसीपी का रुख

बीएनपी की संभावित जीत को भारत के साथ व्यावहारिक लेकिन सीमित रिश्तों के रूप में देखा जा रहा है. पार्टी नेता तारिक रहमान 'बांग्लादेश फर्स्ट' नीति पर जोर देते हुए दिल्ली और रावलपिंडी से समान दूरी बनाए रखने की बात कह चुके हैं.

वहीं, एनसीपी 2024 के छात्र आंदोलन से निकली पार्टी है, जो यूनुस की अंतरिम सरकार का हिस्सा रही है. शेख हसीना की वापसी की मांग को लेकर भारत और बांग्लादेश के रिश्ते और खराब हुए हैं, जिससे दोनों देशों के बीच वीजा सेवाएं भी अस्थायी रूप से रोकी गई हैं.

भारत ने दोहराया बेहतर रिश्तों का संदेश

गणतंत्र दिवस की पूर्व संध्या पर बांग्लादेश में भारतीय उच्चायुक्त प्रणय वर्मा ने कहा, "बांग्लादेश हमारी इस यात्रा में एक जरूरी साथी रहा है."उन्होंने भारत-बांग्लादेश रिश्तों को "भरोसे पर आधारित, इनोवेशन और टेक्नोलॉजी से चलने वाली, और आपसी हित, आपसी फायदे और आपसी सेंसिटिविटी से पोषित पार्टनरशिप" बताया.

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