युद्ध के बावजूद ईरान के पास बचे 40% अटैक ड्रोन और 60% मिसाइल लॉन्चर, होर्मुज में अभी भी बड़ा खतरा

लंबे युद्ध के बावजूद ईरान के पास अभी भी 40% ड्रोन और 60% से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर बचे हैं. बंकरों से 100 सिस्टम बाहर निकालने के बाद उसकी ताकत और बढ़ गई है. एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान अब भी होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए बड़ा खतरा बना हुआ है, जबकि युद्धविराम का भविष्य अभी भी अनिश्चित है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

नई दिल्ली:  ईरान और अमेरिका के बीच जारी तनाव के बीच एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है. कई हफ्तों की भारी लड़ाई के बावजूद ईरान के पास अभी भी करीब 40 प्रतिशत अटैकिंग ड्रोन और 60 प्रतिशत से ज्यादा मिसाइल लॉन्चर बचे हुए हैं. अमेरिकी सैन्य और खुफिया अधिकारियों का अनुमान है कि यह बची हुई ताकत होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों के लिए आगे भी बड़ा खतरा बन सकती है. मीडिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि ईरान अभी भी अपने युद्ध से पहले वाले ड्रोन का बड़ा हिस्सा बरकरार रखे हुए है. अगर मरम्मत का काम पूरा हो गया तो वह अपने पुराने स्टॉक का करीब 70 प्रतिशत हिस्सा फिर से सक्रिय कर सकता है.

ईरान के पास कितनी बची है ड्रोन ताकत?

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, लड़ाई के दौरान काफी नुकसान झेलने के बावजूद ईरान के पास अभी भी 40 प्रतिशत अटैकिंग ड्रोन बचे हैं. रिपोर्ट के अनुसार, मरम्मत और रिकवरी के बाद यह संख्या 70 प्रतिशत तक पहुंच सकती है. यानी ईरान की हमलावर क्षमता अभी भी काफी मजबूत बनी हुई है.

मिसाइल लॉन्चर बढ़ाकर 60% किए सक्रिय

मिसाइल सिस्टम की बात करें तो युद्धविराम के समय ईरान के पास लगभग आधे लॉन्चर बचे थे. इसके बाद उसने सुरंगों और बंकरों में छिपाकर रखे गए करीब 100 मिसाइल सिस्टम बाहर निकाल लिए. इससे अब उसके सक्रिय मिसाइल लॉन्चर बढ़कर करीब 60 प्रतिशत हो गए हैं.

 ईरान ने अपनी ताकत दिखा दी

रूस के पूर्व राष्ट्रपति दिमित्री मेदवेदेव ने कहा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुआ युद्धविराम कितना टिकाऊ होगा, यह अभी साफ नहीं है. लेकिन एक बात तय है कि ईरान ने अपनी ताकत दिखा दी है. उन्होंने होर्मुज स्ट्रेट को ईरान की एक बड़ी रणनीतिक ताकत करार दिया.

ईरान समुद्री रास्तों को रोक सकता है

हालांकि अधिकारियों का कहना है कि ईरान के कुल हथियारों का सही आंकड़ा बताना मुश्किल है. खुफिया एजेंसियां सिर्फ अनुमान लगा सकती हैं. फिर भी सभी इस बात पर सहमत हैं कि ईरान के पास इतनी क्षमता बची हुई है कि वह चाहे तो समुद्री रास्तों में रुकावट पैदा कर सकता है.

पिछले साल होर्मुज क्यों नहीं बंद हुआ था? 

पिछले साल जून में जब इजराइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमला किया और अमेरिका भी शामिल हो गया था, तब ईरान होर्मुज स्ट्रेट को बंद नहीं कर पाया था. इजराइल के एक पूर्व अधिकारी के अनुसार, उस समय ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई ने सावधानी बरती थी. उन्हें डर था कि होर्मुज बंद करने से कई और देश युद्ध में कूद पड़ेंगे.

खामेनेई की मौत ने बदला समीकरण

इस बार स्थिति अलग है. मौजूदा युद्ध के पहले दिन ही अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत हो गई. इससे ईरान को साफ संदेश मिला कि अमेरिका और इजराइल के इरादे पहले से कहीं बड़े हैं. इतिहास में ईरान 1980 के दशक में इराक युद्ध के दौरान होर्मुज में बारूदी सुरंगें बिछा चुका है, लेकिन अब वह ज्यादा मिसाइल और ड्रोन के जरिए जहाजों को निशाना बनाने की रणनीति अपना रहा है.

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो