पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने 2008 में जो रास्ता दिखाया था, अब प्रधानमंत्री मोदी उसे और आगे बढ़ाने जा रहे हैं. इसका संकेत वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने हाल ही में अपने बजट भाषण में दिया. उन्होंने कहा कि भारत के परमाणु दायित्व कानून में संशोधन किया जाएगा. यह कानून परमाणु दुर्घटना के बाद कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने की बात करता है, जिससे विदेशी कंपनियां भारत में निवेश करने से डरती हैं. इस संशोधन से परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा.
यह कानून यह तय करता है कि यदि कोई परमाणु दुर्घटना होती है तो कंपनियों को मुआवजा देना होगा. इसमें विदेशी कंपनियां भी शामिल हैं. इस कानून के कारण पिछले 14 सालों में कोई विदेशी कंपनी भारत में निवेश करने के लिए तैयार नहीं हुई है, जिससे परमाणु ऊर्जा का विकास नहीं हो सका.
केंद्रीय वित्त मंत्री ने कहा कि इस कानून में संशोधन करने का उद्देश्य भारत में परमाणु ऊर्जा के उत्पादन को बढ़ावा देना है, जिससे विदेशी कंपनियों का निवेश आकर्षित हो सके. इससे भारत का परमाणु ऊर्जा क्षेत्र और ज्यादा सशक्त होगा. यह कदम प्रधानमंत्री मोदी के अमेरिका दौरे के दौरान महत्वपूर्ण साबित होगा, क्योंकि अमेरिका ने हाल ही में भारत के लिए अपनी तीन परमाणु संस्थाओं से बैन हटा लिया है.
परमाणु दायित्व कानून में संशोधन की घोषणा ऐसे समय में की गई है जब प्रधानमंत्री मोदी 12 फरवरी को पेरिस से अमेरिका के लिए रवाना होंगे. वहां उनकी मुलाकात डोनाल्ड ट्रंप से होगी. इस मुलाकात में परमाणु ऊर्जा, व्यापार और निवेश के मुद्दों पर चर्चा होगी. इससे भारत-अमेरिका के परमाणु सहयोग में नए अवसर खुल सकते हैं.
भारत का लक्ष्य है कि 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु ऊर्जा क्षमता हासिल की जाए. इसके लिए परमाणु ऊर्जा उत्पादन में तेजी लानी होगी और बुनियादी ढांचे को मजबूत करना होगा. इस उद्देश्य को पूरा करने के लिए यह कदम उठाए गए हैं, ताकि विदेशी कंपनियां निवेश के लिए तैयार हों.
यह कानून परमाणु ऊर्जा संयंत्रों से जुड़ी जिम्मेदारियों और मुआवजे से संबंधित है. यदि कोई परमाणु दुर्घटना होती है, तो प्रभावित लोगों को मुआवजा देने का प्रावधान है. यह कानून कंपनियों पर भारी जुर्माना लगाने की बात करता है, जो विदेशी कंपनियों के लिए आकर्षक नहीं है. इस वजह से विदेशी कंपनियां भारत में परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में निवेश नहीं कर पाई हैं.
भारत परमाणु ऊर्जा के क्षेत्र में निवेश बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, क्योंकि यह कार्बन मुक्त ऊर्जा स्रोत है. इसका मुख्य फायदा यह है कि इसमें कोई कार्बन उत्सर्जन नहीं होता, जिससे पर्यावरण पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है. इसके अलावा, कम मात्रा में यूरेनियम से ज्यादा ऊर्जा उत्पन्न की जा सकती है. भारत का लक्ष्य है कि 2070 तक कार्बन उत्सर्जन को शून्य तक लाया जाए, और इसके लिए परमाणु ऊर्जा अहम साबित हो सकती है.
2008 में भारत और अमेरिका के बीच सिविल न्यूक्लियर समझौता हुआ था, जो भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा कदम था. इस समझौते से भारत को अमेरिका से परमाणु ऊर्जा प्रौद्योगिकी मिलनी थी, लेकिन भारत के सख्त दायित्व कानूनों के कारण यह सहयोग नहीं बढ़ सका. अब, प्रधानमंत्री मोदी ने इस मुद्दे पर आगे बढ़ने की योजना बनाई है.
भारत और अमेरिका के बीच परमाणु ऊर्जा सहयोग के रास्ते में नागरिक परमाणु क्षति दायित्व अधिनियम एक बड़ा रोड़ा साबित हुआ. यह कानून कंपनियों को बहुत बड़ा जुर्माना लगाने की बात करता है, जिससे विदेशी कंपनियां निवेश करने से डरती हैं. यही वजह है कि पीएम मोदी अब इस कानून में बदलाव करने जा रहे हैं ताकि निवेश को बढ़ावा मिल सके. First Updated : Tuesday, 04 February 2025