नई दिल्ली: मिडिल ईस्ट में ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने हालात को और गंभीर बना दिया है. क्षेत्र में सैन्य गतिविधियां तेज हो गई हैं और अमेरिका ने अपनी मौजूदगी को बड़े स्तर पर बढ़ाते हुए हजारों सैनिक तैनात कर दिए हैं. मौजूदा हालात यह संकेत दे रहे हैं कि संघर्ष अब और व्यापक रूप ले सकता है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, अमेरिका ने 3500 से ज्यादा सैनिक मिडिल ईस्ट में तैनात किए हैं. इसी के साथ आधुनिक युद्धपोत USS Tripoli भी अपने ऑपरेशनल जोन में पहुंच चुका है, जिससे क्षेत्र में सैन्य संतुलन और अधिक संवेदनशील हो गया है.
अमेरिकी युद्धपोत USS Tripoli अत्याधुनिक क्षमताओं से लैस है. इस पर करीब 2500 मरीन सैनिक तैनात हैं और यह F-35 स्टील्थ फाइटर जेट और ओस्प्रे जैसे एडवांस एयरक्राफ्ट को संचालित करने में सक्षम है.
इस युद्धपोत को पहले जापान में तैनात किया गया था, लेकिन लगभग दो हफ्ते पहले इसे मिडिल ईस्ट के लिए रवाना किया गया. इसके अलावा USS Boxer और सैन डिएगो से अन्य नौसैनिक यूनिट्स को भी क्षेत्र में भेजा जा रहा है.
अमेरिकी सेंट्रल कमांड के मुताबिक, 28 फरवरी से चल रहे ऑपरेशन एपिक फ्यूरी के तहत अब तक 11,000 से अधिक ठिकानों को निशाना बनाया जा चुका है. इससे स्पष्ट है कि यह संघर्ष बड़े स्तर पर जारी है और इसकी तीव्रता लगातार बढ़ रही है.
तनाव उस समय और बढ़ गया जब ईरान ने सऊदी अरब के प्रिंस सुल्तान एयर बेस पर बैलिस्टिक मिसाइल और ड्रोन से हमला किया. इस हमले में कम से कम 10 अमेरिकी सैनिक घायल हुए हैं, जिससे हालात और ज्यादा गंभीर हो गए हैं.
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने कहा है कि "अमेरिका बिना जमीनी सैनिक उतारे अपने लक्ष्य हासिल करना चाहता है." हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि "राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को बदलते हालात के लिए तैयार रहना होगा."
इस बयान से साफ है कि अमेरिका फिलहाल जमीनी युद्ध से बचते हुए रणनीतिक तरीके से आगे बढ़ना चाहता है.
स्थिति तब और जटिल हो गई जब यमन के हूती विद्रोहियों ने भी इस संघर्ष में शामिल होने का दावा किया. हूती समूह ने इजरायल की ओर मिसाइल दागने की बात कही है, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है.
इससे बाब-अल-मंडेब स्ट्रेट और स्वेज नहर जैसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों पर खतरा मंडराने लगा है.
इस बढ़ते संघर्ष का असर अब अंतरराष्ट्रीय व्यापार और हवाई मार्गों पर भी दिखाई देने लगा है. कई देशों को वैकल्पिक रास्तों की तलाश करनी पड़ रही है क्योंकि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज लगभग बंद हो चुका है.
तनाव कम करने के लिए किए जा रहे कूटनीतिक प्रयास फिलहाल सफल नहीं हो पाए हैं. अमेरिका की ओर से दूत स्टीव विटकॉफ ने सीजफायर का प्रस्ताव दिया था, जिसमें ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर रोक और समुद्री मार्ग खोलने की बात शामिल थी.
हालांकि ईरान ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया और बदले में मुआवजे और अपनी संप्रभुता की मान्यता की मांग रखी. First Updated : Sunday, 29 March 2026