Italy protests: इटली के कई शहरों में सोमवार को गाजा में इजरायली हमले और प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी की सरकार द्वारा फिलिस्तीन को राज्य का दर्जा न देने के खिलाफ हजारों लोगों ने सड़कों पर उतरकर जबरदस्त विरोध प्रदर्शन किया. देशव्यापी हड़ताल 'लेट्स ब्लॉक एवरीथिंग' के तहत आयोजित इन प्रदर्शनों में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच भीषण झड़पें हुईं. जिनमें 60 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हुए और 10 से अधिक लोगों को गिरफ्तार किया गया. प्रदर्शनकारियों का यह गुस्सा इटली सरकार की फिलिस्तीन पर मौन नीति और गाजा में इजरायल की सैन्य कार्रवाई को लेकर था. प्रदर्शनकारियों ने देश के कई बंदरगाहों को भी बंद कर दिया है जिससे आयुध और आपूर्ति सामग्री के इजरायल भेजे जाने की संभावनाओं को रोकने का प्रयास किया गया.
मिलान के सेंट्रल स्टेशन पर हालात सबसे ज्यादा बिगड़ गए हैं. जहां प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर कुर्सियां फेंकी और खिड़कियों को पोल से तोड़ दिया. पुलिस को हालात काबू में लाने के लिए आंसू गैस का सहारा लेना पड़ा. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार हिंसा में दर्जनों पुलिसकर्मी घायल हुए हैं. जिसके बाद प्रधानमंत्री मेलोनी ने इन घटनाओं को शर्मनाक बताते हुए X पर लिखा कि मिलान से आ रही तस्वीरें निंदनीय हैं. खुद को 'प्रो-पैलेस्टाइन', 'एंटीफा' और 'शांति समर्थक' कहने वाले लोग ट्रेन स्टेशन में तोड़फोड़ कर रहे हैं और पुलिस से भिड़ रहे हैं. यह हिंसा फिलिस्तीनियों की मदद नहीं करेगी लेकिन इटली के आम नागरिकों को इसकी कीमत चुकानी पड़ेगी.
वेनिस बंदरगाह पर प्रदर्शनकारियों को हटाने के लिए पुलिस को वॉटर कैनन का इस्तेमाल करना पड़ा. जेनोआ, लिवोर्नो और ट्रिएस्टे जैसे बंदरगाहों पर भी डॉकवर्कर्स ने विरोध प्रदर्शन किया. बोलोग्ना में प्रदर्शनकारियों ने हाइवे को बंद किया जिससे यातायात रुका और पुलिस को एक बार फिर वॉटर कैनन की मदद लेनी पड़ी. नेपल्स में भी प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन के अंदर घुस गए और कुछ देर के लिए रेलवे ट्रैक पर भी कब्जा कर लिया, जिससे ट्रेन सेवाएं भी बाधित हुईं. रोम में हजारों प्रदर्शनकारी रेलवे स्टेशन के बाहर जमा हुए और इसके बाद शहर की मुख्य रिंग रोड को जाम कर दिया. प्रदर्शनकारियों के हाथों में Free Palestine और Let’s Block Everything जैसे स्लोगन लिखी तख्तियां थीं.
हालांकि इटली ने हाल ही में संयुक्त राष्ट्र में फिलिस्तीन को राज्य मान्यता देने के पक्ष में मतदान किया था लेकिन प्रधानमंत्री मेलोनी ने अभी तक आधिकारिक मान्यता देने से इनकार किया है. उन्होंने संसद में इजरायल पर अपनी स्थिति को भी स्पष्ट नहीं किया जिससे विपक्षी दलों में नाराजगी है. जेनोआ के पोर्ट वर्कर्स कलेक्टिव से जुड़े एक प्रदर्शनकारी रिकी ने कहा कि फिलिस्तीनी लोग हमें गरिमा और प्रतिरोध की नई परिभाषा दे रहे हैं. हम उनसे सीखते हैं और अपना योगदान देने की कोशिश कर रहे हैं.
इटली में यह विरोध ऐसे समय में हुआ जब फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने सोमवार को फिलिस्तीन को औपचारिक रूप से राज्य के रूप में मान्यता दी. उन्होंने इसे राजनीतिक प्रक्रिया की शुरुआत और सभी के लिए शांति और सुरक्षा की दिशा में कदम बताया.
इससे पहले स्पेन, नॉर्वे, कनाडा, पुर्तगाल, ऑस्ट्रेलिया और यूनाइटेड किंगडम जैसे देश भी फिलिस्तीन को मान्यता दे चुके हैं. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस फैसले की आलोचना करते हुए कहा कि यह हमास को इनाम देने जैसा है. गाजा में जारी युद्ध ने अब तक 65,000 से अधिक फिलिस्तीनियों की जान ले ली है और यह लड़ाई अगले महीने दो साल पूरे कर लेगी. First Updated : Tuesday, 23 September 2025