चीन पहुंचे ट्रंप, शी जिनपिंग संग व्यापार से लेकर ईरान युद्ध तक होगी अहम बातचीत
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीन दिवसीय दौरे पर चीन पहुंच गए हैं, जहां उनकी मुलाकात चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग से होगी. दोनों नेता व्यापार समझौते, टैरिफ विवाद, ताइवान और ईरान युद्ध जैसे अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे.

नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप तीन दिवसीय राजकीय दौरे पर बुधवार को चीन पहुंचे, जहां उनका भव्य स्वागत किया गया. इस दौरान ट्रंप चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ व्यापार, टैरिफ विवाद, ताइवान, कृत्रिम बुद्धिमत्ता और ईरान युद्ध जैसे कई अहम वैश्विक मुद्दों पर चर्चा करेंगे. दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के नेताओं की यह मुलाकात अंतरराष्ट्रीय राजनीति और वैश्विक व्यापार के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
ट्रंप की यह चीन यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब अमेरिका-चीन व्यापार संबंधों में तनाव बना हुआ है और पश्चिम एशिया में ईरान को लेकर हालात लगातार संवेदनशील बने हुए हैं. माना जा रहा है कि इस दौरे में व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के साथ-साथ होर्मुज जलडमरूमध्य संकट और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं पर भी गंभीर चर्चा हो सकती है.
बीजिंग में ट्रंप का भव्य स्वागत
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के निमंत्रण पर चीन पहुंचे ट्रंप का स्वागत चीन के उपराष्ट्रपति हान झेंग ने किया. हवाई अड्डे पर नीली और सफेद वर्दी पहने करीब 300 चीनी युवाओं ने अमेरिकी और चीनी झंडे लहराकर उनका अभिनंदन किया.
ट्रंप के विमान से उतरते ही सैन्य बैंड ने विशेष धुन बजाई. उनके साथ बेटे एरिक ट्रंप और बहू लारा ट्रंप भी मौजूद रहे. बीजिंग की सड़कों और राजमार्गों को अमेरिकी और चीनी झंडों से सजाया गया था, जबकि कई इमारतों पर “बीजिंग में आपका स्वागत है” संदेश रोशनी के जरिए प्रदर्शित किया गया.
नौ साल बाद दूसरी चीन यात्रा
डोनाल्ड ट्रंप अपने पहले कार्यकाल में 2017 में चीन का दौरा करने वाले आखिरी अमेरिकी राष्ट्रपति थे. अब नौ वर्षों बाद वे दूसरी बार चीन पहुंचे हैं. इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य व्यापार समझौते को आगे बढ़ाना और टैरिफ विवादों को कम करना बताया जा रहा है.
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका के 525 अरब डॉलर से अधिक के निर्यात पर शुल्क संबंधी तनाव का असर पड़ रहा था, जिसे दोनों देश कम करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं.
व्यापार समझौते और टैरिफ पर रहेगा फोकस
ट्रंप ने बीजिंग रवाना होने से पहले वाशिंगटन में मीडिया से कहा कि वह शी जिनपिंग के साथ व्यापार को लेकर सबसे ज्यादा चर्चा करेंगे. अमेरिका चीन से अमेरिकी खाद्य उत्पादों और विमानों की अधिक खरीद चाहता है.
दोनों देशों के बीच व्यापारिक मतभेदों को दूर करने के लिए एक संयुक्त व्यापार बोर्ड बनाए जाने पर भी विचार किया जा रहा है. ट्रंप के साथ कई बड़े अमेरिकी कारोबारी भी चीन पहुंचे हैं.
एलोन मस्क और टिम कुक भी दौरे का हिस्सा
इस यात्रा में टेस्ला प्रमुख एलोन मस्क और एप्पल के सीईओ टिम कुक जैसे दिग्गज कारोबारी भी शामिल हैं. चीन में दोनों कंपनियों का बड़ा कारोबार है.
आईफोन की बिक्री में 28 प्रतिशत की वृद्धि के बाद एप्पल ने 2026 की शुरुआत तक चीन के स्मार्टफोन बाजार में फिर से शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है. वहीं, अप्रैल में चीन में निर्मित टेस्ला वाहनों की बिक्री और निर्यात 79,478 तक पहुंच गया, जो पिछले वर्ष की तुलना में 36 प्रतिशत अधिक बताया गया.
ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य पर भी चर्चा
ट्रंप और शी जिनपिंग की वार्ता में अमेरिका-इजरायल-ईरान युद्ध और होर्मुज जलडमरूमध्य का मुद्दा भी प्रमुख रहने वाला है. वैश्विक स्तर पर इस बात पर नजर बनी हुई है कि क्या दोनों देश इस संकट को कम करने के लिए कोई साझा समाधान निकाल पाएंगे.
ट्रंप की यात्रा से पहले ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी बीजिंग का दौरा किया था और चीनी विदेश मंत्री वांग यी से बातचीत की थी.
वांग यी ने ईरान से होर्मुज जलडमरूमध्य को जल्द खोलने की अपील की और परमाणु हथियार न विकसित करने की तेहरान की प्रतिबद्धता की सराहना की.
इस पर अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा, 'मुझे उम्मीद है कि चीनी उन्हें वही बताएंगे जो उन्हें बताया जाना चाहिए. और यही आप जलडमरूमध्य में कर रहे हैं, जिसके कारण आप वैश्विक स्तर पर अलग-थलग पड़ रहे हैं. इस मामले में आप ही दोषी हैं.'
ताइवान मुद्दे पर भी बढ़ सकता है तनाव
चीन की ओर से इस वार्ता में ताइवान मुद्दे को भी प्रमुखता से उठाए जाने की संभावना है. चीन लगातार ताइवान को अपना हिस्सा बताता रहा है और द्वीप के आसपास सैन्य अभ्यास कर दबाव बढ़ा रहा है.
हाल ही में चीनी विदेश मंत्री वांग यी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से फोन पर बातचीत के दौरान कहा था कि अमेरिका को ताइवान को लेकर 'सही विकल्प' चुनना चाहिए.
ग्लोबल टाइम्स ने क्या कहा?
सरकारी समाचार पत्र ग्लोबल टाइम्स ने अपने संपादकीय में कहा कि शी जिनपिंग और ट्रंप के बीच हुई कई वार्ताओं ने द्विपक्षीय संबंधों को स्थिर बनाए रखने में मदद की है.
संपादकीय में कहा गया, 'भविष्य में चीन-अमेरिका संबंधों को सही मायने में स्थिर और बेहतर बनाने के लिए सबसे बुनियादी कदम दोनों नेताओं द्वारा हासिल की गई महत्वपूर्ण सहमति को पूरी तरह और ईमानदारी से लागू करना है.'


