अमेरिका हमलों से बदली तेहरान सोच क्या अब परमाणु बम की ओर बढ़ेगा

एक महीने से जारी युद्ध ने ईरान की सोच को झकझोर दिया है। अब सवाल उठ रहा है कि क्या अमेरिका के लगातार हमले तेहरान को परमाणु बम बनाने की ओर धकेल रहे हैं। इससे पूरी दुनिया में चिंता बढ़ गई है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

अमेरिका और इजरायल लगातार यह कहते रहे कि उनका मकसद ईरान के परमाणु कार्यक्रम को रोकना है। लेकिन जमीनी हकीकत अब एक अलग कहानी बता रही है। हमलों के बाद हालात ऐसे बने हैं जहां यह सवाल उठ रहा है कि क्या इन हमलों ने खतरे को कम किया है। या फिर उल्टा इसे और ज्यादा बढ़ा दिया है।

तेहरान की सोच में बड़ा बदलाव

एक महीने तक चले इस युद्ध ने ईरान की रणनीति को पूरी तरह बदलकर रख दिया है। पहले जहां संयम की नीति अपनाई जा रही थी। वहीं अब अंदरखाने नई सोच जन्म ले रही है। यह सोच सुरक्षा के लिए परमाणु विकल्प को जरूरी मानने लगी है। यही बदलाव सबसे बड़ा संकेत माना जा रहा है।

पहले क्या था ईरान का रुख

ईरान लंबे समय तक यह कहता रहा कि वह परमाणु बम नहीं बनाना चाहता। धार्मिक आधार पर भी इसे गलत बताया गया था। लेकिन अब हालात बदल चुके हैं। युद्ध के बाद वही पुरानी लाइन कमजोर पड़ती दिख रही है। इससे नीति में बदलाव की संभावना बढ़ गई है।

क्या बम के करीब पहुंच गया ईरान

ईरान के पास पहले से ऐसी तकनीक और संवर्धित यूरेनियम मौजूद है। जिससे परमाणु हथियार बनाया जा सकता है। अब तक उसने खुद को रोके रखा था। लेकिन लगातार हमलों ने उसे उस दिशा में तेजी से सोचने पर मजबूर कर दिया है। इससे यह खतरा और ज्यादा वास्तविक लगता है।

युद्ध ने समीकरण पूरी तरह बदला

इस पूरे संघर्ष ने वह संतुलन तोड़ दिया है। जो सालों से बना हुआ था। सैन्य हमलों ने कार्यक्रम को खत्म करने के बजाय उसे और मजबूत बना दिया है। विशेषज्ञ मानते हैं कि दबाव जितना बढ़ेगा। उतना ही परमाणु कार्यक्रम तेजी से आगे बढ़ेगा।

तेहरान में तेज हुई परमाणु मांग

ईरान के अंदर अब कई प्रभावशाली आवाजें खुलकर परमाणु हथियार के समर्थन में सामने आ रही हैं। यह वही देश है जहां पहले इसे धार्मिक रूप से गलत बताया जाता था। लेकिन अब हालात ऐसे बन रहे हैं। जहां यह मांग खुले मंच पर उठ रही है। नीति बदलने की जमीन तैयार हो रही है।

क्या अमेरिका उल्टा पड़ गया दांव

कई विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका का यह कदम उल्टा पड़ सकता है। क्योंकि दबाव और हमलों ने ईरान को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है। कि बिना परमाणु ताकत के वह खुद को सुरक्षित नहीं रख सकता। यही सोच भविष्य में बड़ा संकट बन सकती है।

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