नई दिल्ली: 12 फरवरी 2026 की तारीख बांग्लादेश की राजनीति में एक ऐतिहासिक मोड़ के रूप में दर्ज हो गई. आम चुनावों में भारी बहुमत के साथ सत्ता परिवर्तन के अलावा, देश की शासन प्रणाली में व्यापक बदलाव के पक्ष में भी जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है.
तारिक रहमान के नेतृत्व वाली बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) गठबंधन ने 297 में से 210 सीटों पर जीत हासिल की. इसके साथ ही हुए जनमत संग्रह में 70 प्रतिशत मतदाताओं ने भारत जैसी संसदीय व्यवस्था अपनाने के पक्ष में मतदान किया.
चुनाव आयोग द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जनमत संग्रह में 60.26 प्रतिशत मतदान दर्ज किया गया. सुधार पैकेज के समर्थन में 4,80,74,429 वोट पड़े, जबकि विरोध में 2,25,65,627 मत मिले. आयोग के वरिष्ठ सचिव अख्तर अहमद ने बताया कि जनता ने देश के पुनर्गठन के पक्ष में अपनी स्पष्ट सहमति दे दी है.
यह चुनाव केवल सत्ता परिवर्तन तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसे शासन व्यवस्था में संरचनात्मक बदलाव के लिए राष्ट्रीय जनमत संग्रह के रूप में भी देखा गया.
'जुलाई चार्टर 2025' एक व्यापक सुधार दस्तावेज है, जिसे अगस्त 2024 में तत्कालीन प्रधानमंत्री Sheikh Hasina को सत्ता से हटाने वाले छात्र-नेतृत्व वाले आंदोलन के बाद तैयार किया गया था.
इस चार्टर का उद्देश्य सत्ता के अत्यधिक केंद्रीकरण को रोकना और राज्य की प्रमुख संस्थाओं का पुनर्गठन करना है, ताकि भविष्य में तानाशाही या फासीवादी शासन की पुनरावृत्ति न हो. इसमें कुल 84 सुधार बिंदु शामिल हैं, जिन पर अमल के लिए 270 कार्य दिवसों के भीतर एक संवैधानिक सुधार परिषद काम करेगी.
सत्ता के लंबे केंद्रीकरण को रोकने के लिए प्रधानमंत्री पद के लिए सख्त कार्यकाल सीमा निर्धारित करने का प्रस्ताव.
100 सीटों वाले नए उच्च सदन के गठन का प्रस्ताव, जिसकी सीटें राष्ट्रीय वोट शेयर के आधार पर आवंटित होंगी. भारत की तरह दो सदन वाली संसदीय व्यवस्था को संतुलन का आधार माना गया है.
प्रधानमंत्री कार्यालय की शक्तियों में कटौती और राष्ट्रपति की भूमिका को अधिक सशक्त बनाने का सुझाव.
न्यायपालिका एवं अन्य प्रमुख संस्थाओं को राजनीतिक प्रभाव से मुक्त रखने के उपाय.
संसदीय समितियों के नेतृत्व और डिप्टी स्पीकर जैसे पदों पर विपक्ष को भूमिका देने का प्रावधान.
आंदोलन में शामिल प्रतिभागियों को, जिन्हें “जुलाई सेनानी” कहा गया है, विशेष सुरक्षा प्रदान करने का प्रस्ताव.
संसद में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कदम.
यह तीसरा अवसर है जब बांग्लादेश में व्यापक सुधारों का चार्टर सामने आया है. अब नई सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौती इन प्रस्तावों को प्रभावी ढंग से लागू करना और राजनीतिक अस्थिरता के दौर के बाद देश को स्थिरता की दिशा में ले जाना है. First Updated : Saturday, 14 February 2026