वाशिंगटन: अमेरिकी सेना ने शनिवार को अपने सहयोगी देशों के साथ मिलकर सीरिया में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के ठिकानों पर व्यापक हवाई हमले किए. अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने इस सैन्य कार्रवाई की पुष्टि करते हुए कहा कि यह हमला पिछले महीने हुए उस आतंकी हमले के जवाब में किया गया है, जिसमें तीन अमेरिकी नागरिकों की मौत हो गई थी. यह अभियान राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के आदेश पर चलाए जा रहे एक विशेष सैन्य अभियान का हिस्सा है.
बता दें कि 13 दिसंबर 2025 को सीरिया के ऐतिहासिक शहर पलमायरा के पास ISIS ने अमेरिकी और स्थानीय सुरक्षा बलों पर अचानक हमला किया था. इस हमले में अमेरिका के आयोवा राज्य से ताल्लुक रखने वाले दो जवानों की जान चली गई थी. इसके अलावा, एक नागरिक दुभाषिए की भी मौत हुई थी, जो सैन्य अभियान में सहायता कर रहे थे. इस हमले में कई अन्य अमेरिकी सैनिक घायल भी हुए थे, जिनका इलाज सैन्य अस्पतालों में किया गया.
अमेरिका का सख्त संदेश
हवाई हमलों के बाद जारी बयान में अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने साफ शब्दों में चेतावनी दी. बयान में कहा गया कि जो भी अमेरिकी सैनिकों या नागरिकों को नुकसान पहुंचाने की कोशिश करेगा, उसे छोड़ा नहीं जाएगा. अमेरिका ने यह भी स्पष्ट किया कि वह अपने दुश्मनों को दुनिया के किसी भी हिस्से में ढूंढकर जवाब देने की क्षमता रखता है.
सैन्य अधिकारियों ने बताया कि इन हमलों का उद्देश्य केवल बदला लेना नहीं, बल्कि भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना और क्षेत्र में तैनात अमेरिकी तथा सहयोगी बलों की सुरक्षा सुनिश्चित करना है.
लगातार बढ़ा ऑपरेशन का दायरा
यह सैन्य अभियान दिसंबर के मध्य में शुरू किया गया था. पहले चरण में ही मध्य सीरिया में ISIS के कई ठिकानों को निशाना बनाया गया था. शनिवार को हुआ हमला उसी अभियान का अगला हिस्सा है, जिसमें आतंकियों के ठिकानों, हथियार भंडारों और उनके ठहरने की जगहों को निशाना बनाया गया. इस अभियान में अमेरिका के साथ जॉर्डन सहित कई मित्र देश भी शामिल हैं, जो लंबे समय से ISIS के खिलाफ लड़ाई में अमेरिका का साथ दे रहे हैं.
ISIS के लिए हालात मुश्किल
इन हवाई हमलों से एक दिन पहले ही सीरियाई सुरक्षा बलों ने ISIS के एक बड़े सैन्य नेता को गिरफ्तार करने का दावा किया था. माना जा रहा है कि यह व्यक्ति संगठन की कई बड़ी गतिविधियों की योजना बना रहा था. एक तरफ नेतृत्व की गिरफ्तारी और दूसरी तरफ लगातार हो रहे हवाई हमले, ISIS के लिए बड़ा झटका माने जा रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि इससे संगठन की ताकत और संचालन क्षमता पर गहरा असर पड़ेगा. First Updated : Sunday, 11 January 2026