ईरान-अमेरिका समझौते के बाद भी नहीं थमा तनाव, दक्षिणी लेबनान पर इजरायल के हमले का दावा
ईरान-अमेरिका समझौते के बाद शांति की उम्मीदों के बीच दक्षिणी लेबनान पर इजरायली हमले का दावा किया गया है, जिससे क्षेत्र में तनाव फिर बढ़ गया है. वहीं इजरायल ने साफ किया है कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सेना नहीं हटाएगा और सुरक्षा मामलों में किसी बाहरी समझौते से बंधा नहीं है.

नई दिल्ली: ईरान और अमेरिका के बीच हाल ही में हुए समझौते के बाद क्षेत्र में शांति की उम्मीदें बढ़ी थीं, लेकिन इसके कुछ ही घंटों के भीतर दक्षिणी लेबनान में नए हमलों की खबर सामने आई है. ईरानी सरकारी समाचार एजेंसी IRIB ने लेबनान स्थित अपने सूत्रों के हवाले से दावा किया है कि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान के कई इलाकों को निशाना बनाया है.
तोपखाने से गोलाबारी
रिपोर्ट के अनुसार, जवतार, मरकबा और खियाम क्षेत्रों में हवाई हमलों के साथ-साथ तोपखाने से भी गोलाबारी की गई. हालांकि इन हमलों में किसी के घायल या मारे जाने की तत्काल पुष्टि नहीं हुई है. स्थानीय प्रशासन और लेबनानी मीडिया स्थिति पर लगातार नजर बनाए हुए हैं.
यह घटनाक्रम ऐसे समय सामने आया है जब क्षेत्र में संघर्ष विराम बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रयास जारी हैं. बावजूद इसके, इजरायल-लेबनान सीमा पर तनाव कम होता दिखाई नहीं दे रहा है. दक्षिणी लेबनान के अधिकारियों ने उन लोगों को भी सतर्क रहने की सलाह दी है, जो पिछले महीनों में संघर्ष के कारण अपने घर छोड़ने पर मजबूर हुए थे. प्रशासन ने कहा है कि सुरक्षा स्थिति पूरी तरह सामान्य होने तक जल्दबाजी में घर लौटने से बचना चाहिए.
सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच हुए समझौते के बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उम्मीद जताई थी कि समझौते के लागू होने के साथ ही लेबनान सहित विभिन्न मोर्चों पर हिंसा और गोलीबारी में कमी आएगी. हालांकि IRIB की रिपोर्ट के अनुसार, दक्षिणी लेबनान में हुए ताजा हमले इस उम्मीद के विपरीत संकेत दे रहे हैं.
दूसरी ओर, इजरायल ने स्पष्ट किया है कि वह दक्षिणी लेबनान से अपनी सैन्य मौजूदगी समाप्त करने या कब्जे वाले क्षेत्रों को छोड़ने के पक्ष में नहीं है. इजरायली अधिकारियों का कहना है कि सुरक्षा कारणों से उनकी रणनीति में फिलहाल कोई बदलाव नहीं किया जाएगा.
संघर्ष का मानवीय प्रभाव काफी गंभीर
लेबनान में जारी संघर्ष का मानवीय प्रभाव भी काफी गंभीर रहा है. विभिन्न रिपोर्टों के मुताबिक, लंबे समय से चल रही हिंसा के कारण बड़ी संख्या में लोगों की जान गई है और लाखों नागरिकों को अपने घर छोड़ने पड़े हैं. इजरायल का कहना है कि उसके सैन्य अभियानों का लक्ष्य ईरान समर्थित हिज्बुल्लाह के ठिकाने हैं.
इसी बीच इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री बेन-ग्विर ने कहा है कि अमेरिका की मध्यस्थता से हुए किसी भी समझौते को इजरायल पर बाध्यकारी नहीं माना जा सकता. उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल एक स्वतंत्र और संप्रभु राष्ट्र है तथा अपनी सुरक्षा से जुड़े फैसले स्वयं लेने में सक्षम है.


