नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच लंबे समय से जारी तनाव के बीच एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को ईरान के खिलाफ प्रस्तावित सैन्य कार्रवाई को अंतिम समय में रोकने का फैसला किया. इस कदम को दोनों देशों के बीच जारी कूटनीतिक प्रयासों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है और इससे क्षेत्र में तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है.
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत ऐसे स्तर तक पहुंच गई है जहां ईरान के शीर्ष नेतृत्व की भी सहमति मिल चुकी है. माना जा रहा है कि इसी वजह से व्हाइट हाउस ने सैन्य कार्रवाई को फिलहाल टालने का निर्णय लिया. पिछले तीन महीनों से दोनों देशों के बीच बढ़ते टकराव को समाप्त करने के लिए कई स्तरों पर प्रयास किए जा रहे थे और यह फैसला उन्हीं कोशिशों का परिणाम माना जा रहा है.
राष्ट्रपति ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रूथ सोशल पर जानकारी देते हुए कहा कि ईरान के साथ बातचीत में उल्लेखनीय प्रगति हुई है. उन्होंने बताया कि वार्ता को ईरानी नेतृत्व के सर्वोच्च स्तर पर स्वीकृति प्राप्त हो चुकी है, जिसके बाद उन्होंने अमेरिका की ओर से नियोजित हवाई हमलों और बमबारी अभियान को रद्द करने का आदेश दिया.
ट्रंप ने अपने संदेश में कहा कि दोनों पक्षों के बीच संवाद आगे बढ़ा है और सकारात्मक संकेत मिलने के बाद सैन्य कार्रवाई को रोकना उचित समझा गया. उनका कहना था कि कूटनीतिक समाधान की संभावना को देखते हुए यह फैसला लिया गया है.
हालांकि, यह निर्णय ट्रंप के उसी दिन दिए गए पहले बयान से बिल्कुल अलग था. इससे पहले उन्होंने चेतावनी दी थी कि अमेरिका ईरान के खिलाफ कड़ी सैन्य कार्रवाई करने के लिए तैयार है. उन्होंने यहां तक कहा था कि वाशिंगटन ईरान के सबसे महत्वपूर्ण तेल निर्यात केंद्रों में से एक खारग द्वीप पर नियंत्रण स्थापित करने की क्षमता रखता है.
ट्रंप के रुख में अचानक आए इस बदलाव ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय का ध्यान खींचा है. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि वार्ता सफल रहती है तो मध्य पूर्व में बढ़ते तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है. फिलहाल दुनिया की निगाहें अमेरिका और ईरान के बीच जारी बातचीत पर टिकी हुई हैं. First Updated : Thursday, 11 June 2026