ईरान-ओमान का नया प्रोटोकॉल तैयार, होर्मुज खोलने की तैयारी, भारत समेत मित्र देशों को राहत का मिला बड़ा संकेत

ईरान और ओमान मिलकर होर्मुज जलडमरुमध्य के लिए नया प्रोटोकॉल बना रहे हैं. भारत समेत मित्र देशों के लिए रास्ता खोलने के संकेत दिए गए हैं.

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

ईरान ने संकेत दिए हैं कि वह जल्द होर्मुज जलडमरुमध्य खोल सकता है. यह वही रूट है जहां से दुनिया का बड़ा तेल व्यापार गुजरता है. ईरान ने पहले ही कहा था कि वह कुछ मित्र देशों के लिए रास्ता खोलेगा. अब इसी दिशा में काम तेज हो गया है. ओमान के साथ मिलकर एक नया सिस्टम तैयार किया जा रहा है. इससे जहाजों की आवाजाही को नियंत्रित किया जाएगा.

क्या नया प्रोटोकॉल बन रहा है?

ईरान इस समय एक ड्राफ्ट प्रोटोकॉल तैयार कर रहा है. यह प्रोटोकॉल होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों की निगरानी के लिए होगा. ईरान के उप विदेश मंत्री Kazem Gharibabadi ने बताया कि ड्राफ्ट को अंतिम रूप दिया जा रहा है. जैसे ही आंतरिक मंजूरी मिलेगी, ओमान के साथ औपचारिक बातचीत शुरू होगी. इसके बाद इस सिस्टम को लागू किया जा सकता है.

क्या ईरान और ओमान साथ मिलकर काम करेंगे?

इस योजना में ईरान और ओमान दोनों की अहम भूमिका होगी. दोनों देश मिलकर जहाजों की आवाजाही पर नजर रखेंगे. इसका मकसद ट्रैफिक को बेहतर तरीके से मैनेज करना है. साथ ही जहाजों को सुरक्षित रास्ता देना भी शामिल है. यह व्यवस्था तेल सप्लाई को सुचारु बनाए रखने में मदद कर सकती है. इससे वैश्विक बाजार पर भी असर पड़ सकता है.

क्या इस प्रोटोकॉल से पाबंदियां लगेंगी?

ईरान ने साफ किया है कि यह प्रोटोकॉल पाबंदी लगाने के लिए नहीं है. इसका उद्देश्य जहाजों को सुरक्षित और व्यवस्थित रास्ता देना है. सरकार का कहना है कि जो जहाज इस रूट से गुजरेंगे, उन्हें बेहतर सुविधा दी जाएगी. यानी यह नियंत्रण से ज्यादा सुरक्षा और समन्वय पर आधारित सिस्टम होगा.

क्या युद्ध की वजह से बदले नियम?

ईरान का कहना है कि मौजूदा हालात सामान्य नहीं हैं. युद्ध की स्थिति में पुराने नियम लागू नहीं हो सकते. इसलिए नई व्यवस्था की जरूरत है. ओमान ने इस पर अभी सार्वजनिक बयान नहीं दिया है. लेकिन बातचीत जारी है. माना जा रहा है कि दोनों देश मिलकर नया फ्रेमवर्क तैयार करेंगे.

क्या किन देशों को मिलेगा फायदा?

ईरान पहले ही साफ कर चुका है कि वह पांच मित्र देशों के लिए होर्मुज खोलेगा. इनमें भारत, रूस, चीन, इराक और पाकिस्तान शामिल हैं. इन देशों के जहाजों को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे भारत जैसे देशों को बड़ा फायदा मिल सकता है. खासकर तेल सप्लाई के लिहाज से यह अहम कदम माना जा रहा है.

क्या सभी देशों को मिलेगी अनुमति?

ईरान ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी देशों को अनुमति नहीं मिलेगी. अमेरिका, इजरायल और उनके सहयोगी देशों के जहाजों को इस रूट से गुजरने की इजाजत नहीं दी जाएगी. इससे साफ है कि यह फैसला पूरी तरह रणनीतिक है. आने वाले समय में इसका असर वैश्विक राजनीति और व्यापार दोनों पर दिख सकता है.

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