Syria Clashes: सीरिया के तटीय प्रांत लताकिया में शुक्रवार को घातक झड़पों में 70 से अधिक लोग मारे गए जबकि दर्जनों घायल हो गए. यह हिंसा उस समय भड़क उठी जब अपदस्थ राष्ट्रपति बशर अल-असद के समर्थक बंदूकधारी सुरक्षा चौकियों पर हमले करने लगे. जवाबी कार्रवाई में सीरियाई सुरक्षा बलों ने हेलीकॉप्टर से बमबारी की. इस झड़प के कई फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे हैं.
सीरियन ऑब्जर्वेटरी फॉर ह्यूमन राइट्स (SOHR) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस खूनी झड़प में सुरक्षाकर्मियों और असद समर्थक लड़ाकों के बीच हिंसक मुठभेड़ हुई. इस संघर्ष के दौरान कई हमलावरों को पकड़ लिया गया, जबकि कुछ गंभीर रूप से घायल हुए. लताकिया के जबलेह क्षेत्र में जारी इस हिंसा ने सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े कर दिए हैं.
SOHR के अनुसार, हिंसा तब शुरू हुई जब असद शासन के पूर्व कमांडर सुहैल अल-हसन से जुड़े लड़ाकों ने सुरक्षा बलों की गश्त और चौकियों पर हमला किया. इस हमले के जवाब में, सरकारी सुरक्षा बलों ने लताकिया के एक गांव पर हेलीकॉप्टर से हमला किया. इससे पहले की रिपोर्टों में मृतकों की संख्या 48 बताई गई थी, लेकिन बाद में यह आंकड़ा 70 से अधिक पहुंच गया.
लताकिया में जारी हिंसा के मद्देनजर, सरकारी बलों ने जबलेह और उसके आसपास सुरक्षा कड़ी कर दी है. सीरियाई सुरक्षा निदेशक लेफ्टिनेंट कर्नल मुस्तफा कुनैफती ने बताया, "लताकिया के ग्रामीण इलाकों में असद समर्थक हथियारबंद लड़ाके हमारे सुरक्षा बलों से भिड़ रहे थे. ये वही लोग हैं जो सीरियाई जनता के खिलाफ जघन्य अपराधों में शामिल थे."
इस बीच, रिपोर्टों में दावा किया जा रहा है कि अलावी समुदाय के नेताओं ने सरकार पर हेलीकॉप्टर हमलों के दौरान शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाने का आरोप लगाया है. बता दें कि असद शासन के दौरान अलावी समुदाय उनके मुख्य समर्थकों में शामिल था, लेकिन उनके पतन के बाद यह समुदाय असमंजस में है.
दिसंबर 2024 में विद्रोहियों द्वारा असद की सत्ता से बेदखली के बाद से सीरिया में अस्थिरता बनी हुई है. इस्लामिक विद्रोही गुट हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व में विद्रोहियों ने असद के 24 साल के शासन और असद परिवार के पांच दशक लंबे शासनकाल को समाप्त कर दिया.
विद्रोहियों के बढ़ते प्रभाव को देखते हुए असद ने देश से भागने का निर्णय लिया. एक विपक्षी नेता हादी अल-बहरा ने खुलासा किया, "असद ने अपनी मॉस्को यात्रा के दौरान अपने सहयोगियों से कहा था कि रूस से सैन्य सहायता मिलने वाली है, लेकिन वह झूठ बोल रहा था. उसे जो संदेश मिला, वह पूरी तरह नकारात्मक था." जब असद की सरकार गिरी, तो सुरक्षाबलों ने अपने ठिकाने छोड़ दिए, जिससे विद्रोहियों को दमिश्क पर कब्ज़ा करने का अवसर मिला. उनके भाई माहेर और अन्य प्रमुख अधिकारी भी भाग गए, जबकि कुछ को विद्रोहियों ने निशाना बनाया. First Updated : Friday, 07 March 2025