'जंग के मैदान में ईरान नए पत्ते खोलने को तैयार...', ट्रंप की धमकी पर गालिबाफ का सख्त जवाब

ट्रंप की धमकियों और होर्मुज नाकेबंदी को लेकर ईरान ने सख्त रुख अपनाते हुए साफ कर दिया है कि वह दबाव में बातचीत नहीं करेगा. इस्लामाबाद वार्ता से पहले दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है.

Yogita Pandey
Edited By: Yogita Pandey

नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में जारी तनाव के बीच अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित दूसरे दौर की वार्ता को लेकर अनिश्चितता गहराती जा रही है. इस्लामाबाद में होने वाली इस बातचीत से पहले ही दोनों देशों के बीच बयानबाजी तेज हो गई है, जिससे हालात और संवेदनशील हो गए हैं.

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की चेतावनियों और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी नाकेबंदी से नाराज ईरान ने फिलहाल पाकिस्तान जाने से इनकार कर दिया है. इस बीच ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने ट्रंप को तीखे अंदाज में जवाब देते हुए अपना सख्त रुख साफ कर दिया है.

‘समर्पण की मेज’ नहीं बनेगी वार्ता

गालिबाफ ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अमेरिका के इरादों पर सवाल उठाए. उन्होंने लिखा, "अमेरिका इस्लामाबाद वार्ता को 'समर्पण की मेज' में बदलने की कोशिश कर रहा है. यदि तनाव और बढ़ता है, तो ईरान 'जंग के मैदान में नए पत्ते' खोलने के लिए तैयार है".

सीजफायर उल्लंघन पर ईरान की आपत्ति

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने भी अमेरिकी रुख पर नाराजगी जताई. उन्होंने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से फोन पर बातचीत में कहा कि अमेरिका द्वारा लगातार सीजफायर का उल्लंघन कूटनीतिक प्रक्रिया के रास्ते में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.

अराघची ने कहा कि ईरान सभी पहलुओं पर विचार कर रहा है, लेकिन अभी तक किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा है.

वार्ता में शामिल होने पर संशय बरकरार

इस बीच एक ईरानी अधिकारी ने न्यूज एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि ईरान इस्लामाबाद में होने वाली शांति वार्ता में शामिल होने पर विचार कर रहा है. वहीं, पाकिस्तान के सेना प्रमुख फील्ड मार्शल आसिम मुनीर ने भी ट्रंप से होर्मुज ब्लॉकेड को लेकर बातचीत की है.

सूत्रों के मुताबिक, मुनीर ने ट्रंप से कहा कि अमेरिका की नाकेबंदी ही वार्ता में सबसे बड़ी रुकावट है. हालांकि, ईरानी पक्ष ने स्पष्ट किया है कि अभी इस्लामाबाद वार्ता को लेकर कोई अंतिम फैसला नहीं लिया गया है.

ट्रंप पर दबाव बनाने के आरोप

ईरान के शीर्ष वार्ताकार मोहम्मद बाकर ने डोनाल्ड ट्रंप पर आरोप लगाया कि वे नाकेबंदी और सीजफायर उल्लंघन के जरिए दबाव बनाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने दो टूक कहा कि ईरान किसी भी तरह की धमकियों के तहत बातचीत नहीं करेगा.

ट्रंप का दावा जंग में अमेरिका आगे

इस बीच डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर कहा है कि मौजूदा संघर्ष में अमेरिका बढ़त बनाए हुए है. उन्होंने यह भी संकेत दिया कि ईरान के साथ समझौता होने के बाद ही होर्मुज से अमेरिकी नौसेना अपनी नाकेबंदी हटाएगी.

तेल और बाजार पर असर रोकने की कोशिश

इस्लामाबाद में प्रस्तावित वार्ता के जरिए ट्रंप ऐसा समझौता चाहते हैं, जिससे तेल की कीमतों में उछाल और शेयर बाजार में गिरावट को रोका जा सके. वहीं ईरान की कोशिश है कि होर्मुज पर अपने प्रभाव का इस्तेमाल कर ऐसा समाधान निकाला जाए, जिससे दोबारा युद्ध न भड़के और आर्थिक प्रतिबंधों में राहत मिल सके.

वार्ता पर बढ़ी अनिश्चितता

स्थिति तब और उलझ गई जब खबर सामने आई कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस अभी तक अमेरिका में ही हैं और पाकिस्तान के लिए रवाना नहीं हुए हैं. सूत्रों के अनुसार, ईरान के साथ दूसरे दौर की बातचीत को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं है.

सीजफायर की समय सीमा और सुरक्षा तैयारियां

डोनाल्ड ट्रंप ने 7 अप्रैल को दो सप्ताह के सीजफायर की घोषणा की थी, हालांकि इसकी समाप्ति की सटीक समय सीमा स्पष्ट नहीं थी. पाकिस्तानी सूत्रों के मुताबिक, यह बुधवार रात 8 बजे (ET) समाप्त हो सकता है.

इस बीच पाकिस्तान ने इस्लामाबाद में वार्ता की तैयारियां तेज कर दी हैं. अधिकारियों के अनुसार, सुरक्षा के मद्देनजर करीब 20 हजार सुरक्षाकर्मियों को तैनात किया गया है. हालांकि अब भी यह साफ नहीं है कि यह बातचीत वास्तव में हो पाएगी या नहीं.

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