ईरान के नए लीडर मोजतबा खामेनेई के पास कितना पैसा? लंदन-दुबई में है अरबों का प्रॉपर्टी एम्पायर

ईरान में जारी युद्ध और आर्थिक संकट के बीच खामेनेई के बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना गया है. मोजतबा के निजी जीवन और संपत्ति को लेकर अब बड़ी चर्चा हो रही है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनकी संपत्ति अरबों डॉलर की है.

Sonee Srivastav

नई दिल्ली: ईरान में हाल ही में बड़ा बदलाव आया है. अमेरिका और इजरायल के साथ जारी युद्ध के बीच, ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की मौत के बाद उनकी असेंबली ऑफ एक्सपर्ट्स ने उनके बेटे मोजतबा खामेनेई को नया सर्वोच्च नेता चुना है. 56 साल के मोजतबा को रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का मजबूत समर्थन है और उनके विचार पिता से भी ज्यादा सख्त माने जाते हैं.

यह फैसला ऐसे समय में आया है जब ईरान युद्ध और आर्थिक संकट से जूझ रहा है, लेकिन मोजतबा के निजी जीवन और संपत्ति को लेकर अब बड़ी चर्चा हो रही है. रिपोर्ट्स बताती हैं कि उनकी संपत्ति अरबों डॉलर की है और यह लंदन, दुबई से लेकर यूरोप तक फैली हुई है.

मोजतबा की संपत्ति का अनुमान

मोजतबा की सटीक संपत्ति का पता नहीं चलता, क्योंकि ज्यादातर संपत्ति उनके नाम पर नहीं है. शेल कंपनियों और ट्रस्टेड लोगों के जरिए ये सब संभाला जाता है. पश्चिमी जांच एजेंसियों और मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, उनकी कुल संपत्ति अरबों डॉलर में हो सकती है. कुछ अनुमान 3 अरब डॉलर से ज्यादा बताते हैं. 

कहां-कहां फैला है साम्राज्य?

ये सारे फंड मुख्य रूप से ईरानी तेल की बिक्री से आए बताए जाते हैं. पैसे ब्रिटेन, स्विट्जरलैंड, लिकटेंस्टीन और यूएई के बैंकों से गुजरते हैं. 2019 में अमेरिका ने मोजतबा पर प्रतिबंध लगा दिए थे, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि वैश्विक वित्तीय सिस्टम की कमजोरियां, जैसे शेल कंपनियों का इस्तेमाल और मालिक की जानकारी छिपाना, ऐसे नेटवर्क को चलने देते हैं. 

सरकारी और विदेशी मीडिया का सच 

ईरान की सरकारी मीडिया खामेनेई परिवार को सादगी और गरीबों के पक्षधर के रूप में दिखाती है. 1979 की क्रांति के बाद वे इस्लाम और सादगी का प्रतीक बताए जाते हैं, लेकिन ये विदेशी संपत्तियां उस छवि से मेल नहीं खाती. खासकर जब ईरान में गरीबी बढ़ रही है और विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं.

मोजतबा का यह छिपा साम्राज्य दिखाता है कि ईरान के प्रभावशाली लोग प्रतिबंधों के बावजूद विदेश में पैसा कैसे पहुंचाते हैं. यह मुद्दा अब और ज्यादा चर्चा में है, क्योंकि नया नेता बनने के बाद उनकी जिम्मेदारी बढ़ गई है.

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