इजरायल पर अमेरिका की जासूसी के आरोप! पेंटागन रिपोर्ट से USA में बढ़ी हलचल

एनबीसी न्यूज के अनुसार अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने इजरायल से जुड़े काउंटर इंटेलिजेंस खतरे को बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया है। इसका मतलब है कि इजरायल कभी भी अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बना सकता है।

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नई दिल्ली: अमेरिका और इजरायल को दशकों से करीबी सहयोगी माना जाता रहा है, लेकिन ईरान को लेकर बढ़ते मतभेद अब खुफिया मामलों तक पहुंच गए हैं। एक नई रिपोर्ट में दावा किया गया है कि अमेरिका में इजरायल की खुफिया गतिविधियों को लेकर चिंता बढ़ गई है। वरिष्ठ अधिकारियों को संभावित निगरानी से बचने के लिए अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है।  

DIA ने बढ़ाया खतरे का स्तर   

एनबीसी न्यूज के अनुसार अमेरिकी डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी ने इजरायल से जुड़े काउंटर इंटेलिजेंस खतरे को बढ़ाकर क्रिटिकल कर दिया है। इसका मतलब है कि इजरायल कभी भी अमेरिकी अधिकारियों को निशाना बना सकता है। यह कदम ऐसे समय उठाया गया जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली पीएम बेंजामिन नेतन्याहू के बीच ईरान नीति पर मतभेद गहरा रहे हैं।  

अमेरिकी अधिकारियों का कहना है कि इजरायल जानकारी जुटाने में हमेशा से आक्रामक रहा है। इसलिए इजरायल जाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों को बर्नर फोन, अस्थायी लैपटॉप और विशेष कम्युनिकेशन प्रोटोकॉल इस्तेमाल करने की सलाह दी जाती है। पूर्व राजनयिकों का कहना है कि संवेदनशील बातचीत होटल के कमरों या असुरक्षित जगहों पर करने से बचा जाता है।  

सात पन्नों की रिपोर्ट में क्या कहा गया?   

DIA ने सात पन्नों का एक आंतरिक आकलन तैयार किया है जिसमें इजरायल की जासूसी और तकनीकी निगरानी क्षमताओं को क्रिटिकल स्तर का बताया गया है। हालांकि अधिकारियों ने यह साफ नहीं किया कि हाल में कोई खास जासूसी की घटना सामने आई है या नहीं।  

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज की विशेषज्ञ एमिली हार्डिंग का कहना है कि इजरायली खुफिया तंत्र बेहद आक्रामक है और वह अमेरिका की मध्य पूर्व रणनीतियों में खास दिलचस्पी रखता है।  

इजरायल और व्हाइट हाउस ने किया खंडन   

इजरायली सरकार ने इन आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। वॉशिंगटन स्थित इजरायली दूतावास के प्रवक्ता ने कहा कि इजरायल अमेरिकी संस्थाओं या अधिकारियों की जासूसी नहीं करता।

उनकी खुफिया गतिविधियां सहयोगी देशों के खिलाफ नहीं बल्कि विरोधियों पर केंद्रित रहती हैं। व्हाइट हाउस ने भी रिपोर्ट को गलत बताया और कहा कि इसे ऐसे लोगों के हवाले से तैयार किया गया है जिन्हें अंदरूनी प्रक्रिया की पूरी जानकारी नहीं है।  

ईरान नीति पर बढ़ी दूरी   

गौरतलब है कि यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ट्रंप ईरान के साथ कूटनीतिक समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू सैन्य कार्रवाई फिर शुरू करने के पक्ष में हैं। हाल में दोनों नेताओं के बीच हुई फोन बातचीत से संकेत मिला है कि मध्य पूर्व को लेकर अमेरिका और इजरायल की प्राथमिकताओं में अंतर बढ़ रहा है।   First Updated : Saturday, 06 June 2026