ईरान का सख्त रुख, अमेरिका को दी चेतावनी‘, 'धमकियों के आगे नहीं झुकेंगे'
ईरान ने अमेरिका को साफ संदेश देते हुए कहा है कि वह धमकियों के आगे बातचीत नहीं करेगा. दोनों देशों के बीच बढ़ते तनाव और तीखी बयानबाजी के बीच हालात और संवेदनशील हो गए हैं.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच तनाव एक बार फिर तेज हो गया है. तेहरान ने साफ कर दिया है कि वह किसी भी तरह के दबाव या धमकियों के तहत बातचीत नहीं करेगा. ईरान के शीर्ष वार्ताकार और संसदीय अध्यक्ष मोहम्मद बाकर ग़ालिबफ़ ने अमेरिकी रुख पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए कूटनीतिक प्रक्रिया पर सवाल खड़े किए हैं.
गालिबफ ने आरोप लगाया कि अमेरिका धमकियों और युद्धविराम उल्लंघनों के जरिए बातचीत को कमजोर कर रहा है. उन्होंने चेतावनी दी कि अगर तनाव बढ़ता है तो ईरान भी जवाब देने के लिए तैयार है, जिससे दोनों देशों के बीच टकराव की आशंका और गहरा गई है.
'आत्मसमर्पण की मेज' में बदल रही बातचीत
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर गालिबफ ने अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन बातचीत को "आत्मसमर्पण की मेज" में बदलने की कोशिश कर रहा है. साथ ही उन्होंने यह भी चेतावनी दी कि यदि हालात और बिगड़ते हैं तो ईरान "युद्ध के मैदान में नए पत्ते उतारने" के लिए तैयार है.
ट्रंप की चेतावनी से बढ़ा तनाव
यह बयान ऐसे समय में आया है जब डोनाल्ड ट्रंप ने संघर्ष विराम की 22 अप्रैल की समय सीमा से पहले कड़ा रुख अपनाया है. मीडिया से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अगर समझौता नहीं हुआ, तो "बहुत सारे बम फटने लगेंगे," जिससे आने वाली वार्ता को लेकर गंभीर संकेत मिले हैं.
ट्रंप ने यह भी कहा कि भले ही दोनों देश बातचीत के लिए सहमत हैं, लेकिन ईरान की भागीदारी को लेकर अभी भी अनिश्चितता बनी हुई है. उन्होंने संकेत दिया कि अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल अपनी ओर से वार्ता प्रक्रिया को आगे बढ़ाएगा.
परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज पर विवाद
दोनों देशों के बीच मतभेद का मुख्य कारण ईरान का परमाणु कार्यक्रम और होर्मुज जलडमरूमध्य में जारी तनाव है. यह इलाका वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति के लिए बेहद अहम माना जाता है. हालांकि फिलहाल अस्थायी युद्धविराम लागू है, लेकिन दोनों पक्षों के बीच भरोसे की कमी साफ नजर आ रही है.
वार्ता में शामिल होने पर अनिश्चितता
ईरानी सरकारी मीडिया ने संकेत दिए हैं कि तेहरान प्रस्तावित वार्ता में हिस्सा नहीं भी ले सकता है. इसके पीछे अमेरिका की कठोर मांगें और असंगत नीतियां बताई जा रही हैं, जिससे कूटनीतिक समाधान की संभावनाएं कमजोर होती दिख रही हैं.
'उत्तेजक कार्रवाइयां' बनीं बड़ी बाधा
ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने पाकिस्तान के विदेश मंत्री इशाक डार से बातचीत में अमेरिकी रुख पर चिंता जताई. उन्होंने कहा कि वाशिंगटन की "उत्तेजक कार्रवाइयां और बार-बार युद्धविराम उल्लंघन" वार्ता में सबसे बड़ी बाधा हैं.
अराघची ने यह भी कहा कि अमेरिका द्वारा ईरानी जहाजों को निशाना बनाए जाने और विरोधाभासी बयानों से हालात और जटिल हो गए हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि ईरान किसी भी निर्णय से पहले "सभी पहलुओं" की समीक्षा करेगा.
गहराता अविश्वास, कमजोर होती बातचीत
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी अमेरिकी दबाव को सिरे से खारिज किया. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच गहरे अविश्वास के चलते सार्थक बातचीत की संभावना कमजोर हो रही है.
उन्होंने X पर लिखा, "प्रतिबद्धताओं का सम्मान करना किसी भी सार्थक संवाद की नींव है," और आरोप लगाया कि अमेरिका विरोधाभासी संकेत भेज रहा है. पेज़ेश्कियन ने कहा कि यह दबाव बनाने की रणनीति है, जिसे ईरान स्वीकार नहीं करेगा.
उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिकी नीतियां एक "कठोर संदेश" देती हैं कि वे ईरान को आत्मसमर्पण के लिए मजबूर करना चाहते हैं, लेकिन ईरानी जनता किसी भी दबाव के आगे नहीं झुकेगी.
बढ़ते तनाव के बीच अनिश्चित भविष्य
संघर्ष विराम की समय सीमा नजदीक आते ही दोनों देशों के बीच स्थिति और संवेदनशील हो गई है. कूटनीतिक प्रयासों के विफल होने की स्थिति में नए सिरे से संघर्ष छिड़ने की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता.


