PM Modi Convoy: प्रधानमंत्री ने आधा किया अपना काफिला, सरकारी खर्चों में कटौती का दिया बड़ा संदेश
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए अपने एसपीजी काफिले का आकार आधा करने का निर्देश दिया है. साथ ही सरकारी विभागों को भी अनावश्यक खर्च कम करने के उपाय सुझाने के लिए कहा गया है. पीएम मोदी की इस पहल को मितव्ययिता और आर्थिक अनुशासन का बड़ा संदेश माना जा रहा है.

नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सरकारी खर्चों में कटौती और मितव्ययिता को बढ़ावा देने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. सूत्रों के मुताबिक, प्रधानमंत्री ने अपने एसपीजी काफिले का आकार आधा करने का निर्देश दिया है. इस फैसले को सरकार की आर्थिक अनुशासन और संसाधनों की बचत की नीति से जोड़कर देखा जा रहा है.
प्रधानमंत्री का यह कदम केवल सुरक्षा काफिले तक सीमित नहीं है, बल्कि केंद्र सरकार के सभी मंत्रालयों और विभागों के लिए भी एक स्पष्ट संकेत माना जा रहा है. सरकार अब अनावश्यक खर्चों पर लगाम लगाने और संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर देती दिखाई दे रही है.
एसपीजी काफिले में 50 फीसदी कटौती का निर्देश
सूत्रों के अनुसार, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी सुरक्षा में लगे विशेष सुरक्षा दल (SPG) को काफिले में शामिल वाहनों की संख्या 50 फीसदी तक कम करने का निर्देश दिया है. इसके साथ ही उन्होंने काफिले में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या बढ़ाने की इच्छा भी जताई है.
हालांकि, अतिरिक्त खर्च से बचने के लिए नए वाहन खरीदने पर रोक लगाने की बात भी कही गई है. माना जा रहा है कि यह फैसला ईंधन बचत और सरकारी खर्च कम करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है.
दिल्ली से बाहर दौरों में दिखा असर
प्रधानमंत्री के निर्देश के बाद एसपीजी ने इस फैसले को लागू करना शुरू कर दिया है. हाल के दिनों में प्रधानमंत्री मोदी के दिल्ली से बाहर के दौरों के दौरान उनके काफिले का आकार पहले की तुलना में काफी छोटा देखा गया.
सुरक्षा एजेंसियां यह सुनिश्चित कर रही हैं कि काफिले का आकार घटाने के बावजूद ब्लू बुक में तय सुरक्षा मानकों से किसी तरह का समझौता न हो.
हैदराबाद दौरे में जनता से की थी अपील
रविवार को हैदराबाद दौरे के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने लोगों से ईंधन और सोने की खपत कम करने की अपील की थी. सूत्रों का कहना है कि प्रधानमंत्री ने खुद इस पहल की शुरुआत कर यह संदेश देने की कोशिश की है कि मितव्ययिता केवल जनता के लिए नहीं, बल्कि सरकार के लिए भी जरूरी है.
प्रधानमंत्री के इस कदम को “जो कहते हैं, उसे पहले खुद करके दिखाते हैं” वाली सोच का उदाहरण माना जा रहा है.
सरकारी विभागों पर भी खर्च घटाने का दबाव
सूत्रों के मुताबिक, केंद्र सरकार के विभिन्न मंत्रालयों और विभागों को भी खर्च कम करने के उपाय सुझाने के लिए कहा गया है. उम्मीद जताई जा रही है कि अब सरकारी विभाग अपने खर्चों की समीक्षा करेंगे और अनावश्यक खर्चों पर रोक लगाने की दिशा में कदम उठाएंगे.
सरकार का जोर फिलहाल आर्थिक अनुशासन, संसाधनों की बचत और आत्मनिर्भरता को मजबूत करने पर है.


