होर्मुज जलमार्ग बंद होते ही भड़का युद्ध! अमेरिका ने ईरान के 140 ठिकानों पर बरसाए हमले, UAE-कतर पर दागीं मिसाइलें
होर्मुज जलमार्ग बंद करने की ईरान की घोषणा के बाद अमेरिका ने उसके करीब 140 सैन्य ठिकानों पर हमला किया. जवाब में ईरान ने UAE, कतर, बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ गया.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है. होर्मुज जलमार्ग को बंद करने की ईरान की घोषणा के बाद अमेरिका ने बड़े पैमाने पर जवाबी सैन्य कार्रवाई की. अमेरिकी सेना ने ईरान के करीब 140 सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया. इसके जवाब में ईरान ने संयुक्त अरब अमीरात (UAE), कतर, बहरीन और कुवैत की ओर मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे पूरे खाड़ी क्षेत्र में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया.
होर्मुज जलमार्ग बंद होने से बढ़ा तनाव
ईरान ने दावा किया कि कुछ जहाज उसके निर्देशों का पालन नहीं कर रहे थे. इसके बाद रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज जलडमरूमध्य को अगली सूचना तक बंद करने का ऐलान किया. यह जलमार्ग दुनिया में तेल और गैस की आपूर्ति के लिए सबसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों में गिना जाता है. इसके बंद होने से वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है.
अमेरिका का बड़ा सैन्य अभियान
जलमार्ग बंद होने और एक मालवाहक जहाज पर कथित हमले के बाद अमेरिका ने व्यापक सैन्य कार्रवाई शुरू की. अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) के अनुसार, अभियान के दौरान मिसाइल ठिकानों, ड्रोन बेस, नौसैनिक सुविधाओं, हथियार भंडार, संचार नेटवर्क और तटीय निगरानी केंद्रों सहित लगभग 140 ठिकानों को निशाना बनाया गया. अमेरिका का कहना है कि इस कार्रवाई का उद्देश्य समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
ईरान ने खाड़ी देशों पर किया जवाबी हमला
अमेरिकी हमलों के कुछ घंटे बाद ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में जवाबी कार्रवाई शुरू कर दी. संयुक्त अरब अमीरात, कतर, बहरीन और कुवैत में मिसाइल हमले की चेतावनी जारी की गई. कई जगहों पर धमाकों की आवाजें सुनी गईं, जबकि हवाई रक्षा प्रणालियों को सक्रिय कर मिसाइलों और ड्रोन को रोकने की कोशिश की गई. सुरक्षा एजेंसियों ने लोगों से सतर्क रहने और सुरक्षित स्थानों पर जाने की अपील की.
युद्धविराम पर गहराया संकट
हालिया घटनाक्रम ने पहले से चल रहे युद्धविराम प्रयासों को भी झटका दिया है. कुछ सप्ताह पहले दोनों देशों के बीच संघर्ष कम करने की दिशा में बातचीत हुई थी, लेकिन अब हालात फिर से बिगड़ते दिखाई दे रहे हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि यदि तनाव इसी तरह बढ़ता रहा तो इसका असर न केवल मध्य पूर्व बल्कि वैश्विक तेल आपूर्ति और अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर भी पड़ सकता है. फिलहाल पूरे क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हैं और दुनिया की नजरें इस बात पर टिकी हैं कि आने वाले दिनों में हालात किस दिशा में बढ़ते हैं.


