डोनाल्ड ट्रंप का दावा, कहा ईरान ने परमाणु हथियार न बनाने का वादा किया

ट्रंप के मुताबिक 28 फरवरी को ईरान के साथ टकराव की मुख्य वजह यही थी कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए। व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में 2011 से अब तक 74 मौके गिनाए गए हैं जब ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में कहा है कि ईरान परमाणु हथियार न बनाने पर सहमत हो गया है। उन्होंने इसे बड़ी कामयाबी बताया। फॉक्स न्यूज़ और न्यूयॉर्क पोस्ट के पॉडकास्ट में ट्रंप ने कहा कि बातचीत में ईरान ने साफ कर दिया है कि उसके पास कभी परमाणु बम नहीं होगा।  

ट्रंप के मुताबिक, 28 फरवरी को ईरान के साथ टकराव की मुख्य वजह यही थी कि तेहरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोका जाए। व्हाइट हाउस की फैक्ट शीट में 2011 से अब तक 74 मौके गिनाए गए हैं जब ट्रंप ने कहा कि ईरान को परमाणु हथियार नहीं मिलने चाहिए।  

परमाणु विशेषज्ञों ने किया खुलासा   

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार परमाणु विशेषज्ञों का कहना है कि ट्रंप जिस वादे की बात कर रहे हैं, वह नया नहीं है। ईरान 50 साल से कहता आ रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। तेहरान ने लिखित समझौतों, बयानों और यहां तक कि सर्वोच्च नेता के फतवे के जरिए भी परमाणु हथियार न बनाने की बात दोहराई है।  

ओबामा प्रशासन में ईरान मामलों के विशेषज्ञ रहे गैरी सैमोर के मुताबिक, यह कोई बड़ी रियायत नहीं है। उन्होंने कहा कि असल सवाल यह है कि यह वादा ईरान के यूरेनियम संवर्धन कार्यक्रम पर कितनी पाबंदी लगाता है।  

दरअसल, 2015 की ईरान न्यूक्लियर डील के पहले पैराग्राफ में भी यही लिखा है कि ईरान किसी भी हालत में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा। ट्रंप ने अपने पहले कार्यकाल में इस समझौते से अमेरिका को अलग कर लिया था। इसके बाद ईरान ने अपना परमाणु कार्यक्रम तेज कर दिया, लेकिन हथियार बनाने से इनकार करता रहा।  

भरोसे पर सवाल    

ईरान 1970 से परमाणु अप्रसार संधि का हिस्सा है। इस संधि के तहत देशों को परमाणु तकनीक में मदद मिलती है, लेकिन बदले में उन्हें हथियार न बनाने का वादा करना होता है। 2005 में ईरान ने आईएईए को बताया था कि सर्वोच्च नेता अली खामेनेई ने फतवा जारी कर परमाणु हथियारों को इस्लाम में हराम बताया है।  

फिर भी कई जानकारों को ईरान के वादों पर भरोसा नहीं है। यूनाइटेड अगेंस्ट न्यूक्लियर ईरान के डैनियल रोथ का कहना है कि सबूतों के बावजूद ईरान लंबे समय से हथियार न बनाने की बात कहता रहा है। 2015 में आईएईए की रिपोर्ट में भी माना गया था कि ईरान ने 2009 तक परमाणु हथियारों के डिजाइन पर काम किया था।  

2018 में इजरायल ने कुछ दस्तावेज सार्वजनिक किए थे जिनसे पता चला कि ईरान हथियार बनाने की योजना बना रहा था। ट्रंप प्रशासन ने जून 2025 में ईरान के न्यूक्लियर ठिकानों पर हमले भी किए थे, जिसे वे अपनी सख्ती का हिस्सा बताते हैं। अब ट्रंप फिर से जीरो एनरिचमेंट की मांग कर रहे हैं। यानी ईरान को यूरेनियम संवर्धन पूरी तरह रोकना होगा और सेंट्रीफ्यूज जैसे उपकरण हटाने होंगे।   First Updated : Sunday, 07 June 2026