तेहरान एयरपोर्ट पर इजरायल का बड़ा हमला, खामेनेई के विमान को नष्ट करने का दावा
इजरायल ने दावा किया है कि उसकी वायु सेना ने तेहरान के मेहराबाद एयरपोर्ट पर हमला कर ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली खामेनेई के इस्तेमाल वाले विमान को नष्ट कर दिया, जिससे ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय समन्वय क्षमता को झटका लगा है.

नई दिल्ली: मध्य पूर्व में जारी तनाव के बीच इजरायल ने एक बड़ा सैन्य दावा किया है. इजरायली वायु सेना ने कहा है कि उसने तेहरान के मेहराबाद हवाई अड्डे पर एक विशेष विमान को निशाना बनाकर नष्ट कर दिया. इजरायल का कहना है कि यह विमान ईरान के पूर्व सर्वोच्च नेता अली हुसैनी खामेनेई और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तेमाल में आता था. इस कार्रवाई को ईरान की सैन्य और क्षेत्रीय समन्वय क्षमता पर एक बड़ा झटका बताया जा रहा है. इजरायल रक्षा बलों (आईडीएफ) के अनुसार, यह विमान केवल यात्रा के लिए ही नहीं बल्कि कई महत्वपूर्ण कामों में इस्तेमाल किया जाता था.
חיל-האוויר השמיד את מטוסו של מנהיג משטר הטרור האיראני בשדה התעופה ״מהאראבד״ שבטהרן - המטוס שימש את עלי ח׳אמנהאי, מנהיג משטר הטרור האיראני, בכירים נוספים ממשטר הטרור וגורמים בצבא איראן, לקידום רכש צבאי ולניהול קשרים עם מדינות הציר באמצעות טיסות פנים וחוץ.
— Israeli Air Force (@IAFsite) March 16, 2026
השמדת המטוס פוגעת… pic.twitter.com/lOtRRIHTff
इजरायली सेना का कहना है कि इसके जरिए ईरानी अधिकारी घरेलू और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर यात्राएं करते थे और सहयोगी देशों के साथ संपर्क बनाए रखते थे. आईडीएफ ने अपने बयान में कहा कि इस विमान का उपयोग सैन्य उपकरणों की खरीद से जुड़े कामों को आगे बढ़ाने और सहयोगी समूहों के साथ तालमेल बनाए रखने के लिए किया जाता था. ऐसे में इस विमान को नष्ट करना ईरान की रणनीतिक क्षमताओं को कमजोर करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.
ईरान के सहयोगी नेटवर्क पर असर
इजरायल का कहना है कि इस हमले से ईरान के नेतृत्व और उसके सहयोगी देशों या समूहों के बीच समन्वय स्थापित करने की क्षमता प्रभावित होगी. इससे ईरान के सैन्य ढांचे को मजबूत करने और उसकी रणनीतिक योजनाओं को लागू करने में भी मुश्किलें आ सकती हैं. इजरायली अधिकारियों का मानना है कि इस कार्रवाई का असर क्षेत्र में सक्रिय ईरान समर्थित संगठनों पर भी पड़ सकता है.
मेहराबाद एयरपोर्ट पर पहले भी हमले
रिपोर्टों के अनुसार, यह पहली बार नहीं है जब मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे को निशाना बनाया गया है. इससे पहले भी इसी महीने इजरायली वायु सेना ने यहां मौजूद कई विमानों पर हमला किया था. बताया गया कि उस कार्रवाई में करीब 16 विमानों को नष्ट कर दिया गया था. इजरायली सेना का दावा है कि इन विमानों का इस्तेमाल ईरान की इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स की कुद्स फोर्स द्वारा किया जाता था.
हथियार और नकदी पहुंचाने का आरोप
इजरायल के अनुसार, इन विमानों के जरिए हथियार और धनराशि क्षेत्र के विभिन्न समूहों तक पहुंचाई जाती थी. विशेष रूप से लेबनान में सक्रिय हिज्बुल्लाह जैसे संगठनों तक संसाधन पहुंचाने में इनका इस्तेमाल होने का आरोप लगाया गया है. इजरायली सेना का यह भी कहना है कि ईरान ने इन विमानों को पहचान से बचाने के लिए उन्हें ऐसे स्थानों पर छिपाने की कोशिश की थी जहां आमतौर पर सेवा से बाहर हो चुके विमान रखे जाते हैं. इससे उन्हें ढूंढना और निशाना बनाना कठिन हो सके.
बढ़ता क्षेत्रीय संघर्ष
पश्चिम एशिया में हाल के दिनों में तनाव लगातार बढ़ता जा रहा है. फरवरी के अंत में अमेरिका और इजरायल के संयुक्त हमलों के बाद स्थिति और ज्यादा गंभीर हो गई थी. इसके बाद ईरान ने भी जवाबी कार्रवाई करते हुए कई स्थानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए. इन घटनाओं के कारण पूरे खाड़ी क्षेत्र में अस्थिरता बढ़ गई है और कई देशों की सुरक्षा एजेंसियां सतर्क हो गई हैं.
इस बढ़ते संघर्ष का असर सिर्फ क्षेत्रीय राजनीति तक सीमित नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा बाजार पर भी इसका प्रभाव पड़ रहा है. खास तौर पर होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास हालात तनावपूर्ण बने हुए हैं. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है. दुनिया के कुल तेल परिवहन का लगभग पांचवां हिस्सा इसी रास्ते से होकर गुजरता है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की बाधा अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकती है.


