नई दिल्ली: भारत की सुरक्षा संबंधी चिंताओं के बीच चीन ने बांग्लादेश की तीस्ता नदी व्यापक प्रबंधन और बहाली परियोजना (TRCMRP) को लेकर अपना समर्थन दोहराया है. बता दें, बीजिंग में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने कहा कि यह चीन और बांग्लादेश के बीच विकास सहयोग से जुड़ी परियोजना है और इसका उद्देश्य किसी तीसरे देश को प्रभावित करना नहीं है. उन्होंने कहा कि इस सहयोग में बाहरी हस्तक्षेप की कोई गुंजाइश नहीं होनी चाहिए.
चीन ने इस परियोजना को आम लोगों के हितों से जुड़ा बताते हुए कहा कि बांग्लादेश सरकार इसे प्राथमिकता दे रही है. गुओ जियाकुन के अनुसार, बीजिंग इस योजना को आगे बढ़ाने के लिए हरसंभव सहयोग देने को तैयार है. उन्होंने यह भी कहा कि चीन, बांग्लादेश के साथ व्यापार, जल संसाधन प्रबंधन और जनकल्याण से जुड़े क्षेत्रों में सहयोग को और मजबूत करना चाहता है.
इस बीच बांग्लादेश के विदेश मंत्री खलीलुर रहमान ने बताया कि दोनों देशों के विशेषज्ञ पहली बार इस परियोजना पर विस्तृत तकनीकी अध्ययन करेंगे। वहीं इस दौरान अगर अध्ययन में परियोजना व्यवहारिक और उपयोगी पाई जाती है, तो चीन इसके लिए वित्तीय और तकनीकी सहायता उपलब्ध कराने पर विचार कर सकता है.
दरअसल, जनवरी 2026 में बांग्लादेश जल विकास बोर्ड (BWDB) और चीन की सरकारी कंपनी पावरचाइना के बीच हुए समझौते के विस्तार के बाद इस परियोजना को फिर से गति मिली है. हालांकि, इस परियोजना को लेकर भारत की चिंताएं बनी हुई हैं. ऐसा इसलिए क्योंकि तीस्ता नदी का क्षेत्र भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण सिलीगुड़ी कॉरिडोर के निकट स्थित है. यह संकरा भूभाग उत्तर-पूर्वी राज्यों को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ने वाला अहम संपर्क मार्ग है, जिसे 'चिकन नेक' भी कहा जाता है.
वहीं अगर इस इलाके के पास चीन की तकनीकी या अन्य प्रकार की मौजूदगी बढ़ती है, तो भविष्य में भारत के लिए सुरक्षा संबंधी चुनौतियां उत्पन्न हो सकती हैं. इसी वजह से भारत इस परियोजना से जुड़े घटनाक्रम पर लगातार नजर बनाए हुए है. First Updated : Monday, 29 June 2026