नई दिल्ली: अमेरिका में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से जुड़े डेटा सेंटरों को लेकर नया विवाद सामने आया है. बता दें, अमेरिका की टेक्नोलॉजी इंडस्ट्री से जुड़े कुछ आर्गेनाइजेशन का आरोप है कि चीन से जुड़े एलिमेंट सोशल मीडिया के जरिए डेटा सेंटरों के खिलाफ माहौल बनाने की कोशिश कर रहे हैं. हालांकि कई एक्सपर्ट्स और स्थानीय लोगों का कहना है कि विरोध की वजह विदेशी दखल नहीं, बल्कि लोगों की अपनी चिंताएं हैं.
एक रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका में AI क्षेत्र तेजी से विस्तार कर रहा है और इसके लिए बड़े पैमाने पर डेटा सेंटर बनाए जा रहे हैं. लेकिन इन प्रोजेक्ट्स का कई जगहों पर विरोध किया जा रहा है. स्थानीय लोगों का कहना है कि डेटा सेंटरों के कारण बिजली और पानी की खपत बढ़ सकती है. इसके साथ ही शोर की समस्या हो सकती है और पर्यावरण पर भी असर पड़ सकता है.
AI इंडस्ट्री से जुड़े कुछ समूहों का दावा है कि सोशल मीडिया पर डेटा सेंटर विरोधी पोस्ट की संख्या अचानक बढ़ी है. इसे लेकर उनका मानना है कि इनमें से कई पोस्ट विदेशों से संचालित किए जा रहे हैं और उनका उद्देश्य अमेरिका के AI इंडस्ट्री के प्रोग्रेस को धीमा करना है. कुछ आर्गेनाइजेशन ने इस मामले की जांच की मांग भी की है.
वहीं दूसरी ओर डेटा सेंटरों का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं का कहना है कि लोगों की चिंताएं पूरी तरह वास्तविक हैं. उनका तर्क है कि अमेरिका के कई समुदाय अपने क्षेत्रों में बड़े औद्योगिक ढांचे के निर्माण से परेशान हैं और वे अपने पर्यावरण तथा संसाधनों की सुरक्षा चाहते हैं. उनका कहना है कि हर विरोध को विदेशी साजिश बताना सही नहीं है.
बता दें, हाल ही में हुए एक सर्वे में बड़ी संख्या में अमेरिकी नागरिकों ने अपनी कम्युनिटी में नए डेटा सेंटर बनाए जाने का विरोध किया है. लोगों ने बिजली बिल बढ़ने, पानी की अधिक खपत और स्थानीय जीवन पर पड़ने वाले प्रभाव को लेकर भी चिंता जताई है. अब AI समर्थक समूह इस मुद्दे को अमेरिकी संसद तक ले जाने की तैयारी कर रहे हैं. इस बीच सभी की नजरे इसी बात पर टिकी है कि क्या अमेरिकी संसद तक जाने के बाद ये मामला सुलझ पाएगा या नहीं? First Updated : Saturday, 06 June 2026