नई दिल्ली : मध्य पूर्व के क्षेत्र में ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष तेज हो गया है. कुछ दिनों पहले चीन की सैटेलाइट्स से जारी तस्वीरों ने अमेरिकी बेसों पर विमानों और मिसाइल सिस्टम की बढ़ती संख्या दिखाई. प्लैनेट लैब्स और रॉयटर्स की रिपोर्ट्स में कतर, जॉर्डन और सऊदी अरब जैसे देशों में बदलाव साफ नजर आए. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ईरान से परमाणु समझौता चाहते हैं, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइल कार्यक्रम पर रोक की मांग भी कर रहे हैं. ईरान ने इससे इनकार कर दिया, जिसके बाद हमले शुरू हो गए. बहरीन के नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया गया, जबकि पिछले साल अमेरिका ने ईरान के परमाणु स्थलों पर हमला किया था.
आपको बता दें कि जनवरी और फरवरी 2026 के बीच प्लैनेट लैब्स की तस्वीरों से अमेरिकी ठिकानों पर बड़े बदलाव दिखे. अल उदेद एयर बेस में कतर में विमानों की संख्या बढ़ी और पैट्रियट मिसाइल लॉन्चर तैनात किए गए, जो ईरानी मिसाइलों से रक्षा करेंगे. मुवाफक साल्टी एयर बेस जॉर्डन में एफ-15ई जेट्स, ए-10 विमान और एमक्यू-9 ड्रोन्स की तैनाती हुई. प्रिंस सुल्तान एयर बेस सऊदी अरब में बड़े ट्रांसपोर्ट विमान नजर आए. ओमान और डिएगो गार्सिया जैसे इलाकों में भी सैन्य उपकरण बढ़े, जो कुल मिलाकर अमेरिका की रक्षात्मक तैयारी दिखाते हैं.
बहरीन में अमेरिकी नौसेना की पांचवीं फ्लीट का मुख्यालय है, जो खाड़ी, लाल सागर और अरब सागर की सुरक्षा संभालती है. यह अड्डा समुद्री मार्गों की रक्षा में अहम भूमिका निभाता है. ईरान के हालिया हमलों ने इसे सीधे निशाने पर लिया, जिससे क्षेत्रीय स्थिरता खतरे में पड़ गई. यहां तैनात जहाज और कर्मी अमेरिकी हितों की रक्षा करते हैं, लेकिन बढ़ते तनाव से चुनौतियां बढ़ी हैं.
कतर की राजधानी दोहा के पास रेगिस्तानी इलाके में अल उदेद एयर बेस स्थित है, जो अमेरिकी सेंट्रल कमांड का केंद्र है. यह मिस्र से कजाकिस्तान तक के क्षेत्र में अभियानों को निर्देशित करता है. यहां लगभग 10 हजार अमेरिकी सैनिक रहते हैं. जनवरी में यहां एक नया समन्वय केंद्र खोला गया, जो वायु और मिसाइल रक्षा को मजबूत करेगा. सैटेलाइट तस्वीरों से यहां की बढ़ती गतिविधियां साफ हैं.
कुवैत में कैंप अरिफजन अमेरिकी सेना का मुख्यालय है, जबकि अली अल सलेम एयर बेस इराक सीमा के करीब है. कैंप ब्यूहरिंग इराक युद्ध के समय बना, जो स्टेजिंग पॉइंट के रूप में काम करता है. यूएई में अल धफरा एयर बेस अमेरिकी वायु सेना का महत्वपूर्ण केंद्र है, जो आईएसआईएस के खिलाफ मिशनों में सक्रिय है. जेबेल अली पोर्ट नौसेना जहाजों के लिए बड़ा बंदरगाह है, जहां नियमित रूप से जहाज आते हैं.
इराक में एन अल असद एयर बेस इराकी बलों को सहयोग देता है, जबकि एरबिल ट्रेनिंग का केंद्र है. 2020 में ईरान ने यहां हमला किया था. सऊदी अरब में प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर पैट्रियट और थाड सिस्टम तैनात हैं. जॉर्डन के मुवाफक साल्टी एयर बेस में अमेरिकी विंग सक्रिय है. तुर्की के इंसिरलिक में परमाणु हथियार रखे हैं, जो गठबंधन अभियानों में मदद करते हैं. ये सभी ठिकाने अमेरिकी रणनीति का हिस्सा हैं, लेकिन ईरानी खतरे से दबाव में हैं. First Updated : Saturday, 28 February 2026