अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में ग्रीनलैंड पर कब्जा करने के लिए अपनी आक्रामक बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई की धमकी देकर यूरोप में तनाव को बढ़ा दिया था. ग्रीनलैंड, जो डेनमार्क का एक स्वायत्त क्षेत्र है, को लेकर ट्रंप का विवाद अचानक अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में आ गया. हालांकि, कुछ समय बाद उनका रुख नरम हुआ और उन्होंने टैरिफ का सहारा लिया, जिससे यह सवाल उठने लगा कि क्या यह 'ट्रंप ऑलवेज चिकन्स आउट' (TACO) का एक और उदाहरण है?
ट्रंप ने पहले ग्रीनलैंड को अमेरिका में शामिल करने की बात की थी, जिसे लेकर डेनमार्क और अन्य यूरोपीय देशों के बीच तनाव पैदा हो गया. डेनमार्क ने इस प्रस्ताव का कड़ा विरोध किया, जिसके बाद ट्रंप ने सैन्य कार्रवाई की भी धमकी दी थी. हालांकि, ग्रीनलैंड के मुद्दे पर स्थिति और भी जटिल हो गई जब ट्रंप ने इसे अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए जरूरी बताया.
बयानबाजी और फिर टैरिफ की धमकी
ग्रीनलैंड के खिलाफ अपनी आक्रामक बयानबाजी के बाद, ट्रंप ने 16 जनवरी को यह ऐलान किया कि वह ग्रीनलैंड पर समझौता नहीं होने पर यूरोपीय देशों पर टैरिफ लगाएंगे. इसके बाद, उन्होंने 17 जनवरी को यह भी कहा कि डेनमार्क, ब्रिटेन, फ्रांस और अन्य यूरोपीय देशों पर 1 फरवरी से 10% टैरिफ लगाया जाएगा, और जून तक यह बढ़ाकर 25% कर दिया जाएगा. इससे यूरोपीय देशों में हड़कंप मच गया और व्यापार युद्ध की संभावना बढ़ गई.
हालांकि, कुछ ही दिनों बाद ट्रंप का रुख नरम हुआ. जब पत्रकारों ने उनसे ग्रीनलैंड पर सैन्य कार्रवाई के बारे में सवाल पूछा, तो उन्होंने कोई ठोस जवाब नहीं दिया. इसके बाद, उन्होंने अपनी टीम से कहा कि अगर ग्रीनलैंड पर कोई समझौता नहीं हुआ तो टैरिफ लागू किए जाएंगे, लेकिन सैन्य बल का इस्तेमाल जरूरी नहीं है. इसके बाद, यूरोपीय देशों ने भी ट्रंप को स्पष्ट किया कि उनका सैन्य तैनाती का निर्णय पहले से तय किया गया था, और यह ट्रंप के लिए गलत जानकारी हो सकती है.
ग्रीनलैंड पर कब्जे के पीछे ट्रंप के कारण
ट्रंप ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की आवश्यकता के पीछे कई कारण बताए. उनका कहना था कि रूस और चीन के बढ़ते प्रभाव के कारण आर्कटिक क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य गतिविधियों को बढ़ावा देना जरूरी है. उन्होंने यह भी कहा कि ग्रीनलैंड उनकी मिसाइल रक्षा योजना "गोल्डन डोम" के लिए रणनीतिक महत्व रखता है. हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका को ग्रीनलैंड पर स्वामित्व की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि 1951 में हुए एक समझौते के तहत अमेरिका को ग्रीनलैंड में रक्षा सुविधाएं बनाने का अधिकार प्राप्त है।
क्या यह 'ट्रंप ऑलवेज चिकन आउट' है?
ट्रंप की बयानबाजी और सैन्य कार्रवाई की धमकी के बाद, जब उनका रुख अचानक नरम पड़ा और उन्होंने व्यापारिक दबाव बनाने के लिए टैरिफ का सहारा लिया, तो यह सवाल उठने लगा कि क्या वह कभी भी अपने आक्रामक बयानबाजी से पीछे हटने में माहिर हैं. यह स्थिति एक और उदाहरण हो सकती है कि कैसे ट्रंप किसी भी बड़ी धमकी के बाद पीछे हट जाते हैं और अपनी रणनीति को बदल लेते हैं. First Updated : Tuesday, 20 January 2026