नई दिल्ली: पाकिस्तान में क्रिप्टो इंडस्ट्री को बढ़ावा देने की सरकार की कोशिश को बड़ा झटका लगा है। कराची के दारुल उलूम के प्रमुख मुफ्ती मोहम्मद तकी उस्मानी ने क्रिप्टोकरेंसी को 'हराम' घोषित कर दिया है। इस फतवे से ट्रंप परिवार की कंपनी WLF की पाकिस्तान डील भी फंसती नजर आ रही है।
दारुल उलूम कराची के प्रमुख इस्लामी विद्वान मुफ्ती तकी उस्मानी ने बिटकॉइन, एथेरियम, USDT यानी Tether समेत सभी स्टेबलकॉइन और ब्लॉकचेन टोकन को शरीयत के हिसाब से नाजायज बताया। मदरसे का कहना है कि ये डिजिटल संपत्तियां इस्लाम की नजर में 'धन या संपत्ति' की परिभाषा पर खरी नहीं उतरतीं। इसलिए इनकी खरीद-बिक्री जायज नहीं है।
फतवे में साफ लिखा है कि क्रिप्टोकरेंसी, वर्चुअल करेंसी या स्टेबलकॉइन — नाम बदलने से हुक्म नहीं बदलेगा। इस फतवे का समर्थन कई अन्य उलेमा ने भी किया है। पाकिस्तान में दारुल उलूम कराची को सबसे सम्मानित सुन्नी संस्थान माना जाता है और बड़ी आबादी इसके फतवों को मानती है।
ये फतवा ऐसे समय आया है जब पाकिस्तान सरकार ट्रंप परिवार की क्रिप्टो कंपनी World Liberty Financial के साथ मिलकर डिजिटल एसेट सेक्टर खड़ा करने की कोशिश कर रही थी। जनवरी 2026 में WLF की सहयोगी कंपनी SC Financial Technologies ने पाकिस्तान के साथ MoU साइन किया था।
इसके तहत WLF का डॉलर-पेग्ड स्टेबलकॉइन USD1 को क्रॉस-बॉर्डर पेमेंट में इस्तेमाल करना था। डील पर WLF के CEO जैक विटकॉफ ने इस्लामाबाद में PM शहबाज शरीफ, आर्मी चीफ आसिम मुनीर और वित्त मंत्री की मौजूदगी में साइन किए थे।
ट्रंप परिवार की कंपनी ने 2025 में सिर्फ टोकन सेल्स से 500 मिलियन डॉलर से ज्यादा कमाए थे। पाकिस्तान को गवर्नमेंट पार्टनर बनाकर WLF अपनी वैधता और मार्केट बढ़ाना चाहती थी। अब USD1 भी 'हराम' की लिस्ट में आ गया, तो लोकल इस्तेमाल मुश्किल हो जाएगा।
पिछले साल सरकार ने क्रिप्टो एक्सचेंजों को लाइसेंस देने और ब्लॉकचेन को फाइनेंशियल सिस्टम में जोड़ने के लिए PVARA यानी पाकिस्तान वर्चुअल एसेट्स रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने का ऐलान किया था।
बिटकॉइन माइनिंग के लिए बिजली भी आवंटित की गई। सरकार का तर्क था कि इससे विदेशी निवेश आएगा, रुपया मजबूत होगा और युवाओं को रोजगार मिलेगा। लेकिन धार्मिक लॉबी शुरू से इसे "इस्लाम के खिलाफ" बता रही थी।
फतवा कानूनी तौर पर बाध्यकारी नहीं है, लेकिन पाकिस्तान में मजहबी फतवों का असर गहरा होता है। लाखों लोग अब क्रिप्टो ट्रेडिंग को हराम समझकर इससे दूर रह सकते हैं।
ट्रंप प्रशासन के लिए ये डील सिर्फ बिजनेस नहीं डिप्लोमेसी भी थी। पाकिस्तान ने ट्रंप को नोबेल पीस प्राइज के लिए नॉमिनेट किया था। अगर अब क्रिप्टो अडॉप्शन रुका तो WLF की ग्रोथ और ट्रंप की कमाई का 'पाकिस्तान कार्ड' दोनों कमजोर पड़ सकते हैं। First Updated : Saturday, 11 July 2026