सूरत में LPG संकट की मार... पलायन के लिए उधना स्टेशन पर उमड़ी भीड़, ठप हो रही फैक्ट्रियां
सूरत में एलपीजी संकट का असर अब साफ दिखने लगा है. टेक्सटाइल इंडस्ट्री प्रभावित होने से मजदूरों का पलायन बढ़ गया है, जिससे रेलवे स्टेशनों पर भीड़ बढ़ रही है.

सूरत में एलपीजी संकट और कामकाज पर पड़े असर ने हजारों मजदूरों को शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया है. यही वजह है कि उधना रेलवे स्टेशन पर हर दिन लोगों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. पिछले कुछ हफ्तों से उधना रेलवे स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है. स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि कई बार पुलिस को भीड़ को नियंत्रित करने के लिए हस्तक्षेप करना पड़ रहा है. रेलवे अपने स्तर पर व्यवस्थाएं बेहतर होने का दावा कर रहा है, लेकिन जो दृश्य सामने आ रहे हैं, वे अलग कहानी बयां कर रहे हैं.
प्लेटफॉर्म पर जगह की कमी, लंबी कतारें और ट्रेन में चढ़ने की होड़ से हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. इस बार भीड़ बढ़ने के पीछे सिर्फ एक कारण नहीं है. पहली वजह है गर्मियों की छुट्टियां, जब लोग अपने घर जाने के लिए यात्रा करते हैं. लेकिन दूसरी और ज्यादा अहम वजह एलपीजी की कमी से पैदा हुआ संकट है, जिसने लोगों को मजबूरन पलायन करने पर मजबूर कर दिया है. इन दोनों कारणों के एक साथ आने से स्टेशन पर भीड़ और अधिक बढ़ गई है.
गैस संकट से प्रभावित हुई टेक्सटाइल इंडस्ट्री
सूरत की पहचान उसकी टेक्सटाइल इंडस्ट्री से है, लेकिन इस समय यह उद्योग बड़े संकट से गुजर रहा है. एलपीजी की कमी के कारण उत्पादन पर सीधा असर पड़ा है. उद्योग को रोजाना लगभग 15,000 गैस सिलेंडर की जरूरत होती है, लेकिन सप्लाई समय पर नहीं मिल पा रही है. इस वजह से कई यूनिट्स को अपना काम धीमा करना पड़ा है या कुछ समय के लिए बंद भी करना पड़ा है.
मजदूरों का तेजी से पलायन
गैस संकट का सबसे बड़ा असर मजदूरों पर पड़ा है. काम कम होने और अनिश्चितता बढ़ने के कारण बड़ी संख्या में मजदूर अपने गांव लौटने लगे हैं. अनुमान के मुताबिक, अब तक करीब 30% यानी लगभग 3 लाख मजदूर सूरत छोड़ चुके हैं.
यह संख्या आने वाले दिनों में और बढ़ सकती है, अगर हालात में सुधार नहीं हुआ.
मजदूरों के जाने और गैस की कमी का असर उत्पादन पर साफ दिखाई दे रहा है. जहां पहले रोजाना लगभग 6.5 करोड़ मीटर कपड़ा तैयार होता था, अब यह घटकर करीब 4.5 करोड़ मीटर रह गया है. इस गिरावट ने उद्योग को आर्थिक रूप से भी नुकसान पहुंचाया है और व्यापारियों की चिंता बढ़ा दी है. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि अगर जल्द ही गैस सप्लाई सामान्य नहीं हुई, तो स्थिति और बिगड़ सकती है.
प्रशासन और रेलवे की चुनौती
एक तरफ उद्योग संकट से जूझ रहा है, तो दूसरी तरफ रेलवे और प्रशासन के सामने भीड़ को संभालने की चुनौती है. हर दिन बढ़ती भीड़ को नियंत्रित करना आसान नहीं है, खासकर तब जब लोग बड़ी संख्या में एक साथ यात्रा कर रहे हों. ऐसे में बेहतर प्रबंधन और त्वरित समाधान की जरूरत है, ताकि हालात और खराब न हों.


