ट्रंप की चेतावनी के बीच चीन ईरान को सुपरसोनिक मिसाइल देने की तैयारी से बढ़ा तनाव

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच चीन और ईरान के बीच मिसाइल डील लगभग तय मानी जा रही है। सुपरसोनिक सीएम-302 मिसाइल मिलने से ईरान की समुद्री हमलावर क्षमता बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

अमेरिका और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ता दिख रहा है। इसी माहौल में चीन और ईरान की रक्षा डील चर्चा में आ गई। रिपोर्टों के मुताबिक चीन ईरान को सीएम-302 मिसाइल देने की तैयारी में है। यह सौदा दोनों देशों के बीच लंबे समय से बातचीत में था। हालिया घटनाओं के बाद इसमें तेजी आई है। विश्लेषक इसे रणनीतिक कदम मान रहे हैं। डील से क्षेत्रीय शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है।

सीएम-302 मिसाइल कितनी खतरनाक?

सीएम-302 एक सुपरसोनिक एंटी-शिप मिसाइल बताई जाती है। इसकी मारक क्षमता लगभग 290 किलोमीटर तक मानी जाती है। यह कम ऊंचाई पर तेज गति से उड़ान भरती है। मिसाइल दुश्मन की वॉरशिप को निशाना बना सकती है। सटीकता और गति इसकी खासियत मानी जाती है। इंटरसेप्ट करना कठिन बताया जाता है। इसी वजह से इसे गेमचेंजर हथियार माना जा रहा है।

डील की पृष्ठभूमि क्या रही?

ईरान ने चीन से मिसाइल खरीदने पर दो साल पहले बातचीत शुरू की थी। विशेषज्ञों के अनुसार पिछले क्षेत्रीय संघर्षों के बाद वार्ता तेज हुई। ईरानी सैन्य अधिकारियों ने चीन का दौरा भी किया था। इन बैठकों में रक्षा सहयोग पर चर्चा हुई। पिछले साल बातचीत अंतिम चरण में पहुंची थी। अब डील लगभग तय मानी जा रही है। हालांकि आधिकारिक पुष्टि अभी बाकी है।

डिलीवरी और संख्या पर क्या स्थिति?

अब तक यह स्पष्ट नहीं हुआ कि ईरान को कितनी मिसाइलें मिलेंगी। डिलीवरी की तारीख भी सार्वजनिक नहीं की गई है। सौदे की कीमत को लेकर भी जानकारी सामने नहीं आई। ईरानी अधिकारियों ने सहयोगी देशों के साथ रक्षा समझौतों का जिक्र किया। उन्होंने इसे सुरक्षा जरूरतों से जुड़ा कदम बताया। जानकारों का मानना है कि डील गोपनीय रखी जा सकती है। स्थिति पर वैश्विक नजर बनी हुई है।

अमेरिका का रुख कितना सख्त?

अमेरिका ने अभी इस डील पर औपचारिक टिप्पणी नहीं की है। हालांकि ईरान को लेकर अमेरिकी नीति सख्त बताई जा रही है। रिपोर्टों के अनुसार ट्रंप प्रशासन ने चेतावनी दी है। कहा गया कि ईरान को समझौता करना होगा। अन्यथा कड़े कदम उठाए जा सकते हैं। इस बयान से तनाव और बढ़ गया है। क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता जताई जा रही है।

मौजूदा सैन्य हालात क्या संकेत देते?

रिपोर्टों के मुताबिक अमेरिका ने क्षेत्र में नौसैनिक ताकत बढ़ाई है। एयरक्राफ्ट कैरियर और स्ट्राइक ग्रुप तैनात किए जा रहे हैं। इनमें हजारों सैनिक और कई विमान शामिल हैं। यह तैयारी संभावित संघर्ष की आशंका दिखाती है। विश्लेषक इसे दबाव की रणनीति मानते हैं। दूसरी ओर ईरान अपनी रक्षा क्षमता मजबूत कर रहा है। क्षेत्र में तनाव का माहौल बना हुआ है।

वैश्विक राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह डील भू-राजनीतिक समीकरण बदल सकती है। चीन और ईरान का सहयोग अमेरिका के लिए चुनौती माना जा रहा है। मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन प्रभावित हो सकता है। कूटनीतिक तनाव और बढ़ने की आशंका है। हालांकि समाधान के रास्ते भी खुले रखे गए हैं। वैश्विक समुदाय स्थिति पर नजर बनाए हुए है। आने वाले कदम ही भविष्य की दिशा तय करेंगे।

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