सन्नाटे में रंगों की आहट, जंग के साए में इजरायल ने मनाया पुरिम का त्योहार

इजरायल में इस बार त्योहार और तनाव साथ-साथ खड़े दिखे। सड़कों पर शोर नहीं था। घरों में धीमी आवाजें थीं। लोग जश्न भी मना रहे थे और सायरन भी सुन रहे थे। यही इस साल का सच है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

तेल अवीव का डिजेंगॉफ स्क्वायर आम दिनों में पुरिम पर भर जाता है। इस बार वहां खालीपन था। दुकानें बंद थीं। कैफे आधे खुले थे। लोग जल्दी-जल्दी चलते दिखे। हर चेहरे पर हल्की चिंता थी। त्योहार का दिन था, लेकिन माहौल जश्न वाला नहीं था। रंगों की जगह सायरन की आवाज गूंज रही थी।

क्या शेल्टर बने उत्सव स्थल?

इस बार कई लोगों ने त्योहार शेल्टर में मनाया। कार पार्किंग के नीचे बने सुरक्षित कमरों में बच्चे रंगीन कपड़े पहने दिखे। कुछ ने मास्क लगाए। कुछ ने हल्की-फुल्की मिठाई बांटी। ऊपर शहर में खामोशी थी। नीचे लोग एक-दूसरे को हिम्मत दे रहे थे। त्योहार छोटा था, लेकिन भावना पूरी थी।

क्या सायरन बन गया नया संगीत?

पुरिम पर आमतौर पर तेज संगीत बजता है। इस बार सायरन ने जगह ले ली। फोन पर अलर्ट आते रहे। लोग सेकंड गिनते रहे। जैसे ही चेतावनी मिलती, सब शेल्टर की ओर दौड़ते। यह अब नया रुटीन बन गया है। डर कम दिखता है, तैयारी ज्यादा दिखती है।

क्या जंग ने बदल दी आदतें?

7 अक्टूबर 2023 के बाद से हालात बदले हैं। हमास के हमले के बाद इजरायल लगातार हमलों का सामना कर रहा है। गाजा, लेबनान और अब ईरान से भी खतरा बढ़ा है। लोग अब तैयार रहते हैं। बैग पैक रहता है। पावर बैंक चार्ज रहता है। बच्चों को भी पता है कि सायरन का मतलब क्या है।

क्या डर अब सामान्य हो गया?

स्थानीय लोग कहते हैं कि घबराहट पहले जैसी नहीं रही। जून 2025 में ईरान के साथ तनाव बढ़ा था। तब हालात ज्यादा कठिन थे। अब लोग शांत रहते हैं। वे जानते हैं कि कुछ सेकंड मिलते हैं। उसी में नीचे जाना है। शायद यही ‘न्यू नॉर्मल’ है।

क्या जनता ऑपरेशन के साथ?

तेल अवीव में हुए एक सर्वे में ज्यादातर लोगों ने ईरान को बड़ी सुरक्षा चुनौती माना। कई लोगों का मानना है कि देश को अपनी सुरक्षा के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए। अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बयानों के बाद भी तनाव बढ़ा। लोगों को लगा कि टकराव टलने वाला नहीं है।

क्या फिर लौटेंगे खुले जश्न?

पुरिम आमतौर पर रंग, संगीत और मस्ती का त्योहार है। यह होली जैसा ही माना जाता है। तारीख भी करीब-करीब वही रहती है। इस बार जश्न सीमित रहा। लेकिन उम्मीद खत्म नहीं हुई। लोग कहते हैं कि अगली बार स्क्वायर फिर भरेगा। रंग फिर उड़ेंगे। अभी शेल्टर में जो हंसी है, वही आगे खुली सड़कों तक जाएगी।

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