मिडिल ईस्ट में अचानक बड़ा यू-टर्न, ईरान ने पड़ोसी देशों पर हमले रोकने का किया ऐलान, राष्ट्रपति ने माफी के साथ सख्त शर्त भी रखी

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बड़ा ऐलान किया है। उन्होंने कहा कि अब ईरान पड़ोसी देशों पर हमला नहीं करेगा। साथ ही पहले हुए हमलों के लिए माफी भी मांगी। मगर एक शर्त भी रखी। अगर ईरान पर हमला हुआ तो जवाब दिया जाएगा।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

मिडिल ईस्ट में पिछले कई दिनों से तनाव बढ़ा हुआ था। ईरान और कई पड़ोसी देशों के बीच हालात बेहद नाजुक थे। इसी बीच ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि अब पड़ोसी देशों पर हमला नहीं किया जाएगा। यह फैसला अंतरिम लीडरशिप काउंसिल की मंजूरी से लिया गया है। राष्ट्रपति ने यह भी माना कि हाल के हमलों से इलाके में डर फैला। इसलिए उन्होंने अरब देशों से माफी भी मांगी। लेकिन साथ ही साफ कहा कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो जवाब जरूर दिया जाएगा।

आखिर क्यों झुका तेहरान?

ईरान का यह बयान अचानक नहीं आया। पिछले कुछ दिनों में खाड़ी के देशों में बेचैनी बढ़ रही थी। सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात ने जवाबी कार्रवाई की तैयारी शुरू कर दी थी। इससे पूरे इलाके में बड़े युद्ध का खतरा दिखने लगा। ऐसे में ईरान की अंतरिम सत्ता को नया रास्ता चुनना पड़ा। राष्ट्रपति पेजेश्कियन ने कहा कि ईरान अपने पड़ोसियों से टकराव नहीं चाहता। उनका कहना है कि अब इलाके में शांति जरूरी है। इसलिए नई नीति बनाई गई है।

माफी के बाद भी क्यों गूंजे धमाके?

दिलचस्प बात यह रही कि माफी वाले बयान के तुरंत बाद कतर में धमाकों की खबर आई। दोहा में सुरक्षा अलार्म बजने लगे। लोगों ने आसमान में मिसाइलों की आवाज सुनी। कतर के रक्षा मंत्रालय ने भी मिसाइल हमले की पुष्टि की। हालांकि मंत्रालय ने कहा कि मिसाइल को हवा में ही रोक लिया गया। जमीन तक पहुंचने से पहले उसे इंटरसेप्ट कर दिया गया। इसके बाद सवाल उठने लगे कि आखिर यह हमला किसने किया।

क्या सेना तक नहीं पहुंचा फैसला?

अब सबसे बड़ा सवाल यही है। क्या राष्ट्रपति का फैसला सेना तक नहीं पहुंचा। या फिर जमीन पर कुछ और चल रहा है। कई रिपोर्ट कहती हैं कि ईरान की सत्ता इस समय बंटी हुई है। अंतरिम लीडरशिप काउंसिल फैसले ले रही है। मगर सेना और दूसरे ताकतवर गुट अलग रुख भी ले सकते हैं। यही वजह है कि माफी के बयान के बाद भी मिसाइल की खबर आई। इससे पूरे इलाके में फिर चिंता बढ़ गई।

ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ा तनाव?

इस पूरे मामले में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का बयान भी चर्चा में है। ट्रंप ने कहा था कि ईरान बिना शर्त सरेंडर करे। तभी अमेरिका बातचीत पर विचार करेगा। इस बयान पर ईरान के राष्ट्रपति ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि ईरान कभी सरेंडर नहीं करेगा। उनका कहना था कि दुश्मन ऐसे सपने देखना छोड़ दे। ईरान अपनी सुरक्षा और सम्मान से समझौता नहीं करेगा।

ईरान की सत्ता में क्या चल रहा है?

एक और बड़ा सवाल ईरान की अंदरूनी राजनीति को लेकर भी उठ रहा है। एक हफ्ते पहले सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की हत्या के बाद हालात बदल गए हैं। फिलहाल तीन लोगों की अंतरिम काउंसिल सत्ता चला रही है। इसमें राष्ट्रपति पेजेश्कियन भी शामिल हैं। मगर कई रिपोर्ट कहती हैं कि उन्हें ज्यादा ताकत नहीं दी जा रही। काउंसिल के दूसरे सदस्य ज्यादा सख्त विचारों वाले माने जाते हैं।

आगे मिडिल ईस्ट में क्या होगा?

इस पूरे घटनाक्रम ने मिडिल ईस्ट की राजनीति को और जटिल बना दिया है। एक तरफ ईरान शांति की बात कर रहा है। दूसरी तरफ मिसाइल की खबरें आ रही हैं। इससे पड़ोसी देशों का भरोसा पूरी तरह नहीं बन पाया है। आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में जाएंगे यह कहना मुश्किल है। लेकिन इतना तय है कि यह कहानी अभी खत्म नहीं हुई है। पूरे इलाके की नजर अब तेहरान और खाड़ी के देशों पर टिकी हुई है।

ताजा खबरें

ट्रेंडिंग वीडियो

close alt tag