नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच चल रहा तनाव अब हिंद महासागर तक फैल चुका है, जिससे भारत के निकटवर्ती क्षेत्र में भी सुरक्षा चिंताएं बढ़ गई हैं. ईरान ने अमेरिका-ब्रिटेन के संयुक्त सैन्य अड्डे डिएगो गार्सिया पर मिसाइल हमला किया है, जो युद्ध के विस्तार का स्पष्ट संकेत है. एक रिपोर्ट के अनुसार, ईरान ने दो इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं, लेकिन यह हमला लक्ष्य तक नहीं पहुंच सका और अड्डे को कोई नुकसान नहीं हुआ.
यह घटना ऐसे समय में हुई है जब ब्रिटेन ने अमेरिका को अपने ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी थी, जिसके जवाब में ईरान ने पहले ही चेतावनी जारी की थी. हमले की असफलता के बावजूद, यह ईरान की मिसाइल क्षमता और क्षेत्रीय रणनीति पर नए सवाल खड़े कर रहा है, खासकर भारत के पड़ोस में स्थित इस रणनीतिक अड्डे को निशाना बनाने के प्रयास से.
ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया अड्डे को निशाना बनाते हुए दो इंटरमीडिएट रेंज बैलिस्टिक मिसाइलें लॉन्च कीं. वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारियों ने पुष्टि की कि एक मिसाइल उड़ान के दौरान फेल हो गई, जबकि दूसरी मिसाइल को रोकने के लिए अमेरिकी युद्धपोत ने SM-3 इंटरसेप्टर मिसाइल दागी. हालांकि इंटरसेप्शन की पूरी सफलता की पुष्टि नहीं हुई, लेकिन अड्डे को किसी तरह का नुकसान नहीं पहुंचा.
डिएगो गार्सिया हिंद महासागर में एक अत्यंत महत्वपूर्ण सैन्य अड्डा है, जहां से अमेरिका और ब्रिटेन पूरे एशिया तथा पश्चिम एशिया में अपने ऑपरेशन संचालित करते हैं. भारत से इसकी दूरी लगभग 1800 किलोमीटर है और बीच में कुछ टापुओं के अलावा कोई बड़ा भूभाग नहीं है, इसलिए इसे भारत के पड़ोस में स्थित माना जाता है. यह अड्डा क्षेत्रीय सुरक्षा और अमेरिकी सैन्य रणनीति के लिए बेहद अहम है.
इस हमले से पहले ब्रिटेन ने 20 मार्च 2026 को अमेरिका को अपने सैन्य ठिकानों का उपयोग करने की अनुमति दी थी, खासकर उन ठिकानों पर हमला करने के लिए जो होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों को निशाना बना रहे थे. ईरान ने इस फैसले पर तुरंत प्रतिक्रिया देते हुए चेतावनी जारी की थी. ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने कहा था कि अगर UK अमेरिका को अपना ठिकाना देता है तो वह ब्रिटिश नागरिकों का जीवन खतरे में डालेगा. यह घटना दर्शाती है कि ईरान अपनी चेतावनियों पर अमल करने में पीछे नहीं हटता.
ईरान और डिएगो गार्सिया के बीच की दूरी लगभग 3500-4000 किलोमीटर है. ईरान के पास सबसे लंबी रेंज वाली क्रूज मिसाइल सौमर है, जिसकी रेंज 2000-3000 किलोमीटर बताई जाती है. ऐसे में सवाल उठता है कि इतनी दूरी तक पहुंचने वाली मिसाइल के बिना ईरान ने हमला कैसे किया? अभी तक यह स्पष्ट नहीं है कि ईरान ने किस प्रकार की मिसाइलों का इस्तेमाल किया. विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान की मिसाइल क्षमता और इस दूरी को देखते हुए हमला सफल होना मुश्किल था. First Updated : Saturday, 21 March 2026