ट्रंप की टैरिफ नीति पर कोर्ट का बड़ा वार, 10% शुल्क को बताया गैरकानूनी

अदालत ने सरकार को बड़ा झटका देते हुए आदेश दिया है कि 5 दिनों के अंदर फैसले को लागू किया जाए. साथ ही उन सभी आयातकों को टैक्स की रकम लौटाई जाए, जिन्होंने यह भुगतान किया था. इस फैसले से कारोबारियों को बड़ी राहत मिलने की उम्मीद बढ़ गई है.

Goldi Rai
Edited By: Goldi Rai

अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को एक बार फिर अदालत में बड़ा झटका लगा है. अमेरिकी व्यापार अदालत ने ट्रंप प्रशासन द्वारा लागू किए गए 10% वैश्विक आयात शुल्क को अवैध घोषित करते हुए रद्द कर दिया. अदालत ने साफ कहा कि 1970 के दशक के व्यापार कानून का हवाला देकर लगाए गए ये टैरिफ कानूनी रूप से उचित नहीं थे.

यह फैसला ऐसे समय आया है जब ट्रंप प्रशासन अपनी व्यापार नीति को लेकर लगातार कानूनी चुनौतियों का सामना कर रहा है. 24 फरवरी को दुनिया भर से अमेरिका आने वाले सामानों पर लगाए गए इस नए आयात शुल्क के खिलाफ 24 राज्यों और कई छोटे व्यापारियों ने अदालत का दरवाजा खटखटाया था.

अदालत ने ट्रंप प्रशासन की दलील खारिज की

मामले की सुनवाई करते हुए अंतर्राष्ट्रीय व्यापार अदालत ने 2-1 के बहुमत से फैसला सुनाया. अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति ने 1974 के व्यापार कानून की धारा 122 का गलत तरीके से इस्तेमाल किया है. राज्यों की ओर से दायर याचिका में कहा गया था कि ट्रंप प्रशासन ने यह कदम सुप्रीम कोर्ट के उस फैसले से बचने के लिए उठाया, जिसमें 2025 में लगाए गए पुराने भारी टैरिफ को असंवैधानिक बताते हुए रद्द कर दिया गया था.

क्या कहती है धारा 122?

अदालत ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि धारा 122 के तहत राष्ट्रपति केवल विशेष परिस्थितियों में ही शुल्क लगा सकते हैं. यह प्रावधान तब लागू होता है जब देश गंभीर भुगतान संतुलन घाटे का सामना कर रहा हो या डॉलर की कीमत में भारी गिरावट रोकने की आवश्यकता हो.

अदालत ने सरकार को निर्देश दिया है कि वह पांच दिनों के भीतर इस फैसले का पालन करे और जिन आयातकों ने यह टैक्स चुकाया है, उन्हें राशि वापस लौटाए.

स्टील, एल्युमीनियम और ऑटो सेक्टर पर असर नहीं

फैसले में यह भी स्पष्ट किया गया कि स्टील, एल्युमीनियम और ऑटोमोबाइल सेक्टर पर लगाए गए टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे. अदालत ने कहा कि ये शुल्क इस कानूनी चुनौती और सुप्रीम कोर्ट के पिछले फैसले के दायरे में शामिल नहीं हैं.

ट्रंप प्रशासन ने क्या दी दलील?

ट्रंप प्रशासन ने अदालत में अपने फैसले का बचाव करते हुए कहा था कि अमेरिका का वार्षिक व्यापार घाटा 1.2 ट्रिलियन डॉलर तक पहुंच चुका है और चालू खाता घाटा देश की जीडीपी का 4% हो गया है. हालांकि, अर्थशास्त्रियों और विशेषज्ञों ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि अमेरिका किसी भुगतान संतुलन संकट से नहीं गुजर रहा है. ऐसे में इन आयात शुल्कों का कोई मजबूत कानूनी आधार नहीं बनता.

अब आगे क्या होगा?

इस फैसले के बाद अमेरिकी न्याय विभाग यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स में चुनौती दे सकता है. फिलहाल ये 10% वैश्विक टैरिफ 24 जुलाई तक लागू रहने वाले थे, लेकिन अदालत के इस फैसले ने ट्रंप प्रशासन की व्यापारिक रणनीति को बड़ा झटका दिया है.

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