स्ट्रेट ऑफ होर्मुज़ बंद करने पर ट्रंप की ईरान को सख्त चेतावनी, कहा अपने देश वापस भी नहीं पहुँच पाओगे

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि अगर ईरान ने इसे बंद किया तो वाशिंगटन भारी बल के साथ जवाब देगा।

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नई दिल्ली: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने रविवार 21 जून को कहा कि उन्होंने ईरानी अधिकारियों से रात भर बात की है और तेहरान को साफ चेतावनी दी है कि होर्मुज़ जलडमरूमध्य में शिपिंग रोकने की कोशिश की तो अंजाम बुरे होंगे।  

ट्रंप बोले: देश वापस नहीं पहुंच पाओगे   

होर्मुज़ जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे अहम तेल मार्गों में से एक है। ट्रंप ने फॉक्स न्यूज से कहा कि अगर ईरान ने इसे बंद किया तो वाशिंगटन भारी बल के साथ जवाब देगा। उन्होंने कहा, "अगर तुम इसे बंद करोगे तो तुम्हारा देश ही नहीं बचेगा। तुम अपने देश वापस भी नहीं पहुंच पाओगे।"  

ट्रंप ने यह भी संकेत दिया कि जरूरत पड़ी तो अमेरिका इस जलमार्ग का नियंत्रण खुद अपने हाथ में ले सकता है और यहां से गुजरने वाले तेल जहाजों पर ट्रांजिट शुल्क लगा सकता है। उन्होंने कहा, "अगर बात नहीं बनी तो हम टोल वसूलेंगे।"  

अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा कि 60 दिन की युद्धविराम अवधि के दौरान कोई शुल्क नहीं लगेगा। लेकिन अगर इस दौरान स्थायी समझौता नहीं हुआ तो बाद में अमेरिका जहाजों पर शुल्क लगा सकता है। ट्रंप ने इसे अमेरिकी सेना की सेवाओं का मुआवजा बताया और खुद को पश्चिम एशिया का गार्जियन एंजेल कहा।  

ईरान का जवाब और ट्रंप की प्रतिक्रिया   

ट्रंप की चेतावनी ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बयान के बाद आई। पेज़ेशकियन ने कहा कि ईरान यूरेनियम संवर्धन का अपना हक नहीं छोड़ेगा और अमेरिका को इसे मानना ही होगा।  

इस पर ट्रंप ने तेहरान को नसीहत दी कि वह बयानबाजी कम करे। उन्होंने कहा, "उन्हें अपनी जुबान संभालकर रखनी चाहिए। अगर समझौते के लिए ठोस कदम नहीं उठाए तो हम बाकी देश पर भी कब्जा कर सकते हैं।"  

स्विट्जरलैंड में जारी है बातचीत   

उधर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि स्विट्जरलैंड में अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में अच्छी प्रगति हुई है। लेबनान और होर्मुज़ को लेकर मतभेद अब भी हैं, लेकिन कई मुद्दों पर सहमति बन रही है। कतर के विदेश मंत्रालय ने बताया कि कतर और पाकिस्तान की मध्यस्थता में अमेरिका और ईरान के प्रतिनिधियों की बैठक शुरू हो गई है।

इसे लेक ल्यूसर्न समिट नाम दिया गया है। कतर का कहना है कि उम्मीद है कि इन बैठकों से एक व्यापक समझौता निकलेगा जिसमें सभी मुद्दों का समाधान हो। अभी बातचीत जारी है और अगले कुछ दिन तय करेंगे कि मध्य पूर्व में तनाव कम होता है या और बढ़ता है।  First Updated : Sunday, 21 June 2026