Canada Anti-Hate Bill: कनाडा में अब खालिस्तानी झंडे फहराने पर लगेगी रोक, संसद ने पास किया नया बिल

कनाडा की संसद ने ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ पास कर आतंकवादी प्रतीकों और खालिस्तानी गतिविधियों पर सख्ती बढ़ाई है. धार्मिक छूट हटाने को लेकर विवाद है, जबकि इसे भारतीय मूल के लोगों के लिए राहत माना जा रहा है.

Shraddha Mishra

ओटावा: कनाडा की संसद में एक बड़ा और चर्चित फैसला लिया गया है, जिसने न सिर्फ वहां की राजनीति बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ध्यान खींचा है. देश की संसद के निचले सदन में एक ऐसा विधेयक पारित किया गया है, जो नफरत फैलाने और आतंकवादी प्रतीकों के खुले इस्तेमाल पर सख्त रोक लगाने का प्रस्ताव करता है. इसे खासतौर पर खालिस्तानी गतिविधियों पर लगाम कसने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है.

कनाडा के हाउस ऑफ कॉमन्स ने ‘कॉम्बैटिंग हेट एक्ट’ नाम के इस विधेयक को मंजूरी दे दी है. यह बिल अब अंतिम स्वीकृति के लिए सीनेट के पास भेजा जाएगा. इस कानून के तहत आतंकवादी संगठनों से जुड़े झंडों, प्रतीकों या प्रचार सामग्री का सार्वजनिक प्रदर्शन अपराध माना जाएगा.

किन गतिविधियों पर लगेगी रोक

इस प्रस्तावित कानून के अनुसार, अगर कोई व्यक्ति किसी पहचान योग्य समूह के खिलाफ जानबूझकर नफरत फैलाने के लिए ऐसे प्रतीकों का इस्तेमाल करता है, तो उसे दंडित किया जा सकता है. इसके अलावा, धार्मिक स्थलों के बाहर लोगों को डराना, धमकाना या रास्ता रोकना भी अब अपराध की श्रेणी में आएगा.

इस कानून के लागू होने के बाद बब्बर खालसा इंटरनेशनल और इंटरनेशनल सिख यूथ फेडरेशन जैसे संगठनों के लिए कनाडा में खुलकर गतिविधियां करना मुश्किल हो जाएगा. इन संगठनों को पहले ही भारत और कनाडा में आतंकवादी घोषित किया जा चुका है.

धार्मिक छूट खत्म करने पर विवाद

इस बिल को लेकर सबसे ज्यादा बहस ‘धार्मिक छूट’ को खत्म करने के मुद्दे पर हुई है. पहले कानून में यह प्रावधान था कि धार्मिक विचारों को शांति से रखने पर उसे हेट स्पीच नहीं माना जाएगा. लेकिन नए बिल में इस छूट को हटा दिया गया है. इस फैसले का विरोध करते हुए विपक्षी दलों और कई धार्मिक संगठनों ने इसे धार्मिक स्वतंत्रता पर असर डालने वाला कदम बताया है. उनका कहना है कि इससे शांतिपूर्ण विरोध या असहमति जताने वाले लोगों पर भी कार्रवाई हो सकती है.

सरकार का पक्ष

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की सरकार का कहना है कि यह कानून किसी की आस्था को निशाना नहीं बनाता, बल्कि केवल नफरत और हिंसा को बढ़ावा देने वाली गतिविधियों को रोकने के लिए लाया गया है. न्याय मंत्री सीन फ्रेजर ने भी आलोचनाओं को खारिज करते हुए कहा कि यह कानून संतुलित और जरूरी है.

भारतीय मूल के लोगों के लिए राहत

कनाडा में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों के लिए यह बिल एक सकारात्मक कदम माना जा रहा है. लंबे समय से वहां खालिस्तानी समर्थकों द्वारा मंदिरों और धार्मिक स्थलों को निशाना बनाने की घटनाएं सामने आती रही हैं. ऐसे में यह कानून उनकी सुरक्षा को मजबूत करने में मदद कर सकता है.

भारत-कनाडा संबंधों पर असर

खालिस्तान मुद्दे को लेकर भारत और कनाडा के बीच पिछले कुछ समय से तनाव बना हुआ था. जस्टिन ट्रूडो के कार्यकाल में यह तनाव और बढ़ गया था. हालांकि, अब नई सरकार के आने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में सुधार की उम्मीद जताई जा रही है. अब यह बिल सीनेट में पेश किया जाएगा, जहां इस पर विस्तार से चर्चा होगी. वहां से मंजूरी मिलने के बाद ही यह कानून बन पाएगा. सीनेट चाहे तो इसमें बदलाव भी सुझा सकती है.

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