भारत से कोरिया तक फैला 10,000 KM लंबा विशाल बादल, इन देशों में झमाझम बारिश का अलर्ट जारी

एशिया के वायुमंडल में एक अभूतपूर्व और विशाल मौसम प्रणाली देखने को मिली है. ताजा उपग्रह तस्वीरों में उत्तर भारत, हिमालयी पट्टी और चीन से लेकर दक्षिण कोरिया तक फैली 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी बादलों की एक विशाल पट्टी देखी गई है.

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नई दिल्ली: एशिया के वायुमंडल में एक अभूतपूर्व और विशाल मौसम प्रणाली देखने को मिली है. ताजा उपग्रह तस्वीरों में उत्तर भारत, हिमालयी पट्टी और चीन से लेकर दक्षिण कोरिया तक फैली 7,000 से 10,000 किलोमीटर लंबी बादलों की एक विशाल पट्टी देखी गई है. मौसम विज्ञानियों ने इसे मौजूदा दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन का सबसे उग्र और सक्रिय दौर बताया है। हिंद महासागर से उठने वाली नमी से भरी हवाएं जब मध्य और पूर्वी एशियाई मौसम प्रणालियों से मिलीं, तो महाद्वीप के ऊपर बारिश का एक अटूट गलियारा बन गया.

दो दिनों में सामान्य से 180% ज्यादा वर्षा

दो दिनों में सामान्य से 180% ज्यादा वर्षा हुई है. इस मानसूनी घेरे का सीधा असर भारत के मैदानी और पर्वतीय इलाकों में व्यापक बारिश के रूप में दिख रहा है. बीते 48 घंटों के दौरान देश में औसतन 170 से 180 प्रतिशत तक दैनिक बारिश दर्ज की गई है, जो इस पूरे सीजन का सबसे बड़ा आंकड़ा है. मौसम विशेषज्ञों ने इस स्थिति को इस साल का सबसे बड़ा मासिव मानसून डे करार दिया है. उपग्रह से ली गई तस्वीरों में घने मानसूनी बादलों की मोटी परत देश के मध्य, उत्तरी और पूर्वी हिस्सों पर छाई हुई है. हवा के कम दबाव वाले क्षेत्र के लंबे समय तक एक ही जगह टिके रहने के कारण नमी से भरी हवाएं तेजी से ऊपर उठीं और सघन बादलों में बदलकर पूरे क्षेत्र में बरस रही हैं.

कृषि के लिए संजीवनी

मौसम विभाग के अनुसार यह सक्रिय दौर इस पूरे हफ्ते बना रहेगा. इससे देश के प्रमुख बांधों और जलाशयों में जलस्तर तेज़ी से बढ़ेगा, जिससे खरीफ फसलों की बुआई और बढ़त को भारी फायदा पहुंचेगा. यह घटना साबित करती है कि भारतीय मानसून केवल एक क्षेत्रीय मौसमी बदलाव नहीं, बल्कि पूरे एशियाई महाद्वीप के पर्यावरण को प्रभावित करने वाला एक बड़ा चक्र है.

पहाड़ों पर भूस्खलन की चेतावनी

पहाड़ों पर भूस्खलन की चेतावनी जारी की गई है. शुरुआती हफ्तों में बारिश की कमी झेल रहे राज्यों के लिए यह मौसमी दौर बड़ी राहत लेकर आया है. पंजाब, हरियाणा, दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान में लगातार पानी गिर रहा है. वहीं, बंगाल की खाड़ी से उठे कम दबाव के क्षेत्र के कारण पूर्वी और पूर्वोत्तर राज्यों में भी तेज बौछारें पड़ रही हैं. इस भारी बारिश ने पहाड़ी क्षेत्रों में चिंता भी बढ़ा दी है. उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश में नदियों में उफान और जमीन धंसने का खतरा बढ़ गया है. निचले इलाकों में शहरों में जलभराव और अचानक बाढ़ को लेकर अलर्ट जारी किया गया है. First Updated : Thursday, 23 July 2026