क्या ट्रंप ईरान के सामने झुकेंगे या छेड़ देंगे आखिरी जंग, उनका संबोधन तय करेगा दुनिया का अगला कदम

ईरान को लेकर अमेरिका एक बड़े मोड़ पर खड़ा है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का संबोधन इस संकट की दिशा तय कर सकता है, दुनिया देख रही है कि टकराव बढ़ेगा या कोई रास्ता निकलेगा

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान को लेकर दुनिया एक बड़े मोड़ पर खड़ी है। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप देश को संबोधित करने वाले हैं। यह संबोधन सिर्फ एक बयान नहीं, बल्कि आने वाले दिनों की दिशा तय करने वाला फैसला माना जा रहा है। पिछले कुछ हफ्तों में अमेरिका का रुख बार-बार बदलता रहा है। अब सबकी नजर इसी बात पर टिकी है कि ट्रंप शांति का रास्ता चुनेंगे या टकराव को और गहरा करेंगे।

क्या अमेरिका अब पीछे हटेगा?

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ा तनाव अब उस मोड़ पर पहुंच गया है जहां हर कदम का असर पूरी दुनिया पर पड़ सकता है। यही वजह है कि ट्रंप का यह संबोधन बेहद अहम माना जा रहा है। एक तरफ सैन्य तैयारी की खबरें हैं। दूसरी तरफ बातचीत की कोशिशें भी जारी हैं। इन दोनों के बीच अमेरिका खुद भी साफ रास्ता तय नहीं कर पा रहा है। इसी अनिश्चितता ने हालात को और पेचीदा बना दिया है।

ट्रंप क्या ऐलान करेंगे?

व्हाइट हाउस ने साफ कर दिया है कि ट्रंप राष्ट्र को संबोधित करेंगे। यह संबोधन किसी सामान्य बयान जैसा नहीं होगा। इसमें ईरान को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है। पिछले कुछ दिनों की घटनाओं ने अमेरिका पर दबाव बढ़ा दिया है। अब उसे अपनी रणनीति साफ करनी होगी। दुनिया जानना चाहती है कि अमेरिका किस दिशा में जाएगा।

क्यों बदलते रहते हैं ट्रंप?

ट्रंप की नीति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। वह बार-बार अपना रुख बदलते नजर आते हैं। कभी नाटो सहयोगियों के साथ कदम उठाने की बात करते हैं। कभी कहते हैं कि अमेरिका अकेले ही काफी है। कभी हमले की धमकी देते हैं। फिर अचानक पीछे हट जाते हैं। इससे सहयोगी देश और अमेरिकी जनता दोनों असमंजस में हैं।

जनता क्या सोच रही है?

अमेरिका के भीतर इस मुद्दे पर राय बंटी हुई है। एक सर्वे में सामने आया कि करीब 61 प्रतिशत लोग ट्रंप की ईरान नीति से संतुष्ट नहीं हैं। वहीं 37 प्रतिशत लोग उनके फैसलों का समर्थन कर रहे हैं। यह आंकड़े बताते हैं कि देश के भीतर भी दबाव बढ़ रहा है। ट्रंप को अब हर कदम सोच-समझकर उठाना होगा।

क्या अमेरिका ईरान छोड़ देगा?

ट्रंप ने संकेत दिए हैं कि अमेरिका जल्द ही ईरान से बाहर निकल सकता है। उनका कहना है कि यह प्रक्रिया लंबी नहीं होगी। कुछ दिनों या हफ्तों में इसे पूरा किया जा सकता है। लेकिन जमीन पर हालात अभी भी तनावपूर्ण हैं। एक तरफ सैनिकों की तैनाती है। दूसरी तरफ लगातार खतरा बना हुआ है। ऐसे में यह फैसला आसान नहीं दिखता।

इजरायल क्या अलग खेल रहा?

जहां अमेरिका का रुख नरम पड़ता दिख रहा है, वहीं इजरायल सख्त नजर आ रहा है। प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने साफ कहा है कि अभियान अभी खत्म नहीं हुआ है। वह ईरान पर दबाव बनाए रखना चाहते हैं। यह संकेत है कि दोनों देशों की रणनीति अलग हो सकती है। इससे संकट और गहरा सकता है।

क्या कंपनियां भी बनेंगी निशाना?

ईरान की चेतावनी ने हालात को और गंभीर बना दिया है। कहा गया है कि किसी भी हमले का जवाब दिया जाएगा। बड़ी अमेरिकी कंपनियां निशाने पर हो सकती हैं। इसमें गूगल और ऐपल जैसी कंपनियों के नाम शामिल हैं। अगर ऐसा हुआ तो असर वैश्विक होगा। यह सिर्फ युद्ध तक सीमित नहीं रहेगा। अब सबकी नजर अमेरिका के अगले कदम पर है।

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