ट्रंप की दहलीज़ पर झुके पाकिस्तान को IMF का अरबों डॉलर इनाम, कंगाल मुल्क फिर दिवालिया होने से बच निकला

आर्थिक संकट से जूझ रहे पाकिस्तान को एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय राहत मिल गई है। इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड यानी International Monetary Fund ने पाकिस्तान को 1.32 अरब डॉलर का नया वित्तीय पैकेज जारी किया है। इस मदद के बाद शहबाज शरीफ सरकार ने राहत की सांस ली है और देश के विदेशी मुद्रा भंडार को बड़ा सहारा मिला है।

Lalit Sharma
Edited By: Lalit Sharma

कभी अमेरिका को आंख दिखाने वाला पाकिस्तान आज उसी वॉशिंगटन की चौखट पर खड़ा दिखाई दे रहा है। IMF का ये 1.32 अरब डॉलर सिर्फ कर्ज नहीं, बल्कि उस मजबूरी की कहानी है जिसने पूरे मुल्क को गिरवी जैसा बना दिया है। शहबाज़ सरकार इसे बड़ी कामयाबी बता रही है, लेकिन सवाल ये है कि आखिर कब तक पाकिस्तान उधार की ऑक्सीजन पर जिंदा रहेगा? ट्रंप से नजदीकियां बढ़ीं और IMF का खजाना खुल गया, इसलिए अब इस मदद पर सवाल भी उठ रहे हैं। आम पाकिस्तानी महंगाई, बेरोजगारी और टूटती अर्थव्यवस्था से परेशान है, जबकि सत्ता इसे राहत का पैगाम बता रही है। हर कुछ महीनों में बेलआउट पैकेज लेने वाला पाकिस्तान क्या सच में आर्थिक सुधार कर रहा है या सिर्फ दुनिया को भरोसा दिलाने की कोशिश? सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये अरबों डॉलर पाकिस्तान को संभालेंगे या फिर कुछ महीनों बाद वही दिवालियेपन का डर लौट आएगा।

पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक ने जानकारी दी कि IMF के एग्जीक्यूटिव बोर्ड ने एक्सटेंडेड फंड फैसिलिटी यानी EFF की तीसरी समीक्षा पूरी करने के बाद नई किश्त जारी कर दी है। इस पैकेज में करीब 1.1 अरब डॉलर EFF कार्यक्रम के तहत दिए गए हैं, जबकि लगभग 220 मिलियन डॉलर रेजिलियंस एंड सस्टेनेबिलिटी फैसिलिटी यानी RSF के तहत मंजूर किए गए हैं। पाकिस्तान के लिए यह रकम ऐसे समय आई है जब देश लगातार आर्थिक दबाव, बढ़ती महंगाई और विदेशी कर्ज के संकट से जूझ रहा है।

विदेशी मुद्रा भंडार को मिला सहारा

State Bank of Pakistan के मुताबिक IMF से मिली यह राशि 15 मई 2026 तक के विदेशी मुद्रा भंडार में दिखाई देगी। आर्थिक विशेषज्ञों का मानना है कि इस मदद से पाकिस्तान के डॉलर रिजर्व को मजबूती मिलेगी और आयात भुगतान का दबाव कुछ कम हो सकेगा। पिछले कई महीनों से पाकिस्तान विदेशी मुद्रा की भारी कमी का सामना कर रहा था, जिसके चलते पेट्रोलियम, दवाइयों और जरूरी सामानों के आयात पर असर पड़ा था।

शहबाज सरकार ने बताया भरोसे का संकेत

शहबाज शरीफ सरकार ने IMF की मंजूरी को अपनी आर्थिक नीतियों पर भरोसे का संकेत बताया है। पाकिस्तान के उप-प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री इशाक डार ने कहा कि यह किश्त सरकार द्वारा उठाए गए आर्थिक सुधारों और सख्त फैसलों पर IMF के विश्वास को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि सरकार टैक्स सुधार, राजस्व बढ़ाने और सरकारी संस्थानों में सुधार जैसे कदम उठा रही है।

37 महीने का बड़ा समझौता

IMF ने सितंबर 2024 में पाकिस्तान के लिए 37 महीने की अवधि वाला 7 अरब डॉलर का विस्तारित निधि कार्यक्रम मंजूर किया था। इस योजना का मकसद पाकिस्तान की कमजोर अर्थव्यवस्था को स्थिर करना, विदेशी निवेश को बढ़ाना और आर्थिक सुधार लागू करना बताया गया था। इसके अलावा जलवायु संकट और प्राकृतिक आपदाओं से निपटने के लिए RSF के तहत 1.4 अरब डॉलर का अलग फंड भी तय किया गया था। दोनों योजनाओं को मिलाकर कुल वित्तीय सहायता 8.4 अरब डॉलर तक पहुंचती है।

बार-बार क्यों लेनी पड़ रही मदद

पाकिस्तान कई वर्षों से आर्थिक अस्थिरता का सामना कर रहा है। बढ़ता विदेशी कर्ज, कमजोर निर्यात, राजनीतिक अस्थिरता और घटता विदेशी निवेश देश की अर्थव्यवस्था पर लगातार दबाव डाल रहे हैं। हालात इतने खराब हो गए थे कि कई बार पाकिस्तान के दिवालिया होने की आशंका जताई गई। IMF की मदद के बिना पाकिस्तान के लिए अंतरराष्ट्रीय भुगतान करना मुश्किल माना जा रहा था। यही वजह है कि हर कुछ समय बाद उसे नए बेलआउट पैकेज की जरूरत पड़ती है।

ट्रंप से रिश्तों की भी चर्चा तेज

पाकिस्तान को IMF से मिली राहत के बाद अंतरराष्ट्रीय राजनीति में भी चर्चाएं तेज हो गई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिका और पश्चिमी देशों के साथ बेहतर संबंध बनाने की कोशिश पाकिस्तान के लिए फायदेमंद साबित हो रही है। खासतौर पर Donald Trump के करीबी माने जाने वाले कुछ कूटनीतिक संकेतों को लेकर भी चर्चा हो रही है। हालांकि IMF आधिकारिक तौर पर आर्थिक शर्तों और सुधारों के आधार पर ही फैसले लेने की बात कहता है।

महंगाई और बेरोजगारी बनी बड़ी चुनौती

हालांकि IMF से मिली राहत के बावजूद पाकिस्तान की आम जनता की मुश्किलें अभी खत्म नहीं हुई हैं। देश में महंगाई लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई है। बिजली, गैस और खाने-पीने की चीजों की कीमतें लगातार बढ़ रही हैं। IMF की शर्तों के तहत पाकिस्तान सरकार को सब्सिडी घटानी पड़ रही है और टैक्स बढ़ाने पड़ रहे हैं। इसका सीधा असर आम लोगों की जेब पर पड़ रहा है। बेरोजगारी और आर्थिक मंदी भी सरकार के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है।

अब तक मिल चुकी है भारी रकम

नई किश्त जारी होने के बाद पाकिस्तान अब तक IMF कार्यक्रम के तहत करीब 4.5 अरब डॉलर हासिल कर चुका है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इससे पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 17 अरब डॉलर के पार पहुंच सकता है। आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यह राहत फिलहाल अस्थायी है और पाकिस्तान को लंबे समय तक स्थिरता के लिए बड़े आर्थिक सुधार करने होंगे। केवल विदेशी कर्ज और बेलआउट पैकेज के सहारे अर्थव्यवस्था को लगातार संभालना आसान नहीं होगा।

दुनिया की नजर पाकिस्तान पर

IMF की नई मदद के बाद पूरी दुनिया की नजर अब पाकिस्तान की आर्थिक नीतियों पर टिकी हुई है। अगर सरकार सुधारों को सही तरीके से लागू करती है तो हालात कुछ बेहतर हो सकते हैं। लेकिन अगर राजनीतिक अस्थिरता और आर्थिक दबाव इसी तरह जारी रहे तो आने वाले समय में पाकिस्तान को फिर नए संकट का सामना करना पड़ सकता है। फिलहाल IMF की यह मदद पाकिस्तान के लिए बड़ी राहत और राजनीतिक तौर पर शहबाज सरकार के लिए अहम उपलब्धि मानी जा रही है।

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