पाकिस्तान द्वारा गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव कराने पर भारत ने जताया कड़ा विरोध, कहा POK हमारा है

पाकिस्तान एक बार फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपनी गतिविधियां तेज कर रहा है। इस बार उसने गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को विधानसभा चुनाव कराने का ऐलान किया है।

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नई दिल्ली: पाकिस्तान एक बार फिर पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में अपनी गतिविधियां तेज कर रहा है। इस बार उसने गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को विधानसभा चुनाव कराने का ऐलान किया है। भारत ने इस कदम पर तुरंत आपत्ति जताते हुए पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है।  

छह साल बाद हो रहे इन चुनावों में गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली के लिए 33 सदस्यों का चुनाव होना है। भारत का कहना है कि इस इलाके पर पाकिस्तान का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, इसलिए यहां कोई भी प्रशासनिक या राजनीतिक कदम अवैध है।  

भारत ने MEA के बयान में दी सख्त प्रतिक्रिया    

विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार, 05 जून 2026 को जारी बयान में कहा कि भारत सरकार ने पाकिस्तान के सामने कड़ा विरोध दर्ज कराया है। यह विरोध गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली के लिए होने वाले तथाकथित आम चुनावों को लेकर है।  

बयान में साफ कहा गया कि जम्मू कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत का अभिन्न हिस्सा हैं। इसमें तथाकथित गिलगित-बाल्टिस्तान भी शामिल है। भारत के मुताबिक पाकिस्तान के किसी भी कदम से इस क्षेत्र पर उसके दावे में कोई बदलाव नहीं आएगा।  

विदेश मंत्रालय ने दोहराया कि पाकिस्तान को अवैध रूप से कब्जाए गए सभी इलाकों को खाली करना चाहिए। भारत का मानना है कि पाकिस्तान इन इलाकों में बदलाव करके मानवाधिकारों के उल्लंघन, राजनीतिक दमन और आर्थिक शोषण को छिपाने की कोशिश कर रहा है।  

गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली का इतिहास    

पाकिस्तान ने 2009 में गिलगित-बाल्टिस्तान असेंबली बनाई थी जिसमें कुल 33 सीटें हैं। तब से ये असेंबली काम कर रही है, लेकिन भारत इसे कभी मान्यता नहीं देता। भारत का रुख शुरू से साफ रहा है कि इस इलाके पर पाकिस्तान का कब्जा अवैध है।  

ये विवाद ऐसे समय बढ़ा है जब हाल ही में भारत ने चीन और पाकिस्तान के संयुक्त बयान में गिलगित-बाल्टिस्तान का जिक्र किए जाने पर आपत्ति जताई थी। भारत ने कहा था कि तीसरे देश का इस इलाके को लेकर कोई भी बयान बेमानी है।  

भारत का लगातार रुख   

भारत पहले भी गिलगित-बाल्टिस्तान में पाकिस्तान के प्रशासनिक, राजनीतिक और संवैधानिक कदमों का विरोध करता रहा है। विदेश मंत्रालय का कहना है कि ये कदम न सिर्फ अवैध हैं बल्कि लोगों की आजादी पर भी सवाल खड़े करते हैं।  

सरकार ने साफ कर दिया है कि जम्मू कश्मीर को लेकर भारत का रुख अंतरराष्ट्रीय मंचों पर भी वही रहेगा। पाकिस्तान के किसी भी चुनाव या संवैधानिक बदलाव से जमीन की हकीकत नहीं बदलेगी।   First Updated : Friday, 05 June 2026