नई दिल्ली: वैश्विक तेल बाजार के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने दावा किया है कि ईरान ने अमेरिका को भरोसा दिलाया है कि रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों पर किसी प्रकार का अतिरिक्त शुल्क नहीं लगाया जाएगा. इसमें टोल, बीमा शुल्क या अन्य वित्तीय शुल्क शामिल हैं. इस बयान को वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति और समुद्री व्यापार के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.
ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया मंच पर कहा कि ईरानी पक्ष ने अमेरिका को सूचित किया है कि होर्मुज मार्ग से गुजरने वाले जहाजों की आवाजाही पहले की तरह जारी रहेगी और उन पर कोई अतिरिक्त आर्थिक बोझ नहीं डाला जाएगा. उनका कहना है कि यह आश्वासन अंतरराष्ट्रीय समुद्री यातायात को सुरक्षित और निर्बाध बनाए रखने के उद्देश्य से दिया गया है.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब मध्य पूर्व में हालिया तनाव के बाद क्षेत्र में स्थिरता बहाल करने के लिए कूटनीतिक प्रयास तेज हुए हैं. अमेरिका और ईरान के बीच स्विट्जरलैंड में कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत जारी है. इन वार्ताओं में ईरान के परमाणु कार्यक्रम, क्षेत्रीय सुरक्षा व्यवस्था और समुद्री मार्गों की सुरक्षा जैसे विषय प्रमुख रूप से शामिल हैं.
अमेरिकी प्रशासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि ईरान को किसी प्रकार की प्रत्यक्ष नकद सहायता या तरल वित्तीय संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं. ट्रंप के अनुसार, अमेरिकी नियंत्रण में मौजूद ईरानी संपत्तियों के उपयोग के लिए एक विशेष तंत्र तैयार किया जा रहा है. इस व्यवस्था के तहत रोकी गई राशि का उपयोग मुख्य रूप से अमेरिकी कृषि उत्पादों जैसे मक्का, गेहूं और सोयाबीन की खरीद के लिए किया जा सकता है, जिससे ईरान की खाद्य जरूरतों को पूरा करने में मदद मिलेगी.
हालांकि, दूसरी ओर ईरान का रुख कुछ अलग दिखाई देता है. तेहरान पहले कई बार संकेत दे चुका है कि वह होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों से कुछ शुल्क लेने की योजना पर विचार कर रहा है. ईरानी अधिकारियों का कहना है कि यह पारंपरिक टोल नहीं होगा, बल्कि नौवहन सहायता, सुरक्षा प्रबंधन और रखरखाव जैसी सेवाओं के बदले लिया जाने वाला प्रशासनिक शुल्क होगा.
हाल ही में ईरान और ओमान ने एक संयुक्त बयान जारी कर इस विषय पर आगे अध्ययन करने की बात कही है. दोनों देशों का मानना है कि जलमार्ग से जुड़ी कुछ प्रशासनिक सेवाओं के लिए शुल्क व्यवस्था पर विचार किया जा सकता है. इस बीच अमेरिका ऐसे किसी भी प्रस्ताव का विरोध कर रहा है, क्योंकि उसका मानना है कि इससे वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति प्रभावित हो सकती है. फिलहाल सभी की नजरें जारी वार्ताओं और आने वाले संभावित समझौतों पर टिकी हुई हैं. First Updated : Wednesday, 24 June 2026