ईरान-अमेरिका के बीच बड़ी डील, नाकेबंदी हटाएगा US बदले में खुलेगा होर्मुज स्ट्रेट

मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच एक ड्राफ्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने और बदले में ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने की बात कही गई है. 

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नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच ईरान और अमेरिका के हालात सामान्य होने की उम्मीद बढ़ती नजर आ रही है. बता दें, हाल ही में एक बड़ी खबर सामने आई है, जिसमें ईरान के सरकारी टीवी चैनल ने दावा किया है कि दोनों देशों के बीच संघर्ष कम करने को लेकर एक शुरुआती नॉन ऑफिशियल ड्राफ्ट तैयार किया गया है. इस ड्राफ्ट के अनुसार, अमेरिका द्वारा ईरान की नौसैनिक नाकेबंदी खत्म करने और बदले में ईरान द्वारा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को दोबारा पूरी तरह खोलने की बात कही गई है. 

समझौते में क्या हो सकता है फैसला 

रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान को अमेरिका के साथ संभावित समझौते यानी MOU (मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग) का एक शुरुआती ड्राफ्ट मिला है. इस ड्राफ्ट में कहा गया है कि अगर दोनों पक्ष सहमत होते हैं तो ईरान एक महीने के भीतर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से गुजरने वाले व्यावसायिक जहाजों की आवाजाही को युद्ध से पहले वाले स्तर तक बहाल कर देगा। वहीं इसके बदले अमेरिका ईरान के आसपास तैनात अपनी अतिरिक्त सैन्य टुकड़ियों को हटाएगा और समुद्री नाकेबंदी को समाप्त कर देगा.

क्या है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज 

बता दें, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है. यहीं वजह है कि वैश्विक तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में इस मार्ग के खुलने की खबर अंतरराष्ट्रीय बाजार और तेल व्यापार के लिए भी बेहद अहम मानी जा रही है. ऐसा इसलिए क्योंकि लंबे समय से इस क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के कारण वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति पर काफी असर देखने को मिल रहा है. वहीं इस कारण कई देशों में तेल के दाम भी बढ़ा दिए गए है. 

अंतिम सहमति का इंतजार 

हालांकि ईरानी सरकारी मीडिया ने यह भी स्पष्ट किया है कि ड्राफ्ट में युद्धपोतों की तैनाती से जुड़े मुद्दों पर अभी अंतिम सहमति नहीं बनी है. इसके अलावा ओमान के साथ मिलकर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही के मैनेजमेंट को लेकर भी बातचीत जारी है. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि ईरान किसी भी समझौते पर अमल करने से पहले ठोस और विश्वसनीय सत्यापन चाहता है. तेहरान का कहना है कि जब तक अमेरिका अपने कदमों को व्यवहारिक रूप से साबित नहीं करता, तब तक ईरान कोई बड़ा फैसला नहीं लेगा. फिलहाल दोनों देशों के बीच जारी यह बातचीत वैश्विक राजनीति में एक महत्वपूर्ण फैसले के तौर पर देखी जा रही है.  First Updated : Wednesday, 27 May 2026