ट्रंप और शी जिनपिंग की मुलाकात में हुए अहम फैसले, होर्मुज जलमार्ग खुला रहने पर बनी सहमति

बीजिंग में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अहम बैठक के बाद अमेरिका और चीन ने होर्मुज जलमार्ग खुले रहने पर सहमति जताई है.

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Edited By: JBT Desk

नई दिल्ली: बीजिंग में गुरुवार को अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई अहम बैठक के बाद अमेरिका और चीन ने कई वैश्विक मुद्दों पर साझा सहमति जताई गई है. फरवरी में ईरान युद्ध शुरू होने के बाद दोनों नेताओं की यह पहली आमने-सामने की मुलाकात थी, जिसे वैश्विक राजनीति और ऊर्जा सुरक्षा के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा था. वहीं जानकारी के अनुसार, बैठक में खास तौर पर होर्मुज जलमार्ग, ईरान के परमाणु कार्यक्रम और दोनों देशों के आर्थिक संबंधों पर चर्चा हुई है.

ईरान को लेकर लिया बड़ा फैसला 

व्हाइट हाउस के अनुसार, दोनों देशों ने इस बात पर सहमति जताई कि ईरान के तट के पास स्थित होर्मुज जलमार्ग वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति के लिए खुला रहना चाहिए. यह समुद्री मार्ग दुनिया में कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की लगभग 20 प्रतिशत आपूर्ति का प्रमुख रास्ता माना जाता है. बैठक में इस बात पर भी जोर दिया गया कि ईरान को किसी भी स्थिति में परमाणु हथियार हासिल नहीं करने दिए जाएंगे.

आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी हुई चर्चा 

वार्ता के दौरान अमेरिका और चीन के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी चर्चा हुई. व्हाइट हाउस ने बताया कि बैठक में अमेरिकी कंपनियों के कई बड़े प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया. दोनों नेताओं ने चीन में अमेरिकी कंपनियों की बाजार पहुंच बढ़ाने और विभिन्न क्षेत्रों में चीनी निवेश को प्रोत्साहित करने के उपायों पर विचार किया. इसके साथ ही अमेरिका में फेंटानिल प्रीकर्सर के प्रवाह को रोकने और अमेरिकी कृषि उत्पादों की चीनी खरीद बढ़ाने पर भी सहमति जताई गई है.

चीनी राष्ट्रपति ने क्या कहा 

चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि दोनों देश रणनीतिक स्थिरता पर आधारित एक नए दृष्टिकोण के तहत संबंधों को आगे बढ़ाने पर सहमत हुए हैं. उन्होंने कहा कि यह ढांचा केवल चीन और अमेरिका ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया के लिए लाभकारी साबित हो सकता है. हालांकि बैठक के दौरान ताइवान का मुद्दा भी प्रमुखता से उठा. 

शी जिनपिंग ने अमेरिका को चेतावनी देते हुए कहा कि ताइवान चीन-अमेरिका संबंधों का सबसे संवेदनशील विषय है और इस मामले में किसी भी गलत कदम से तनाव बढ़ सकता है. चीन ने एक बार फिर अमेरिका से ताइवान से जुड़े मामलों में सावधानी बरतने की अपील की. बता दें, चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है, जबकि अमेरिका लंबे समय से ताइवान के साथ अनौपचारिक संबंध बनाए हुए है और उसे सैन्य सहायता भी देता रहा है.

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