लिंडसे ग्राहम के बयान से मचा बवाल, ट्रंप ने ईरान वार्ता में पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका का किया समर्थन
अमेरिका-ईरान युद्धविराम के बीच पाकिस्तान की भूमिका पर बड़ा विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने पाकिस्तान पर अविश्वास जताया, जबकि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने इस्लामाबाद का बचाव करते हुए उसे "शानदार मध्यस्थ” बताया. ईरानी विमानों को पाकिस्तानी ठिकानों के इस्तेमाल की रिपोर्टों ने मामले को और गर्मा दिया है.

नई दिल्ली: अमेरिका और ईरान के बीच जारी नाजुक युद्धविराम के बीच पाकिस्तान की भूमिका को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है. अमेरिकी सीनेटर लिंडसे ग्राहम द्वारा पाकिस्तान पर अविश्वास जताने वाली टिप्पणी के बाद सोशल मीडिया और राजनीतिक गलियारों में तीखी बहस शुरू हो गई है. ग्राहम ने सवाल उठाया कि क्या पाकिस्तान वास्तव में निष्पक्ष मध्यस्थ की भूमिका निभा रहा है.
वहीं दूसरी ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान का खुलकर बचाव किया है. ट्रंप ने पाकिस्तान की मध्यस्थ भूमिका की तारीफ करते हुए कहा कि इस्लामाबाद ने अब तक “बेहतरीन” काम किया है और अमेरिका फिलहाल किसी दूसरे मध्यस्थ की तलाश नहीं कर रहा.
सीनेट सुनवाई में पाकिस्तान पर उठे सवाल
सीनेट विनियोग समिति की सुनवाई के दौरान सीनेटर लिंडसे ग्राहम ने अमेरिकी रक्षा सचिव पीट हेगसेथ और ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के अध्यक्ष जनरल डैन केन से उन रिपोर्टों पर सवाल किए, जिनमें दावा किया गया था कि ईरानी विमान पाकिस्तानी क्षेत्र से संचालित हो रहे थे.
ग्राहम ने पूछा कि अगर ये रिपोर्ट सही हैं, तो क्या पाकिस्तान की यह भूमिका “निष्पक्ष मध्यस्थ” की छवि के अनुरूप मानी जा सकती है. हालांकि जनरल केन ने इस पर कोई स्पष्ट जवाब नहीं दिया.
'मुझे पाकिस्तान पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है'
रक्षा सचिव पीट हेगसेथ ने इस मुद्दे पर टिप्पणी करने से बचते हुए कहा कि वह “चल रही बातचीत के बीच में नहीं पड़ना चाहेंगे.” इसके बाद ग्राहम ने खुलकर पाकिस्तान पर अविश्वास जताया.
उन्होंने कहा, 'मुझे पाकिस्तान पर बिलकुल भी भरोसा नहीं है. अगर उन्होंने वाकई ईरानी सैन्य संपत्तियों की रक्षा के लिए पाकिस्तानी ठिकानों पर ईरानी विमान तैनात कर रखे हैं, तो इससे मुझे लगता है कि हमें मध्यस्थता के लिए किसी और की तलाश करनी चाहिए.'
ग्राहम ने आगे कहा, 'इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि यह मामला कहीं नहीं जा रहा है,' और युद्धविराम वार्ताओं को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की.
रिपोर्ट में पाकिस्तानी एयरबेस का दावा
यह विवाद उस रिपोर्ट के बाद और बढ़ गया, जिसमें दावा किया गया था कि पाकिस्तान ने ईरानी विमानों को नूर खान एयरबेस समेत अपने कुछ सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल करने की अनुमति दी थी. रिपोर्ट में अमेरिकी अधिकारियों के हवाले से कहा गया कि ऐसा अमेरिकी हमलों से ईरानी संपत्तियों को बचाने के उद्देश्य से किया गया हो सकता है.
सुनवाई से एक दिन पहले ग्राहम ने X पर भी इसी मुद्दे को उठाते हुए कहा था कि वाशिंगटन को ईरान के साथ शांति वार्ता के लिए किसी अन्य मध्यस्थ पर विचार करना चाहिए.
उन्होंने लिखा, "यदि यह रिपोर्टिंग सटीक है, तो ईरान, संयुक्त राज्य अमेरिका और अन्य पक्षों के बीच मध्यस्थ के रूप में पाकिस्तान द्वारा निभाई जा रही भूमिका का पूरी तरह से पुनर्मूल्यांकन करना आवश्यक होगा."
इसके साथ ही ग्राहम ने कहा, "इजराइल के प्रति पाकिस्तानी रक्षा अधिकारियों के कुछ पूर्व बयानों को देखते हुए, अगर यह सच होता है तो मुझे आश्चर्य नहीं होगा."
पाकिस्तान ने आरोपों को बताया भ्रामक
पाकिस्तान ने इन सभी आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है. विदेश कार्यालय की ओर से जारी बयान में इन रिपोर्टों को "भ्रामक और सनसनीखेज" बताया गया.
इस्लामाबाद का कहना है कि संबंधित विमान अमेरिका और ईरान के बीच शुरुआती बातचीत के बाद हुए युद्धविराम के दौरान वहां पहुंचे थे और इन दावों में कोई सच्चाई नहीं है.
ट्रंप ने पाकिस्तान की खुलकर की तारीफ
चीन यात्रा पर रवाना होने से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पाकिस्तान और उसकी मध्यस्थ भूमिका का समर्थन किया. व्हाइट हाउस से निकलते समय पत्रकारों से बातचीत में ट्रंप ने कहा कि अमेरिका फिलहाल किसी अन्य मध्यस्थ की तलाश नहीं कर रहा.
ट्रंप ने कहा, "वे शानदार हैं. मुझे लगता है कि पाकिस्तानी बहुत अच्छे रहे हैं. Pakistan के फील्ड मार्शल और प्रधानमंत्री बिल्कुल शानदार रहे हैं."
अमेरिका-ईरान वार्ता पर अब भी बना गतिरोध
अमेरिका और ईरान के बीच शांति वार्ता फिलहाल ठप पड़ी हुई है. डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान के हालिया प्रस्ताव को “बेकार की बात” बताते हुए खारिज कर दिया.
ट्रंप ने कहा कि युद्धविराम इस समय "जीवन रक्षक यंत्र” पर है और ईरान का प्रस्ताव "पूरी तरह से अस्वीकार्य और कमजोर" है.
वहीं ईरान ने भी चेतावनी दी है कि वह अमेरिका की किसी भी नई आक्रामकता का जवाब देने के लिए तैयार है. तेहरान ने वाशिंगटन से युद्धविराम को लेकर “एकतरफा रवैया” छोड़ने और संघर्ष खत्म करने की दिशा में गंभीर कदम उठाने की अपील की है.


