नई दिल्ली: रिटायर्ड अमेरिकी कर्नल डगलस मैकग्रेगर ने हाल ही में साफ कहा है कि पाकिस्तान ईरान-इजरायल तनाव में मध्यस्थ की भूमिका नहीं निभा सकता. उन्होंने इसे मजाकिया तरीके से समझाया कि पाकिस्तान खुद एक बड़ी समस्या है. ANI से बात करते हुए उन्होंने कहा, “पाकिस्तान की मदद की पेशकश वैसी है जैसे कोई व्यक्ति खुद जलती इमारत में फंसा हो और आपको रहने का कमरा देने की बात करे.”
उन्होंने आगे जोड़ा कि इजरायली पक्ष पाकिस्तान को निष्पक्ष नहीं मानेंगे, बल्कि उसे समस्या का हिस्सा ही समझेंगे. इसलिए इस्लामाबाद की कोई भी पेशकश भरोसे की लायक नहीं होगी.
कर्नल मैकग्रेगर ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ करते हुए कहा कि वे ही वास्तव में मदद, समर्थन और सहायता दे सकते हैं. उनकी राय में भारत अब एक बड़ी शक्ति बन चुका है और मोदी के संबंध इजरायल, ईरान, रूस तथा चीन सभी के साथ संतुलित है.
उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी ऐसी स्थिति में हैं कि वे सच्ची मदद कर सकते हैं.” इससे पहले टकर कार्लसन को दिए इंटरव्यू में भी उन्होंने सुझाव दिया था कि अमेरिका को ईरान युद्ध रोकने के लिए मोदी जैसे मध्यस्थ से संपर्क करना चाहिए.
मैकग्रेगर ने ईरान को रणनीतिक सहायता पर भी बात की. उन्होंने दावा किया कि रूसी और चीनी उपग्रह ईरान को महत्वपूर्ण तस्वीरें (इमेजरी) उपलब्ध करा रहे हैं, जिनका इस्तेमाल लंबी दूरी की बैलिस्टिक मिसाइलों में किया जा रहा है. उन्होंने अमेरिका में कुछ लोगों को इजरायली एजेंट मानने की भी चर्चा की.
डगलस मैकग्रेगर अमेरिकी सेना के अनुभवी अधिकारी हैं. उन्होंने 1991 के खाड़ी युद्ध में हिस्सा लिया और बाद में रक्षा मंत्री के सलाहकार के रूप में काम किया. वे लेखक और रक्षा विशेषज्ञ के रूप में भी जाने जाते हैं. विदेश नीति और भू-राजनीति पर उनकी राय अक्सर चर्चा में रहती है.
बता दें, पश्चिम एशिया में तनाव चरम पर है. कई देश शांति की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन भरोसा और वैश्विक छवि अब कूटनीति का बड़ा हिस्सा बन गई है. मैकग्रेगर के विचार व्यक्तिगत हो सकते हैं, लेकिन ये दिखाते हैं कि मध्यस्थता केवल बातचीत नहीं, बल्कि विश्वसनीयता की परीक्षा भी है. First Updated : Thursday, 26 March 2026