'सेहत योजना' बनी डायबिटीज मरीजों का सहारा, ₹6.5 करोड़ के खर्च से 6 महीने में 2,300 मरीजों का हुआ कैशलेस इलाज
पंजाब में डायबिटीज अब केवल उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक रूप से सक्रिय और कामकाजी आबादी को तेजी से अपना शिकार बना रही है.

चंडीगढ़: पंजाब में डायबिटीज अब केवल उम्रदराज लोगों की समस्या नहीं रह गई है, बल्कि यह राज्य की आर्थिक रूप से सक्रिय और कामकाजी आबादी को तेजी से अपना शिकार बना रही है. मुख्यमंत्री सेहत योजना के तहत जारी ताज़ा आँकड़ों ने स्वास्थ्य विशेषज्ञों और आम जनता के लिए चिंता बढ़ा दी है. पिछले छह महीनों में इस योजना के जरिए 2,300 डायबिटीज रोगियों का कैशलेस इलाज किया गया, जिस पर राज्य सरकार ने लगभग 6.5 करोड़ की उपचार राशि खर्च की.
राज्य स्वास्थ्य एजेंसी (एसएचए), पंजाब द्वारा 21 जुलाई 2026 तक संकलित किए गए आँकड़ों के विश्लेषण से पता चलता है कि सबसे ज्यादा प्रभावित लोग 36 से 60 वर्ष के आयु वर्ग के हैं. इस वर्ग में इलाज के सर्वाधिक 1,123 मामले दर्ज किए गए। वहीं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों में 809, 17 से 35 वर्ष के युवाओं में 243 और 0 से 16 वर्ष के बच्चों में 125 मामले सामने आए हैं. ये आँकड़े स्पष्ट करते हैं कि बीमारी का असर अब बच्चों से लेकर कामकाजी युवाओं और वयस्कों तक व्यापक रूप से फैल चुका है.
देर से अस्पताल पहुँचना और बढ़ती जटिलतियाँ
स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, अस्पताल पहुँचने वाले अधिकांश मरीज़ बेहद गंभीर अवस्था में दर्ज किए गए. उपचार पैकेज में सबसे अधिक दावे 'डायबिटिक कीटोएसिडोसिस' के पाए गए, जो कि रक्त में शुगर का स्तर अत्यधिक अनियंत्रित होने से उत्पन्न होने वाली एक जानलेवा स्थिति है.
इसके अतिरिक्त, लंबे समय तक ब्लड शुगर अनियंत्रित रहने से नसों और रक्त वाहिकाओं को पहुँचने वाले नुकसान के कारण 'डायबिटिक फुट' दूसरी सबसे प्रमुख जटिलता बनकर उभरा. कई मामलों में रोगियों को गहन चिकित्सा (आईसीयू), डायलिसिस, ब्लड ट्रांसफ्यूजन, सीटी और एमआरआई स्कैन तथा डायबिटिक फुट सर्जरी जैसे गंभीर चिकित्सा उपचारों की जरूरत पड़ी.
जीवनशैली और बढ़ते जोखिम के कारक
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के दिशानिर्देशों के हवाले से स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने बताया कि जंक और प्रोसेस्ड फूड का बढ़ता उपयोग, मीठे पेय पदार्थ, शारीरिक गतिविधि में कमी, मोटापा, तंबाकू एवं शराब का अत्यधिक सेवन इस बीमारी के मुख्य कारण हैं. इसके अलावा, कामकाजी वर्ग में लंबे समय तक काम करने के घंटे, नींद की कमी और लगातार तनाव भी शुगर स्तर को तेज़ी से बिगाड़ रहे हैं.
स्वास्थ्य मंत्री की चेतावनी और अपील
पंजाब के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री डॉ. बलबीर सिंह ने इन आँकड़ों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि यह स्थिति हर परिवार के लिए एक गंभीर चेतावनी है. उन्होंने कहा कि 36 से 60 वर्ष की आयु के लोग राज्य की रीढ़ हैं. वे अपने परिवारों का पालन-पोषण कर रहे हैं, रोजगार संभाल रहे हैं और आर्थिक जिम्मेदारियाँ उठा रहे हैं. जब डायबिटीज इस वर्ग को प्रभावित करती है, तो इसका असर पूरे परिवार और समाज पर पड़ता है. अस्पतालों में जीवन बचाया जा सकता है, लेकिन स्वास्थ्य के प्रति लापरवाही के कारण खोए हुए वर्ष वापस नहीं लाए जा सकते.
डॉ. बलबीर सिंह ने लोगों से अपील की कि वे बीमारी के शुरुआती लक्षणों जैसे अत्यधिक प्यास लगना, बार-बार पेशाब आना, धुंधला दिखना, बिना कारण थकान और घाव न भरना, को सामान्य समझकर नज़रअंदाज न करें और नियमित शुगर जाँच करवाएँ.
बचाव और समाधान के उपाय
30 वर्ष की आयु के बाद हर व्यक्ति को वर्ष में कम से कम दो बार ब्लड शुगर की जाँच करवानी चाहिए. इसके साथ ही दैनिक आहार में प्रोसेस्ड फूड, जंक फूड और अत्यधिक मीठे पेय पदार्थों से परहेज़ करना आवश्यक है. प्रतिदिन कम से कम 30 से 45 मिनट टहलना या शारीरिक व्यायाम करना शरीर को स्वस्थ रखता है. इसके अलावा तंबाकू, धूम्रपान और शराब के हानिकारक सेवन से पूरी तरह बचना चाहिए.


