नई दिल्ली: पश्चिम एशिया में जारी भारी तनाव और सैन्य हलचलों के बीच एक बड़ी कूटनीतिक गतिविधि सामने आई है. इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू सोमवार को वाशिंगटन की यात्रा पर रवाना हो रहे हैं, जहां वे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात करेंगे. यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब वाशिंगटन और तेहरान के बीच रुकी हुई बातचीत के बाद अमेरिकी सेनाएं ईरानी ठिकानों पर लगातार सैन्य हमले कर रही हैं.
वाशिंगटन में शीर्ष नेताओं की बैठक
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने व्हाइट हाउस कॉरेस्पोंडेंट्स एसोसिएशन के वार्षिक रात्रिभोज के दौरान इस बहुप्रतीक्षित मुलाकात का खुलासा किया. उन्होंने सार्वजनिक रूप से पुष्टि की कि इजरायली प्रधानमंत्री आने वाले दिनों में अमेरिका पहुंचेंगे और द्विपक्षीय वार्ताओं का हिस्सा बनेंगे.
कूटनीतिक पृष्ठभूमि और हाल की फोन वार्ता
यह बैठक दोनों नेताओं के बीच कुछ हफ्ते पहले हुई फोन पर बातचीत के सिलसिले को आगे बढ़ाएगी. उस दौरान नेतन्याहू ने अमेरिका की स्थापना की 250वीं वर्षगांठ पर राष्ट्रपति ट्रंप को हार्दिक बधाई दी थी और दोनों देशों के बीच ऐतिहासिक और मजबूत रणनीतिक संबंधों की सराहना की थी.
ईरान समझौता और बढ़ता तनाव
नेतन्याहू का यह दौरा अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच गहराते त्रिकोणीय तनाव की पृष्ठभूमि में हो रहा है. हाल ही में अमेरिका और ईरान द्वारा हस्ताक्षरित सहमति पत्र से जुड़ा युद्धविराम पूरी तरह विफल हो चुका है. इजरायल इस समझौते का शुरुआत से ही कड़ा विरोध करता आ रहा था. इसके साथ ही, लेबनान क्षेत्र में इजरायल के जारी सैन्य अभियानों ने मध्य पूर्व में शांति के कूटनीतिक प्रयासों को और जटिल बना दिया है.
लेबनान सीमा पर वार्ताएं
दूसरी ओर, ट्रंप प्रशासन मध्य पूर्व में हिंसा रोकने के लिए इजरायल और लेबनान के साथ अलग-अलग स्तर की समानांतर बातचीत चला रहा है. इन वार्ताओं से सशस्त्र संगठन हिजबुल्लाह को पूरी तरह अलग रखा गया है. प्राथमिक वार्ताओं के अनुसार, दोनों पक्ष इस बात पर सैद्धांतिक रूप से सहमत हुए हैं कि दक्षिणी लेबनान के इजरायली नियंत्रण वाले क्षेत्रों को चरणबद्ध तरीके से लेबनानी सशस्त्र बलों को सौंप दिया जाएगा. अब पूरी दुनिया की नजरें कल वाशिंगटन में होने वाली इस उच्च स्तरीय बैठक पर टिकी हैं. जिससे मध्य पूर्व के भावी युद्ध और शांति की दिशा तय होने की संभावना है. First Updated : Sunday, 26 July 2026